STUDENTS'
PERCEPTION OF THE RANI LAKSHMIBAI SELF-DEFENSE TRAINING: A STUDY IN THE CONTEXT
OF BUNDI DISTRICT
रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रषिक्षण के प्रति छात्राओं का प्रत्यक्षीकरणः एक अध्ययन (बून्दी जिले के संदर्भ में)
Reshma Khanam 1
, Meena Sirola 2
1 Research Scholar, Department of
Education, Vanasthali Vidyapeeth, Rajasthan, India
2 Professor, Department of Education, Vanasthali Vidyapeeth, Rajasthan, India
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ABSTRACT |
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English: The objective of this study is to study the perceptions of female students towards the Rani Lakshmibai Self-Defense Training in Bundi district, Rajasthan. In the current context, the safety, self-reliance, and empowerment of girls have become crucial issues. In light of the changing social environment and increasing challenges, equipping female students with self-defense skills has become essential. Self-defense training programs are playing a vital role in achieving this objective. The present study is based on 400 female students in Bundi district. A self-designed perception questionnaire was used to collect the data and analyzed using a percentage method. The results revealed that most female students have a positive attitude towards this training. This training is proving effective in strengthening female students' self-confidence, courage, and sense of security. Therefore, it can be said that the Rani Lakshmibai Self-Defense Training Program needs to be further strengthened. Hindi: प्रस्तुत षोध का उद्देश्य राजस्थान राज्य के बून्दी जिले में रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रषिक्षण के प्रति छात्राओ के प्रत्यक्षीकरण का अध्ययन करना है। वर्तमान परिस्थितियों में बालिकाओं की सुरक्षा, आत्मनिर्भर एवं सषक्तिकरण अत्यंत महत्वपूर्ण विषय बन गया, वर्तमान बदलते सामाजिक परिवेष और बढ़ती चुनौतियों के संदर्भ में छात्राओं को आत्मरक्षा संबंधी कौषलों से सुसज्जित करना अत्यंत आवष्यक हो गया है। इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए आत्मरक्षा प्रषिक्षण कार्यक्रम महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे है। प्रस्तुत अध्ययन बून्दी जिले की 400 छात्राओं पर आधारित है। प्रदत्त डेटा संग्रह के लिए स्वनिर्मित प्रत्यक्षीकरण प्रष्नावली का उपयोग किया गया तथा प्रतिषत विधि द्वारा विष्लेषण किया गया। परिणामों से ज्ञात हुआ कि अधिकांष छात्राएँ इस प्रषिक्षण के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखती हैं। यह प्रषिक्षण छात्राओं के आत्मविष्वास, साहस एवं सुरक्षा-बोध को सुदृढ़ करने में प्रभावी सिद्व हो रहा है। अतः यह कहा जा सकता है कि रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रषिक्षण कार्यक्रम को और अधिक सषक्त बनाने की आवष्यकता है। |
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Received 07 May 2025 Accepted 08 June 2025 Published 31 July 2025 Corresponding Author Reshma
Khanam, Reshmakhan151218@gmail.com DOI 10.29121/granthaalayah.v13.i7.2025.6868 Funding: This research
