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THE BEAUTY AND MATHEMATICAL GEOMETRIC STRUCTURE OF FOLK ARTS: A STUDY

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THE BEAUTY AND MATHEMATICAL GEOMETRIC STRUCTURE OF FOLK ARTS: A STUDY

लोक कलाओं का सौंदर्य और गणितीय ज्यामिति संरचना एक अध्ययन

 

Dr. Sheetal Sharma 1*Icon

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1 Assistant Professor, Department of Painting, Institute of Fine Arts, Dr. Bhimrao Ambedkar University, Agra, Uttar Pradesh, India   

 

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ABSTRACT

English: Its spontaneous expression is evident in Indian folk arts such as Madhubani, Warli, Gond, Pithora, Rangoli, Mandana, and others, which are a natural, emotional, and traditional expression of society's cultural memory, philosophy of life, and aesthetic sense. Indian folk arts are a powerful expression of the nation's cultural consciousness, tradition, and collective experience. The lines and shapes used by folk artists are deeply intertwined with geometric principles. This research is a living example of the aesthetic mathematical geometry of folk art. This study will not only provide information on cultural heritage but will also serve as a bridge between art, mathematics, and education. It proves that folk art and mathematics are not separate from each other. Folk artists apply mathematical principles through experiential knowledge. Folk arts are excellent examples of both aesthetic and mathematical balance and geometry.

 

Hindi: लोक कलाओं का सौंदर्य सांस्कृतिक दृष्टि से भावनात्मक है। लोक कला जनमानस की कला है जिसमे दैनिक जीवन, प्रकृति का सम्मान धार्मिक विश्वाश और समाजिक परंपरा का अनुकरण पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तांतरित होता है। लोक कला के चित्रों में केवल सांस्कृतिक अभिव्यक्ति ही नहीं होती चल्कि गणितीय सोच की भी सहज अभिव्यक्ति होती है। इसके ज्यामिति आकारों त्रिभुज, वृत, रेखीय सममिति, बिंदु आदि संरचना का उपयोग लोक कला को सौंदर्यपूर्ण बनाती है, बल्कि गणित को भी मानवीय सांस्कृतिक संदर्भ प्रदान करती है। इसकी सहज अभिव्यक्ति भारतीय लोक कलाओं जैसे मधुबनी, वारली, गोंड, पिथोरा, रंगोली, माँडना आदि लोककलाओ में समाज की सांस्कृतिक स्मृति, जीवन दर्शन और सौंदर्यबोध की सहज, भावनात्मक और पंरपरागत अभिव्यक्ति है। भारतीय लोक कलाएं देश की सांस्कृतिक चेतना, परंपरा और सामूहिक अनुभव की सशक्त अभिव्यक्ति है। लोक कलाकारों द्वारा प्रयुक्त रेखाए आकृतियों में ज्यामिति सिद्धांतों के साथ गहराई से जुड़े हुए है। यह शोध लोक कलाओ का सौदर्य गणितीय ज्यामिति का सजीव उदाहरण है यह अध्ययन न केवल सांस्कृतिक विरासत की जानकारियों के साथ कला, गणित और शिक्षा के बीच सेतु का कार्य भी करेगा। इससे यह सिद्ध होता है कि लोक कला और गणित एक-दूसरे से पृथक नहीं है। लोक कलाकार अनुभवजन्य ज्ञान के माध्यम से गणितीय सिद्धांतो को व्यवहार में लाते हैं। लोक कलाएं सौंदर्य के साथ-साथ गणितीय संतुलन और ज्यामितीय का उत्कृष्ट उदाहरण है।

 

Keywords: Fine Arts, Aesthetics, Ratio, Symmetry, Geometric Structure, ललितकलाएं, सौंदर्य, अनुपात, सममिति, ज्यामितीय संरचना

 


