PREHISTORIC CHARACTERS ART AND COLOR COMBINATION

प्रागैतिहासिक पात्र कला व रंग संयोजन

Authors

  • Dr. Anjali Pandey Endured professor (painting) Maharani Laxmibai Government Girls Post Graduate, Autonomous College Bhopal

DOI:

https://doi.org/10.29121/granthaalayah.v2.i3SE.2014.3636

Keywords:

प्रागैतिहासिक पात्र कला, भूत काल, रंग संयोजन

Abstract [English]

The past tense can only be studied through the present. For the study of the past, one can draw conclusions about past events by taking the present objects or present-day memoirs as residuals of the past. The arguments on which conclusions are drawn are based on observation of current things, events and relationships. "1
Since time immemorial, humans have been trying to discover the past. With the development of knowledge, humans started searching for evidence related to the knowledge of the past and facts were proved with the appropriate evidence. Historians also have to use various evidence for factual presentation of knowledge related to the past. Archaeological material has become the mainstay of scientific and factual study of the history of the past. The major source of archaeological material is human creativity and artistic expression. Whose utilitarian form comes to us in the form of man-made pottery. Pots are used by historians as part time and society as special.


भूत काल का अध्ययन केवल वर्तमान के माध्यम से ही किया जा सकता है। बीते हुए समय के अध्ययन के लिये वर्तमान वस्तुओं अथवा वर्तमान में विद्यमान संस्मरणों को भूतकाल के अवषेषों के रुप में लेकर उनसे भूतकाल की धटनाओं के बारे में निष्कर्ष निकाला जा सकता है। वे तर्क जिनके आधार पर निष्कर्ष निकाले जाते वे वर्तमान वस्तुओं, घटनाओं तथा सम्बन्धों के अवलोकन पर आधारित होते हैं।’’1
अनादि काल से मानव अतीत की खोज के लिए प्रयत्नषील रहा है।़ ज्ञान के विकास के साथ मानव ने अतीत के ज्ञान सम्बधीं साक्ष्य खोजने प्रारम्भ किये और उपयुक्त साक्ष्यों से तथ्य प्रमाणित किये जाने लगे। इतिहासकार को भी अतीत सम्बंधी ज्ञान की तथ्यात्मक प्रस्तुति के लिये विभिन्न साक्ष्यों का प्रयोग करना पड़ता है। पुरातात्विक सामग्री अतीत के इतिहास के वैज्ञानिक एवं तथ्यपूर्ण अध्ययन का प्रमुख आधार बन गई है। पुरातात्विक सामग्री का प्रमुख स्त्रोत मानव की सृजनात्मकता और कलात्मक अभिव्यक्ति है। जिसका उपयोगितावादी स्वरुप मानव द्वारा निर्मित मृद्भांड के रुप में हमारे सामने आता है। मृद्भांडों को, इतिहासकार काल विषेष तथा समाज विषेष के रुप में प्रयोग करते हैं।

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References

- स्पाउल्ंिडग ए ़सी ़; 1968; एक्सप्लेनेषन इन आक्र्योलोजी इन न्यू पर्सपक्टिव इन आक्र्योलोजी, एस विनफोर्ड एवं एल विनफोर्ड , एल्डिव, षिकागो पृ-37

- गुप्त जगदीष; 1967, प्रागैतिहासिक भारतीय चित्रकला, नेष्नल बुक, दिल्ली, पृ- 58-85

- काम्बोज भगवती प्रसाद; 1988; प्राचीन यूरोपीय कला, रतन प्रकाषन मंदिर, आगरा, पृ-8

- धवलीकर एम.के. ; 1970 कायथा; ए न्यू चालकोलिथिक कल्चर इन्डिका वाॅल्यूम-7,1970 पृ- 72 DOI: https://doi.org/10.25291/VR/1970-VR-72

- गुप्त जगदीष ; वही पृ- 566

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Published

2014-12-31

How to Cite

Pandey, A. (2014). PREHISTORIC CHARACTERS ART AND COLOR COMBINATION: प्रागैतिहासिक पात्र कला व रंग संयोजन. International Journal of Research -GRANTHAALAYAH, 2(3SE), 1–2. https://doi.org/10.29121/granthaalayah.v2.i3SE.2014.3636

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