received no specific grant from any funding agency in the public, commercial,
or not-for-profit sectors. Copyright: © 2025 The
Author(s). This work is licensed under a Creative Commons
Attribution 4.0 International License. With the
license CC-BY, authors retain the copyright, allowing anyone to download,
reuse, re-print, modify, distribute, and/or copy their contribution. The work
must be properly attributed to its author.
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Keywords: Rani Laxmibai Self Defense Training,
Revelation, Empowerment, Block, Bundi District, रानी
लक्ष्मीबाई
आत्मरक्षा
प्रशिक्षण, प्रत्यक्षीकरण, सषक्तिकरण, ब्लॉक, बून्दी जिला |
|||
1. प्रस्तावना
वर्तमान
सामाजिक
परिदृष्य में
बालिकाओं की सुरक्षा
सुनिष्चित
करना न केवल
एक सामाजिक उत्तरदायित्व
है, बल्कि
षिक्षा
व्यवस्था की
एक अत्यंत
महत्वपूर्ण
आवष्यकता बन
गया है।
महिलाओं के
विरूद्व बढ़ती
अप्रिय
घटनाओें और
बदलते परिवेष
ने यह स्पष्ट
कर दिया है कि
बालिकाओं को
केवल षैक्षणिक
ज्ञान तक
सीमित रखना
पर्याप्त नही; उन्हें
आत्मरक्षा
संबंधी
व्यावहारिक
कौषल से जोड़ना
समय की मांग
है। इसी
उद्देश्य की
पूर्ति हेतु
विद्यालयों
में
आत्मरक्षा
प्रषिक्षण
कार्यक्रमों
को विषेष रूप
से प्रोत्साहित
किया जा रहा
है। यह
प्रषिक्षण
छात्राओं को
केवल
आत्मरक्षा की
तकनीके ही नही
सिखाता है, बल्कि
उनमें
आत्मसम्मान, मानसिक
सतर्कता, साहस और
त्वरित
निर्णय लेने
की क्षमता
जैसे आवष्यक
गुणों का
संचार करता है, जिससे
वे स्वयं को
अधिक
सुरक्षित, जागरूक
और
आत्मनिर्भर
महसूस करती
है।
षोध
उद्देश्य: 1
बून्दी जिले
के संदर्भ में
रानी
लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा
प्रशिक्षण के
विभिन्न
पक्षों प्रति
छात्राओं के
प्रत्यक्षीकरण
का अध्ययन करना।
2. शोध परिेल्पनाएँ
1) बून्दी
जिले के
संदर्भ में
रानी
लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा
प्रषिक्षण के
विभिन्न
पक्षों के प्रति
छात्राओं के
प्रत्यक्षीकरण
में अंतर नहीं
होता है।
2) बून्दी
ब्लॉक में
रानी
लक्ष्मीबाई
आत्मरक्षा
प्रषिक्षण के
विभिन्न
पक्षों के
प्रति
छात्राओं के
प्रत्यक्षीकरण
में अंतर नहीं
होता है।
3) तालेड़ा
ब्लॉक में
रानी
लक्ष्मीबाई
आत्मरक्षा
प्रषिक्षण के
विभिन्न
पक्षों के
प्रति
छात्राओं के
प्रत्यक्षीकरण
में अंतर नहीं
होता है।
4) नैनवां
ब्लॉक ब्लॉक
में रानी
लक्ष्मीबाई
आत्मरक्षा
प्रषिक्षण के
विभिन्न
पक्षों के
प्रति
छात्राओं के
प्रत्यक्षीकरण
में अंतर नहीं
होता है।
5) केषवरायपाटन
ब्लॉक में
रानी
लक्ष्मीबाई
आत्मरक्षा
प्रषिक्षण के
विभिन्न
पक्षों के
प्रति
छात्राओं के
प्रत्यक्षीकरण
में अंतर नहीं
होता है।
6) हिंडोली
ब्लॉक में
रानी
लक्ष्मीबाई
आत्मरक्षा
प्रषिक्षण के
विभिन्न
पक्षों के
प्रति
छात्राओं के
प्रत्यक्षीकरण
में अंतर नहीं
होता है।
3. शोध पद्वति
प्रस्तुत
षोध अध्ययन
में
सर्वेक्षण
विधि का प्रयोग
किया
गया।प्रस्तुत
शोध अध्ययन
में बून्दी
जिले के पाॅच ब्लॉक
बून्दी,
तालेड़ा, हिंड़ोली, नैनवां, केशवरायपाटन
को न्यादर्श
के रूप में का
चयन किया गया।
प्रत्येक ब्लॉक
से राजकीय
विद्यालयों
का चयन किया
गया। कुल 80
छात्राओं तथा
संपूर्ण
अध्ययन हेतु 400
छात्राओं का
चयन हेतु किया
गया। अध्ययन
हेतु
उन्हीं
छात्राओं का
चयन किया गया
जिन्होंने रानी
लक्ष्मीबाई
आत्मरक्षा
प्रशिक्षण
प्राप्त किया
है। प्रस्तुत
षोध अध्ययन
में पदत्तो की
प्रकृति
मात्रात्मक
है इस हेतु
षोधार्थी ने
स्वनिर्मित