प्रस्तावना

लोक कलायें भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है संसार में मूर्त अमूर्त धारणाओं के पीछे काम करने वाले नियमों का अध्यन और अभिव्यक्ति गणित के माध्यम से होती गणित में ज्यादातर दैनिक जीवन की मूल धारणाओं का ही सार होता है। काल से ही या मानव जीवन के साथ से कला का रूप भावनात्मक है और वही गणित तर्कसंगत है। आदि कला मानव की सहचरी रही है। कला के बिना जीवन में कोई रस नहीं मनुष्य की भावनाओं को अभिव्यक्त करने का माध्यम कला है। कला को सौंदर्य के साथ भावनाओ की अभिव्यक्त करना और उन्हें अनुभव करना ईश्वर द्वारा निर्मित संरचनाओ को मानव द्वारा निर्मित करने और समझने की भाषा, तंत्र गणित है। गणित के बिना कला की कल्पना नहीं की जा सकती सभी ललित कलाओ में चित्रकला, मूर्तिकला, व्यवहारिक कला, वास्तुकला, गायन वादन कला, संगीत कला, नृत्य कला, नाट्य कला में गणित की भूमिका बड़ी महत्वपूर्ण होती है। लोक कलाओ की बात करे तो वह भी गणित के ज्यामितीय आकारों बिना संभव नही है कला के कार्यों मे स्वर्णिम अनुपात होना आवश्यक है। जिसे हम Golden Ration भी कहते है यह दिव्य अनुपात के रूप में भी जाना जाता है यह दो संख्याओं के बीच का अनुपात होता है जो लगभग 1.618 के बराबर होता है फिबोनाची संख्याओ के अनुक्रम में जुड़ा हुआ है यह एक श्रृंखला है जिसमे प्रत्येक संख्या को अंतिम से जोड़ा जाता है ये फिबोनाची संख्याएँ है 0, 1, 1, 2, 3, 5, 8, 13, 21 इत्यादि क्रम में है जिनमे प्रत्येक संख्या और पिछली संख्या का अनुपात धीरे धीरे 1.618 के करीब पँहुचता है। लियोनार्दो विंची के इलस्ट्रेशन के कारण Golden Ration को गणितज्ञो और कलाकारों के बीच प्रसिद्धी मिलि और अधिकतर मत अनुसार यह संख्या स्वाभाविक रूप से आँखों को पसंद आती है।

 

कला में सौंदर्य की अवधारणा और गणित का संतुलन

किसी भी दृश्य रचना में सौंदर्य की मूल प्रधानता गणित के संतुलन के बिना नहीं हो सकती।

सौंदर्य वह अनुभूति है जो संतुलन, समरसता और पूर्णता से उत्पन्न होती है। गणित में भी संतुलन और सममिति को अत्यधिक महत्त्व दिया जाता है। प्लेटो के अनुसार सौंदर्य का मूल आधार गणितीय अनुपात है। गणितीय सौंदर्य उस संरचना को दर्शाता है जो सरल होते हुए भी प्रभावशाली होती है।

गोल्डन रेशो (Golden Ratio) अनुपात कला में सौंदर्य का मूल तत्व है। स्वर्ण अनुपात (Golden Ratio) का प्रयोग चित्रकला एवं मूर्तिकला में संतुलित रचना के लिए किया जाता है।

 

कला में ज्यामिति का उपयोग

1)     रेखा (Line)

पुनर्जागरण काल की कला में ज्यामिति आकारों का क्रांतिकारी उपयोग हुआ। जब कलाकार फिलिपो बुनेस्की ने रेखीय दृष्टिकोण का सिद्धांत विकसित किया। उनकी तकनीक में रेखाएं दूरी में एक ही निश्चित बिंदु पर अभिसरित होती हुई प्रतीत होती है।

2)     बिंदु (Point, dot)

सन 1880 के बाद जॉर्जेस सेरात और पॉल सिगनाक ने यथार्थ को बिन्दुओं के दृष्टिकोण के माध्यम से चित्रों में कला की गहराई को बताया गया इसे यूरोप के आंदोलन के समय नव प्रभाववाद में बिन्दु वादी चित्रण या बिंदुवाद कहा गया यह एक कला तकनीक है जिसमे छोटे-छोटे बिंदुओं को एक दुसरे पास रखा जाता है जिसे दूर से देखने पर बिंदुओं को मिला कर एक छबि बनती है भारतीय आधुनिक कलाकार नारायण श्रीधर बेंद्रे द्वारा इस पद्धति में भारत में सर्वप्रथम अपनी शैली में प्रयोग किया गया किया जो मध्य प्रदेश से है।

3)     घन (Cube)

घनवाद (घनचित्रण शैली) 20 वी शताब्दी का नव विचारो वाला कला आंदोलन जिसका नेतृत्व पाब्लो पिकासो और जॉर्जेस ब्राक ने किया यूरोपीय चित्रकला और मूर्तिकला में क्रांतिकारी परिवर्तन लाया इसकी विशेषता है की एक वस्तु को एक साथ कई कोणों से दिखाया जाता है।

4)     वृत (Circle)

जिसे चित्रकला, वृत पूर्णता, एकता, अनंतता और जीवन चक्र को दर्शाता है जिसे चित्रकला, मूर्तिकला और डिजिटल आर्ट जैसी विभिन्न विधाओं में बनावट और आकारों के माध्यम से गहराई, लय, शांति का अनुभव करता है यूरोप के कलाकार कैडीस्की ने इसका उपयोग अपने चित्रों में किया है।

हम कह सकते है की गणितीय वृत का उपयोग आदि काल से आधुनिक काल तक की कलाओं में हुआ है। इस आकार के बिना भारतीय लोक कला और पारम्परिक कला भी आधुरी है।

5)     वर्ग (Square)

ज्यामितीय आकृतियों में वर्ग रूपों और सिद्धांतो से है जिसमें आकारों के साथ भावनाओ और सौंदर्य को दर्शाया जाता है मूर्त और अमूर्त कला में इसका विशेष योगदान है।

6)     त्रिभुज (Triangle)