प्रष्नावली
का प्रयोगकर
पदत्तो
का संकलन
किया है।
षोधार्थीयो
से प्राप्त प्रदत्तों
का विष्लेषण
प्रतिषत के
माध्यम से किया
गया है।
4. आंकड़ों का विष्लेषण
परिकल्पना-1.0
बून्दी जिले
के संदर्भ में
रानी
लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा
प्रषिक्षण के
विभिन्न
पक्षों के प्रति
छात्राओं के
प्रत्यक्षीकरण
में अंतर नहीं
होता है।
तालिका 1
|
तालिका 1 बून्दी
जिले के
संदर्भ में
रानी
लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा
प्रषिक्षण
के विभिन्न
पक्षों के प्रति
छात्राओं के
प्रत्यक्षीकरण |
|||
|
पक्ष |
सहमत |
तटस्थ |
असहमत |
|
लाभ |
90.17 |
2.88 |
6.95 |
|
गतिविधियाँ |
90.00 |
2.5 |
7.5 |
|
समस्याएँ |
65.27 |
3.17 |
31.56 |

उपरोक्त तालिका 1
तथा आलेख
संख्या 1.0 के
आंकड़ों के
विष्लेषण से
स्पष्ट होता
है कि रानी
लक्ष्मीबाई
आत्मरक्षा
प्रषिक्षण के
विभिन्न
पक्षों के
प्रति
छात्राओं में
सकारात्मक
प्रत्यक्षीकरण
पाया गया है।
तालिका के अनुसार
लाभ, के
संदर्भ में 90.17
प्रतिषत सहतम, 2.88
प्रतिषत
तटस्थ व 65.27 प्रतिषत
असहमत पाई
गईं। इससे
स्पष्ट होता
है कि अधिकांष
छात्राएँ
आत्मरक्षा
प्रषिक्षण को
अत्यंत
उपयोगी एवं
लाभकारी
मानती है। इसी
प्रकार,
गतिविधियों
के संदर्भ में
90.00
प्रतिषत सहतम, 2.5
प्रतिषत
तटस्थ व 7.5 प्रतिषत
असहमत पाई
गईं। इससे
स्पष्ट होता
है कि प्रषिक्षण
के दौरान कराई
जाने वाली
गतिविधियाँ
प्रभावी, रोचक एवं
छात्राओं की
अपेक्षाओं के
अनुरूप हैं।
वही समस्याओं
के संदर्भ में
65.27
प्रतिषत सहतम, 3.17
प्रतिषत
तटस्थ व 31.56 प्रतिषत
असहमत पाई
गईं। इससे
स्पष्ट होता
है लाभ एवं
गतिविधियाँ
सकारात्मक
हैं, फिर
भी कुछ
व्यावहारिक
समस्याएँ
विद्यमान हैं, जिनमें
संसाधनों की
कमी, प्रषिक्षण
की अनियमितता, समयाभाव
एवं
प्रषिक्षकों
की कमी प्रमुख
हो सकती है।
निष्कर्ष
- प्रतिषतों
की तुलना से
यह निष्कर्ष
प्राप्त होता
है कि रानी
लक्ष्मीबाई
आत्मरक्षा
प्रषिक्षण के
लाभ एवं
गतिविधियाँ
अत्यंत
प्रभावी हैं, क्योंकि
इनमें सहमति
को प्रतिषत 90.00
प्रतिषत से
अधिक है।
हालांकि, समस्याओं
के संदर्भ में
65.27
प्रतिषत
सहमति यह
संकेत करती है
कि प्रषिक्षण
में कुछ
चुनौतियाँ भी
मौजुद हैं, जिसका
समाधान
आवष्यक है।
अतः
परिकल्पना 1.0
बून्दी जिले
के संदर्भ में
रानी
लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा
प्रषिक्षण के
विभिन्न
पक्षों के प्रति
छात्राओं के
प्रत्यक्षीकरण
में अंतर नहीं
होता है
आंषिकरूप से
स्वीकृत की
जाती है।
2.0
बून्दी ब्लॉक
में रानी
लक्ष्मीबाई
आत्मरक्षा
प्रषिक्षण के
विभिन्न
पक्षों प्रति
छात्राओं के
प्रत्यक्षीकरण
में अंतर नहीं
होता है।
तालिका 2
|
तालिका 2
बून्दी
ब्लॉक में
रानी
लक्ष्मीबाई
आत्मरक्षा
प्रषिक्षण
के विभिन्न
पक्षों के
प्रति छात्राओं
के
प्रत्यक्षीकरण |
|||
|
पक्ष |
सहमत |
तटस्थ |
असहमत |
|
लाभ |
90.63 |
0.20 |
9.17 |
|
गतिविधियाँ |
90.92 |
0.00 |
9.38 |
|
समस्याएँ |
75 |
3.75 |
21.25 |

उपरोक्त तालिका 2
तथा आलेख
संख्या 2.0 के
आंकड़ों के
विष्लेषण से
स्पष्ट होता
है कि रानी
लक्ष्मीबाई
आत्मरक्षा
प्रषिक्षण के
विभिन्न
पक्षों के
प्रति
छात्राओं में
सकारात्मक
प्रत्यक्षीकरण
पाया गया है।
तालिका के
अनुसार लाभ, के
पक्ष में 90.63
प्रतिषत सहतम, 0.20
प्रतिषत
तटस्थ व 9.17 प्रतिषत
असहमत पाई
गईं। इससे
स्पष्ट होता
है कि अधिकांष
छात्राएँ
आत्मरक्षा
प्रषिक्षण को
अत्यंत
उपयोगी एवं
लाभकारी
मानती है। इसी
प्रकार,
गतिविधियों
के संदर्भ में
90.90प्रतिषत
सहतम,
0.00 प्रतिषत
तटस्थ व 9.38 प्रितिषत
असहमत पाई
गईं। इससे
स्पष्ट होता है
कि प्रषिक्षण
के दौरान कराई
जाने वाली
गतिविधियाँ प्रभावी, रोचक
एवं छात्राओं
की अपेक्षाओं
के अनुरूप हैं।
वही समस्याओं
के संदर्भ में
75.00
प्रतिषत सहतम, 3.75
प्रतिषत
तटस्थ व 21.25 प्रतिषत
असहमत पाई
गईं। इससे
स्पष्ट होता
है कि
प्रषिक्षण
में कुछ
समस्याएँ भी
विद्यमान हैं,
निष्कर्ष
-
प्रतिषतों
की तुलना से
यह निष्कर्ष प्राप्त
होता है कि
रानी
लक्ष्मीबाई
आत्मरक्षा
प्रषिक्षण के
लाभ एवं
गतिविधियाँ
अत्यंत प्रभावी
हैं, क्योंकि
इनमें सहमति
को प्रतिषत 90.00
प्रतिषत से
अधिक है।
हालांकि, समस्याओं
के संदर्भ में
75.00
प्रतिषत
सहमति यह
संकेत करती है
कि प्रषिक्षण
में कुछ
चुनौतियाँ भी
मौजुद हैं, जिन्हें
दूर करना
आवष्यक है।
अतः
परिकल्पना 2.0
बून्दी ब्लॉक
में रानी
लक्ष्मीबाई
आत्मरक्षा
प्रषिक्षण के
विभिन्न
पक्षों प्रति
छात्राओं के
प्रत्यक्षीकरण
में अंतर नहीं
होता है
आंषिकरूप से स्वीकृत
की जाती है।
3.0
तालेड़ा ब्लॉक
में रानी
लक्ष्मीबाई
आत्मरक्षा
प्रषिक्षण के
विभिन्न
पक्षों के
प्रति
छात्राओं के
प्रत्यक्षीकरण
में अंतर नहीं
होता है।
तालिका 3
|
तालिका 3
तालेड़ा
ब्लॉक में
रानी
लक्ष्मीबाई
आत्मरक्षा
प्रषिक्षण
के विभिन्न
पक्षों के
प्रति छात्राओं
के
प्रत्यक्षीकरण |
|||
|
पक्ष |
सहमत |
तटस्थ |
असहमत |
|
लाभ |
89.58 |
7.5 |
2.92 |
|
गतिविधियाँ |
86.25 |
7.62 |
6.13 |
|
समस्याएँ |
61.57 |
9.27 |
29.16 |

उपरोक्त तालिका 3 तथा
आलेख संख्या 3.0 के
आंकड़ों के
विष्लेषण से
स्पष्ट होता
है कि रानी
लक्ष्मीबाई
आत्मरक्षा
प्रषिक्षण के
विभिन्न
पक्षों के
प्रति
छात्राओं में
सकारात्मक
प्रत्यक्षीकरण
पाया गया है।
तालिका के
अनुसार लाभ, के
पक्ष में 89.58
प्रतिषत सहतम, 7.5
प्रतिषत
तटस्थ व 2.92 प्रतिषत
असहमत पाई
गईं। इससे
स्पष्ट होता
है कि अधिकांष
छात्राएँ
आत्मरक्षा
प्रषिक्षण को
अत्यंत
उपयोगी एवं
लाभकारी
मानती है। इसी
प्रकार,
गतिविधियों
के संदर्भ में
86.25
प्रतिषत सहतम, 7.62
प्रतिषत
तटस्थ व 6.13 प्रतिषत
असहमत पाई
गईं। इससे
स्पष्ट होता
है कि प्रषिक्षण
के दौरान कराई
जाने वाली
गतिविधियाँ प्रभावी
एवं संतोषजनक
हैं, यद्यपि
कुछ छात्राएँ
पूर्णतः
संतुष्ट नहीं हैं।
वही समस्याओं
के संदर्भ में
61.57
प्रतिषत सहतम, 6.27
प्रतिषत
तटस्थ व 29.16 प्रतिषत
असहमत पाई
गईं। इससे
स्पष्ट होता
है कि
प्रषिक्षण
में कुछ
समस्याएँ भी
विद्यमान हैं, जिसका
प्रभाव एक
सीमा तक
छात्राओं
द्वारा अनुभव
किया गया है।
निष्कर्ष
-
प्रतिषतों
की तुलना से
यह निष्कर्ष प्राप्त
होता है कि
रानी
लक्ष्मीबाई
आत्मरक्षा
प्रषिक्षण के
लाभ एवं
गतिविधियाँ
अत्यंत प्रभावी
हैं, क्योंकि
इनमें सहमति
का प्रतिषत 86.25
प्रतिषत से 89.58
प्रतिषत है।
हालांकि, समस्याओं
के पक्ष में 61.57
प्रतिषत
सहमति यह
संकेत करती है
कि प्रषिक्षण
में कुछ
चुनौतियाँ भी
मौजुद हैं, जिन्हें
दूर करना
आवष्यक है।
अतः
परिकल्पना 3.0 तालेड़ा ब्लॉक
में रानी
लक्ष्मीबाई
आत्मरक्षा
प्रषिक्षण के
विभिन्न
पक्षों प्रति
छात्राओं के
प्रत्यक्षीकरण
में अंतर नहीं
होता है
आंषिकरूप से स्वीकृत
की जाती है।
4.0
नैनवां ब्लॉक
में रानी
लक्ष्मीबाई
आत्मरक्षा
प्रषिक्षण के
विभिन्न
पक्षों के
प्रति
छात्राओं के
प्रत्यक्षीकरण
में अंतर नहीं
होता है।
तालिका 4
|
तालिका 4
नैनवां
ब्लॉक में
रानी
लक्ष्मीबाई
आत्मरक्षा
प्रषिक्षण
के विभिन्न
पक्षों के
प्रति छात्राओं
के
प्रत्यक्षीकरण |
|||
|
पक्ष |
सहमत |
तटस्थ |
असहमत |
|
लाभ |