आदि काल से आधुनिक काल तक की चित्रकलाओं, भूमि आलेखनों, भित्ति चित्रों आदि कलाओं में इसका उपयोग किया जाता है त्रिभुज गणित की ज्यामितीय आकृति नहीं है बल्कि चित्रकला में एक शक्तिशाली उपकरण है जो संरचना, भावना और अर्थ प्रदान करता है।

7)     आयत (Rectangle)

आयत चित्रकला में बुनयादी तत्व है आधार, संगठन, रचना संतुलन के लिए होता है भूमि आलेखनों भित्ति चित्रों आदि में निरंतरता और सोंदर्य को दर्शाता है।

 

 

 

 

कला के मुख्य तत्व

कला के तत्वों में भी गणित का विशेष योगदान जो निम्न अनुसार है। रेखा (Line), आकार (Shape), रूप (Form), स्थान (Space), मूल्य (Value), रंग (Colour), बनावट आदि का समायोजन कला के सिधांतो में होता है जो निम्न है। ‘‘रूपभेदः प्रमाणानि भावलावण्ययोजनाम। सादृश्य वर्णिका भंग इति चित्रं षड़ग।

एक कलाकार हमेशा ही रचनात्मक अभिव्यक्ति और सौंदर्यशास्त्र से प्रेरित रहा है जिस प्रकार कलाकार शून्य से नई कलाए करने और बनाने पर केन्द्रित होता है इसी प्रकार एक लेखक खाली कागज पर शब्द रचना में लगा होता है। इसी प्रकार गणित शून्य से प्रमेय की प्रक्रिया करते है ज्यामितीय, बीजगणित, के माध्यम से गणित के ......

एक रचनात्मक दिमाग को कला में सौंदर्य प्रदान करने के लिए गणित के संयोजन की आवश्यकता होती है कला की समरूपता उसकी सुंदरता बिना गणित के अधूरी है क्योकि गणित से ही अनुपात संभव है।

कला और गणित का संबंध सदियों पुराना है कला और गणित दोनों ही एक दुसरे के साथ गहराई के साथ स्थापित है। चित्रकला की उत्कृष्ट कृति मोनालिसा (monalisa) प्रसिद्ध चित्रकार लियोनार्दो विंची (Leonardo Da Vinchi) की उत्कृष्ट कृति सहित कई अन्य प्रसिद्ध चित्रों और कलाओं का निर्माण गणितीय सिद्धतो का उपयोग हुआ है।

 

भारत के कलाकार ज्यामिति आकर

1)     एस. एच. रजा - बिंदु, वृत, वर्ग, त्रिकोण

विशेषता - बिंदु को ब्रह्मांडीय केंद्र के रूप में प्रयोग गणितीय तत्व सममिति, संतुलन, केंद्र-बिंदु संरचना।

2)     एम. एफ. हुसैन - त्रिकोण, आयत, खंडित आकृतियाँ

विशेषता - घनशैली (क्यूबिस्ट), रेखीय संरचना गणितीय आधार अनुपात, समतलीय विभाजन।

3)     के. सी. एस. पणिकर - वर्ग, प्रतीकात्मक चिन्ह

विशेषता - तांत्रिक प्रतीक और संरचनात्मक संतुलन गणितीय तत्व क्रम पुनरावृति।

4)     गीता वढेरा - समतलीय संरचना

विशेषता - रूप और स्थान का संतुलन गणितीय अनुपात संयोजन।

5)     गुलाम मोहम्द शेख - समतलीय विभाजन

विशेषता - रूप और स्थान का संतुलन गणितीय अनुपात संयोजन।

6)     जेराम पटेल - रेखाएँ, अमूर्त ज्यामिति, गति, लय, रेखीय गणना।

7)     के.जी. सुब्रमणयम - सरल ज्यामितीय आकृतियाँ, ज्यामितीय सपाट आकृतियाँ, लोक प्रेरित रूप, गणितीय आधार संतुलन, सरल ज्यामिति।

8)     बिनोद बिहारी मुखर्जी - ज्यामितीय स्थान विन्यास

विशेषता - ज्यामिति मिति-चित्रों में स्थान विन्यास गणितीय लयात्मक विस्तार।

 

निष्कर्ष

प्रस्तुत अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि गणित केवल एक विषय नहीं है बल्कि 64 कलाओ में छिपा एक मूलभूत विज्ञान है यह एक ऐसी तकनीक है जो कला को सोंदर्यपरक और कार्यात्मक क्रियाशील बनता है। जहा गणित सोच के साथ समस्याओ का समाधान करता है मानसिक विकास को मजबूती प्रदान करता है प्राचीन सभ्यताओ ने भी अपनी कला में गणितीय अवधारणाओ का उपयोग किया है।

 

REFERENCES

Agarwal, G. K. (n.d.). Modern Painting (आधुनिक चित्रकला). Sanjay Publications.

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Sakhalkar, R. (n.d.). History of Modern Painting (आधुनिक चित्रकला का इतिहास). Rajasthan Hindi Granth Academy.

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