88.43 |
6.66 |
4.91 |
|
गतिविधियाँ |
83.5 |
9.00 |
7.5 |
|
समस्याएँ |
87.60 |
6.14 |
6.26 |

उपरोक्त तालिका 4
तथा आलेख
संख्या 4.0 के
आंकड़ों के
विष्लेषण से
स्पष्ट होता
है कि रानी
लक्ष्मीबाई
आत्मरक्षा
प्रषिक्षण के
विभिन्न
पक्षों के
प्रति
छात्राओं में
सकारात्मक
प्रत्यक्षीकरण
पाया गया है।
तालिका के
अनुसार लाभ, के
पक्ष में 88.43
प्रतिषत सहतम, 6.66
प्रतिषत
तटस्थ व 4.91 प्रतिषत
असहमत पाई
गईं। इससे
स्पष्ट होता
है कि अधिकांष
छात्राएँ
आत्मरक्षा
प्रषिक्षण को
अत्यंत
उपयोगी एवं
लाभकारी
मानती है। इसी
प्रकार,
गतिविधियों
के संदर्भ में
83.5
प्रतिषत सहतम, 9.00
प्रतिषत
तटस्थ व 7.5 प्रतिषत
असहमत पाई
गईं। इससे
स्पष्ट होता
है कि प्रषिक्षण
के दौरान कराई
जाने वाली
गतिविधियाँ
प्रभावी एवं
संतोषजनक हैं, यद्यपि
कुछ छात्राएँ
पूर्णतः
संतुष्ट हैं। वही
समस्याओं के
संदर्भ में 87.60
प्रतिषत सहतम, 6.14
प्रतिषत
तटस्थ व 6.26 प्रतिषत
असहमत पाई
गईं। इससे
स्पष्ट होता
है कि
प्रषिक्षण
में कुछ
समस्याएँ भी
विद्यमान हैं, जिसका
प्रभाव एक
सीमा तक
छात्राओं
द्वारा अनुभव
किया गया है।
निष्कर्ष
- प्रतिषतों
की तुलना से
यह निष्कर्ष
प्राप्त होता
है कि रानी
लक्ष्मीबाई
आत्मरक्षा
प्रषिक्षण के
लाभ एवं
गतिविधियाँ
अत्यंत
प्रभावी हैं, क्योंकि
इनमें सहमति
का प्रतिषत 87.60
प्रतिषत है।
हालांकि, समस्याओं
के पक्ष में
प्रतिषत
सहमति यह
संकेत करती है
कि प्रषिक्षण
में कुछ चुनौतियाँ
भी मौजुद हैं, जिन्हें
दूर करना
आवष्यक है।
अतः
परिकल्पना 4.0 नैनवां ब्लॉक
में रानी
लक्ष्मीबाई
आत्मरक्षा
प्रषिक्षण के
विभिन्न
पक्षों प्रति
छात्राओं के
प्रत्यक्षीकरण
में अंतर नहीं
होता है
आंषिकरूप से स्वीकृत
की जाती है।
5.0
केषवरायपाटन ब्लॉक
में रानी
लक्ष्मीबाई
आत्मरक्षा
प्रषिक्षण के
विभिन्न
पक्षों के
प्रति
छात्राओं के
प्रत्यक्षीकरण
में अंतर नहीं
होता है।
तालिका 5
|
तालिका 5
केषवरायपाटन
ब्लॉक में
रानी
लक्ष्मीबाई
आत्मरक्षा
प्रषिक्षण
के विभिन्न
पक्षों के प्रति
छात्राओं के
प्रत्यक्षीकरण |
|||
|
पक्ष |
सहमत |
तटस्थ |
असहमत |
|
लाभ |
91.15 |
0.00 |
8.85 |
|
गतिविधियाँ |
91.00 |
0.00 |
9.00 |
|
समस्याएँ |
75.00 |
0.00 |
25 |

उपरोक्त तालिका 5
तथा आलेख
संख्या 5.0 के
आंकड़ों के
विष्लेषण से
स्पष्ट होता
है कि रानी
लक्ष्मीबाई
आत्मरक्षा
प्रषिक्षण के
विभिन्न
पक्षों के
प्रति
छात्राओं में
सकारात्मक
प्रत्यक्षीकरण
पाया गया है।
तालिका के
अनुसार लाभ, के
पक्ष में 91.15
प्रतिषत सहतम, 0.00
प्रतिषत
तटस्थ व 8.85 प्रतिषत
असहमत पाई
गईं। इससे
स्पष्ट होता
है कि अधिकांष
छात्राएँ
आत्मरक्षा
प्रषिक्षण को
अत्यंत
उपयोगी एवं
लाभकारी
मानती है। इसी
प्रकार,
गतिविधियों
के संदर्भ में
91.00
प्रतिषत सहतम, 0.00
प्रतिषत
तटस्थ व 9.00 प्रतिषत
असहमत पाई
गईं। इससे
स्पष्ट होता
है कि प्रषिक्षण
के दौरान कराई
जाने वाली
गतिविधियाँ प्रभावी
एवं संतोषजनक
हैं, यद्यपि
कुछ छात्राएँ
पूर्णतः
संतुष्ट हैं। वही
समस्याओं के
संदर्भ में 75.00
प्रतिषत सहतम, 0.00
प्रतिषत
तटस्थ व 25.00 प्रतिषत
असहमत पाई
गईं। इससे
स्पष्ट होता
है कि
प्रषिक्षण
में कुछ
समस्याएँ भी
विद्यमान हैं, जिसका
प्रभाव एक
सीमा तक
छात्राओं
द्वारा अनुभव
किया गया है।
निष्कर्ष
- प्रतिषतों
की तुलना से
यह निष्कर्ष
प्राप्त होता
है कि रानी
लक्ष्मीबाई
आत्मरक्षा
प्रषिक्षण के
लाभ एवं
गतिविधियाँ
अत्यंत
प्रभावी हैं, क्योंकि
इनमें सहमति
का प्रतिषत 91.15
प्रतिषत के
पास सहमति
प्राप्त हुई
है। हालांकि, समस्याओं
के पक्ष में 75
प्रतिषत
सहमति यह
संकेत करती है
कि प्रषिक्षण
में कुछ
चुनौतियाँ भी
मौजुद हैं, जिन्हें
दूर करना
आवष्यक है।
अतः
परिकल्पना 5.0
नैनवां ब्लॉक
में रानी
लक्ष्मीबाई
आत्मरक्षा
प्रषिक्षण के
विभिन्न
पक्षों प्रति
छात्राओं के
प्रत्यक्षीकरण
में अंतर नहीं
होता है
आंषिकरूप से स्वीकृत
की जाती है।
6.0
हिंडोली ब्लॉक
में रानी
लक्ष्मीबाई
आत्मरक्षा
प्रषिक्षण के
विभिन्न
पक्षों के
प्रति
छात्राओं के
प्रत्यक्षीकरण
में अंतर नहीं
होता है।
तालिका 6
|
तालिका 6
हिंडोली
ब्लॉक में
रानी
लक्ष्मीबाई
आत्मरक्षा
प्रषिक्षण
के विभिन्न
पक्षों के
प्रति छात्राओं
के
प्रत्यक्षीकरण |
|||
|
पक्ष |
सहमत |
तटस्थ |
असहमत |
|
लाभ |
91.04 |
0.00 |
8.96 |
|
गतिविधियाँ |
92.5 |
0.00 |
7.5 |
|
समस्याएँ |
54.06 |
0.00 |
45.94 |

उपरोक्त तालिका 6
तथा आलेख
संख्या 6.0 के
आंकड़ों के
विष्लेषण से
स्पष्ट होता
है कि रानी
लक्ष्मीबाई
आत्मरक्षा
प्रषिक्षण के
विभिन्न
पक्षों के
प्रति
छात्राओं में
सकारात्मक
प्रत्यक्षीकरण
पाया गया है।
तालिका के
अनुसार लाभ, के
पक्ष में 91.04
प्रतिषत सहतम, 0.00
प्रतिषत
तटस्थ व 8.96 प्रतिषत
असहमत पाई
गईं। इससे
स्पष्ट होता
है कि अधिकांष
छात्राएँ
आत्मरक्षा
प्रषिक्षण को
अत्यंत
उपयोगी एवं
लाभकारी
मानती है। इसी
प्रकार,
गतिविधियों
के संदर्भ में
92.5
प्रतिषत सहतम, 0.00
प्रतिषत
तटस्थ व 7.5 प्रतिषत
असहमत पाई
गईं। इससे
स्पष्ट होता
है कि प्रषिक्षण
के दौरान कराई
जाने वाली
गतिविधियाँ
प्रभावी एवं
संतोषजनक हैं, यद्यपि
कुछ छात्राएँ
पूर्णतः
संतुष्ट हैं। वही
समस्याओं के
संदर्भ में 54.06
प्रतिषत सहतम, 0.00
प्रतिषत
तटस्थ व 45.94 प्रतिषत
असहमत पाई
गईं। इससे
स्पष्ट होता
है कि
प्रषिक्षण
में कुछ
समस्याएँ भी
विद्यमान हैं, जिसका
प्रभाव एक
सीमा तक
छात्राओं
द्वारा अनुभव
किया गया है।
निष्कर्ष
- प्रतिषतों
की तुलना से
यह निष्कर्ष
प्राप्त होता
है कि रानी
लक्ष्मीबाई
आत्मरक्षा
प्रषिक्षण के
लाभ एवं
गतिविधियाँ
अत्यंत
प्रभावी हैं, क्योंकि
इनमें सहमति
का प्रतिषत 90
प्रतिषत से
अधिक सहमति
प्राप्त हुई
है। हालांकि, समस्याओं
के पक्ष में 54.06
प्रतिषत
सहमति 45.94
असहमति यह
संकेत करती है
कि प्रषिक्षण
में कुछ
स्थानों पर
समस्याएँ हैं, जबकि
कुछ स्थानों
पर नहीं है।
अतः
प्रषिक्षण को
अधिक सुदृढ़
बनाने आवष्यक
है। अतः
परिकल्पना 6.0
हिंडोली ब्लॉक
में रानी
लक्ष्मीबाई
आत्मरक्षा
प्रषिक्षण के
विभिन्न
पक्षों प्रति
छात्राओं के प्रत्यक्षीकरण
में अंतर नहीं
होता है आंषिकरूप
से स्वीकृत की
जाती है।
5. षोध
निष्कर्ष
1) रानी
लक्ष्मीबाई
आत्मरक्षा
प्रषिक्षण के
लाभों के
संबंध में
प्राप्त
आंकड़ों के
विश्लेषण से
यह स्पष्ट
होता है कि
छात्राएँ
आत्मरक्षा
प्रषिक्षण को
अत्यंत
लाभदायक
मानती हैं। आत्मरक्षा
प्रषिक्षण के
माध्यम से
छात्राओं में
आत्मविष्वास, साहस, आत्मनिर्भरता, मानसिक
सषक्तिकरण
तथा सुरक्षा
की भावना का विकास
होता है। इसके
अतिरिक्त
छात्राएँ
आपातकालीन
परिस्थितियों
का सामना करने
एवं संभावित
खतरों से
स्वयं की
रक्षा करने
में अधिक सक्षम
बनती हैं। यह
प्रषिक्षण
छात्राओं के
व्यक्तित्व
विकास में
महत्वपूर्ण
भूमिका निभाता
है, क्योंकि
इससे उनमें
निर्णय लेने
की क्षमता, आत्म-सुरक्षा
के प्रति
जागरूकता तथा
कठिन परिस्थितियों
में धैर्य एवं
साहस बनाए
रखने की क्षमता
विकसित होती
है। अतः
निष्कर्ष रूप
में कहा जा
सकता है कि
आत्मरक्षा
प्रषिक्षण
छात्राओं के
व्यक्तित्व विकास, आत्मविष्वास
में वृद्वि, मानसिक
एवं षारीरिक
सषक्तिकरण
तथा सुरक्षा जागरूकता
के विकास में
अत्यंत
महत्वपूर्ण एवं
प्रभावी
सिद्व होता
है।
2) रानी
लक्ष्मीबाई
आत्मरक्षा
प्रषिक्षण के
अध्ययन से
प्राप्त
आकड़ों के
विश्लेषण के
आधार पर यह
निष्कर्ष
निकलता है कि
प्रषिक्षण के
अंतर्गत
विभिन्न
प्रकार की
षारीरिक, मानसिक
एवं
आत्मरक्षा
संबंधी
गतिविधियाँ नियमित
रूप से
संचालित की
जाती हैं।
प्रषिक्षण
कार्यक्रम के
अंतर्गत
छात्राओं को
प्रतिदिन
निर्धारित
समय तक अभ्यास
कराया जाता है, जो
आत्मरक्षा
कौषल के विकास
के लिए
पर्याप्त पाया
गया।
प्रषिक्षण
प्रारम्भ
होने से पूर्व
छात्राओं
द्वारा हल्का
व्यायाम एवं
वार्म-अप
कराया जाता है, जिससे
उनके षरीर में
लचीलापन आता
है तथा वे कठिन
आत्मरक्षा
क्रियाओं को
आसानी से कर
पाती हैं।
प्रषिक्षण
के दौरान
छात्राओं को
कराटें,
मुक्का
प्रहार,
लात प्रहार, मार्षल
आर्ट आदि
आत्मरक्षा
तकनीकों को
अभ्यास कराया
जाता है, जिससे वे
आकस्मिक
परिस्थितियों
में अपनी सुरक्षा
करने में
सक्षम बनती है
। इसके
अतिरिक्त
प्रषिक्षण
में योग
क्रियाएँ, विषेष
रूप से सूर्य
नमस्कार, भी कराया
जाता है, जो
छात्राओं के
षारीरिक एवं
मानसिक
स्वास्थ्य
एवं उर्जा
स्तर को बनाए
रखने में
सहायता मिलती
है।
प्रषिक्षण
के लिए उपलब्ध
अभ्यास स्थल
को भी अधिकांष
छात्राओं ने
पर्याप्त
माना,
जिससे यह
स्पष्ट होता
है कि
प्रषिक्षण के
संचालन के
आवष्यक भौतिक
सुविधाएँ
उपलब्ध हैं। आत्मरक्षा
प्रषिक्षण
में छात्राओं
के दुपट्टे
जैसी देनिक
उपयोग की
वस्तुओं से
आत्मरक्षा
करने की तकनीक
भी सिखाई जाती
है, जो
व्यवहारिक
दृष्टि से
अत्यंत
उपयोगी है। इससे
उनमे भय एवं
असुरक्षा की
भावना कम होती
है और वे
आत्मविष्वास
के साथ किसी
भी चुनौतीपूर्ण
स्थिति का
सामना कर सकती
हैं।
इसके
अतिरिक्त, संतुलित
आहार एवं
स्वास्थ्य
संबंधी
जानकारी के
माध्यम से
छात्राओं में
स्वास्थ्य के
प्रति
जागरूकता
उत्पन्न होती
है, जिससे
उनका षारीरिक
एवं मानसिक
विकास संतुलित
रूप से होता
है। नियमित
अभ्यास एवं
समूह गतिविधियों
के माध्यम से
छात्राओं में
अनुषासन, समय-पालन, सहयोग
की भावना एवं
टीम वर्क का
विकास होता है।
अतः समग्र
रूप से यह कहा
जा सकता है कि
रानी लक्ष्मीबाई
आत्मरक्षा
प्रषिक्षण
कार्यक्रम के
अंतर्गत
संचालित
विभिन्न
गतिविधियाँ
छात्राओं के
षारीरिक, मानसिक, सामाजिक
एवं
भावनात्मक
विकास में
महत्वपूण योगदान
देती
3) आत्मरक्षा
प्रषिक्षण के
अध्ययन से
प्राप्त आकड़ों
के विश्लेषण
के आधार पर यह
निष्कर्ष निकलता
है कि
प्रषिक्षण
कार्यक्रम के
दौरान छात्राओं
को विभिन्न
प्रकार की
समस्याओं का
सामना करना
पड़ता है। इस
समस्याओं में
प्रमुख रूप से
षारीरिक थकान, चोट
लगने का भय, ध्यान
केंद्रित
करने में
कठिनाई,
मानसिक तनाव, पारिवारिक
बाधाएँ,
प्रषिक्षण
के दौरान खेल
वेषभूषा में
असहजता,
मासिक धर्म
से संबंधित
समस्याएँ, अध्ययन
समय पर प्रभाव, सहपाठियों
द्वारा उपहास, प्रषिक्षक
की भाषा समझने
में कठिनाई, प्रषिक्षक
द्वारा
प्रेरणा की
कमी तथा षारीरिक
अस्वस्थता
आदि समस्याएँ
प्रमुख रूप से
सामने आई हैं।
विस्तृत
विश्लेषण से
यह स्पष्ट
होता है कि आत्मरक्षा
प्रषिक्षण के
दौरान होने
वाली समस्याएँ
केवल षारीरिक
ही नहीं हैं, बल्कि
मानसिक,
सामाजिक, पारिवारिक
एवं षैक्षिक
प्रकृति की भी
हैं। षारीरिक
समस्याओं में
अधिक अभ्यास
के कारण थकान, चोट
लगने का भय, मासिक
धर्म के दौरान
असुविधा तथा
षारीरिक अस्वस्थता
जैसी
समस्याएँ
षामिक हैं। इन
समस्याओं के
कारण कुछ
छात्राएँ
प्रषिक्षण
में पूर्ण रूप
से भाग नहीं
ले पाती हैं, जिससे
उनके
प्रषिक्षण की
निरंतरता
प्रभावित
होती है।
सामाजिक
एवं
पारिवारिक
समस्याएँ भी
आत्मरक्षा
प्रषिक्षण
में एक
महत्वपूर्ण
बाधा के रूप
में सामने आई
हैं। कुछ
छात्राओं को
प्रषिक्षण के
दौरान खेल
वेषभूषा
पहनने में
असजता महसूस
होती है, जो
सामाजिक
संकोच या
पारिवारिक
वातावण के कारण
हो सकता है।
इसके
अतिरिक्त कुछ
छात्राओं ने
यह भी अनुभव
किया कि
सहपाठियों
द्वारा उपहास
किए जाने के
कारण वे
प्रषिक्षण
में भाग लेने
में संकोच
महसूस करती
हैं।
पारिवारिक
बाधाओं जैसे
परिवार की
अनुमति न
मिलना,
घरेलू
कार्यों की
जिम्मेदारी
या सामाजिक प्रतिबंध
भी छात्राओं
की नियमित
उपस्थिति को प्रभावित
करते हैं।
प्रषिक्षण
व्यवस्था से
संबंधित
समस्याओं में
प्रषिक्षण की
भाषा समझने
में कठिनाई
तथा प्रषिक्षक
द्वारा
पर्याप्त
प्रेरणा न
मिलता भी
प्रमुख
समस्याएँ
पाईं। यदि
प्रषिक्षण छात्राओं
की भाषा में
सही ढ़ग से
समझाए नहीं, तो
छात्राएँ
तकनीकों को
सही प्रकार से
नहीं सीख पाती
हैं। इसी
छात्राओं की
रूचि एवं
सहभागिता कम
हो जाती हैं।
षैक्षिक
समस्या के रूप
में यह भी
पाया गया कि आत्मरक्षा
प्रषिक्षण के
कारण कभी-कभी
छात्राओं के
अध्ययन समय पर
प्रभाव पड़ता
है, जिससे
वे प्रषिक्षण
और पढ़ाई के
बीच संतुलन बनाने
में कठिनाई
महसूस करती
हैं।
अतः
अध्ययन से यह
स्पष्ट होता
है कि
आत्मरक्षा
प्रषिक्षण
कार्यक्रम
उपयोगी होने
के बावजूद
विभिन्न
प्रकार की
समस्याओं के
कारण इसकी प्रभावषीलता
पूर्ण रूप से
प्राप्त नहीं
हो पा रही है।
यदि इन
षारीरिक, मानसिक, सामाजिक, पारिवारिक
एवं
प्रषिक्षण
व्यवस्था से
संबंधित
समस्याओं का
समाधान कर
दिया जाए, तो
आत्मरक्षा
प्रषिक्षण
कार्यक्रम को
और अधिक
प्रभावी
बनाया जा सकता
है। इससे
छात्राओं की
सहभागिता
बढ़ेगी,
उनकी रूचि
में वृद्वि
होगी तथा वे
आत्मरक्षा प्रषिक्षण
से अधिक लाभ
प्राप्त कर
सकेंगी।
षैक्षिक
निहितार्थ -
प्रस्तुत षोध
अध्ययन
नीती-निर्देषको, विद्यालय
प्रषासन, षिक्षकों, छात्राओं, समाज, अभिभावकों
और भावी
षोधकर्ताओं
की दृष्टि से महत्वपूर्ण
है।
विद्यालय
प्रषासन की
दृष्टि से -
विद्यालय
स्तर पर
आत्मरक्षा
प्रषिक्षण के
लिए स्थायी
प्रषिक्षण
केंद्रों, प्रषिक्षकों और
संसाधनों की
व्यवस्था की
जानी चाहिए, साथ
ही विद्यालय को
छात्राओं की
उपस्थिति, सक्रिय
भागीदारी और
प्रगति का
रिकाॅर्ड रखना
चाहिए।
·
षिक्षकों
की दृष्टि से -
षिक्षिकाओं
को आत्मरक्षा
के मूल
सिद्वांतों
का प्रषिक्षण
दिया जाना
चाहिए ताकि वे
छात्राओं को
बेहतर मार्गदषन
दे सकें और
उनके भीतर
आत्मसुरक्षा
की भावना को
सुदृढ़ करने
में
महत्वपूर्ण
भूमिका निभा सकें।
·
छात्राओं
की दृष्टि से -
इस आत्मरक्षा
प्रषिक्षण से
छात्राओं में
आत्मविष्वास,षारीरिक
स्फूर्ति और
मानसिक दृढ़ता
का विकास होता
है। यह
प्रषिक्षण
छात्राओं को
असामाजिक
परिस्थितियों
में स्वयं को
सुरक्षित
रखने का साहस
और कौषल
प्रदान करता
है।
प्रषिक्षण प्राप्त
छात्राएँ
अन्य
छात्राओं के
लिए प्रेरणा
स्त्रोत बन
सकती हैं।
·
समाज की
दृष्टि से -
आत्मरक्षा
प्रषिक्षण से
समाज में
बालिकाओं के
प्रति
सकारात्मक
दृष्टिकोण और
सम्मान की
भावना
उत्पन्न होती
है। जो महिला
सषक्तिकरण, लैंगिक
समानता और
सुरक्षित
समाज की दिषा
में ठोंस कदम
है।
·
अभिभावकों
की दृष्टि से -
अभिभावकों को
यह समझना
चाहिए कि
आत्मरक्षा
प्रषिक्षण
बालिकाओं कि
षिक्षा के
प्रति
दृष्टिकोण
विकसित होगी। अभिभावकों
को बालिकाओं
को ऐसे
प्रषिक्षण में
भाग लेने हेतु
प्रेरित करना
चाहिए और
आवष्यक सहयोग
देना चाहिए।
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