A Study of
the Impact of the E-Learning Approach on the Academic Achievement of
Secondary-Level Students in Bharatpur District
भरतपुर जिले के माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों की शैक्षिक उपलब्धि पर ई-अधिगम उपागम के प्रभाव का अध्ययन
Malini Singh 1, Dr. Alpa Nagar 2
1 Researcher, Department of Education,
University of Rajasthan, Jaipur, India
2 Research Directory, Keshav Vidyapeeth Jamdoli, Jaipur, India
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ABSTRACT |
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English: Currently, with the advent of e-learning, the educational landscape in India has taken a global turn. To overcome the complexities and limitations inherent in traditional methods of education, educational institutions have begun adopting the e-learning approach. This approach utilizes technology and digital resources to render education more effective and efficient. The objective of this research paper was to investigate the impact of the e-learning approach on the academic achievement of secondary-level students in the Bharatpur district. For this study, a sample comprising 80 secondary-level students from the Jaipur district was selected using the purposive sampling method. The experimental method was employed for this study, and the researcher collected data using a self-constructed tool. The collected data were analyzed using the Mean, Standard Deviation, and the t-test. The results obtained demonstrated that the e-learning approach exerts a positive influence on the academic achievement of secondary-level students in the Bharatpur district. Hindi: वर्तमान में भारत में शिक्षा जगत ने ई-अधिगम की शुरूआत के साथ एक वैश्विक मोड़ ले लिया है। शिक्षा के पारंपरिक तरीके की जटिलताओं और कमजोरियों से छुटकारा पाने के लिए शिक्षा संस्थानों में ई-अधिगम उपगम को अपनाया जाने लगा है। इसमें शिक्षा को अधिक प्रभावी और कुशल बनाने के लिए प्रौद्योगिकी एवं डिजिटल साम्रगी का उपयोग किया जाता है। इस शोध पत्र का उद्देश्य भरतपुर जिले के माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों की शैक्षिक उपलब्धि पर ई-अधिगम उपागम के प्रभाव का अध्ययन करना था। इस शोध में न्यादर्श के रुप में जयपुर जिले के माध्यमिक स्तर के 80 विद्यार्थियों का चयन उद्देश्यपरक विधि द्वारा किया गया। इस अध्ययन हेतु प्रायोगिक विधि का प्रयोग किया गया शोधार्थी ने स्वनिर्मित उपकरण का प्रयोग करते हुए प्रदतों का संकलन किया। प्रदतों का विश्लेषण मध्यमान, मानक विचलन एवं टी परीक्षण द्वारा किया गया। प्राप्त परिणामों में प्रदर्शित हुआ कि भरतपुर जिले के माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों की शैक्षिक उपलब्धि पर ई-अधिगम उपागम का सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। |
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Received 07 December 2024 Accepted 08 January
2025 Published 28 February 2025 DOI 10.29121/granthaalayah.v13.i2.2025.6836 Funding: This research
received no specific grant from any funding agency in the public, commercial,
or not-for-profit sectors. Copyright: © 2025 The
Author(s). This work is licensed under a Creative Commons
Attribution 4.0 International License. With the
license CC-BY, authors retain the copyright, allowing anyone to download,
reuse, re-print, modify, distribute, and/or copy their contribution. The work
must be properly attributed to its author.
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Keywords: Educational Achievement, E-Learning, शैक्षिक
उपलब्धि, ई-अधिगम |
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1. प्रस्तावना
भारत में
शिक्षा ने
प्रौद्योगिकी
के साथ विकास
का एक लम्बा
सफर तय किया
है। पिछले कुछ
वर्षों में
भारत में
ई-अधिगम का
विकास बहुत
तेजी से हुआ
है। शिक्षण
विधियों और
अधिगम में
सूचना तकनीकी
के प्रयोग ने
शिक्षा तंत्र
को मजबूती
प्रदान की है।
इसने स्कूल
एवं कॉलेज के
छात्रों के
सीखने के
तरीके में
परिवर्तन
किया है। पारंपरिक
व्याख्यान
एवं बातचीत को
डिजिटल इंटरैक्टिव
तरीकों में
बदल दिया है।
यह तकनीकी
आधरित शिक्षा
एक नवाचार के
रूप में देखी
जाती है। यह
शिक्षा अधिगम
आधरित एवं
विद्यार्थी केन्द्रीत
होती है। आज
की शिक्षा
नवयुगीन
साधनों एवं
युक्तियों से
सुसज्जित है।
वर्तमान में
कक्षा-शिक्षण
के साथ-साथ
डिजिटल शिक्षण
का प्रचलन बढ
गया है जिसे
ई-अधिगम कहा
जाता है।
ई-अधिगम
एक प्रकार की
इलेक्ट्रोनिक
तकनीकी द्वारा
प्रदत एवं
सुगम्य अधिगम
अवसर है जिसमें
विषय-वस्तु, अधिगम
की विधियाँ
एवं शिक्षण
तीनों
सम्मिलित
हैं। यह
कक्षा-कक्ष
शिक्षण से
पूर्णतया भिन्न
है। ई-अधिगम
तकनीकी एवं
शिक्षा दोनों
का मिश्रित
रूप है जिसमें
सीखने वाला
व्यक्ति बिना
किसी दूरी की
बाधा के स्वयं
की गति के
अनुसार सीख
सकता है। यह
कौशल एवं
ज्ञान का
कंप्यूटर एवं
नेटवर्क
आधरित अंतरण
है। ई-अधिगम
को सभी प्रकार
के
इलेक्ट्रोनिक
समर्थित
शिक्षा और अध्यापन
के रूप में
परिभाषित
किया जाता है
जो स्वाभाविक
तौर पर
क्रियात्मक
होता है और
जिनका
उद्धेश्य
शिक्षार्थियों
के व्यक्तिगत
अनुभव अभ्यास
एवं ज्ञान के
संदर्भ में
ज्ञान के
निर्माण को
प्रभावित
करता है।
ई-अधिगम
अनिवार्य एवं
निःशुल्क
शिक्षा के प्रमुख
उपकरण के रूप
में सामने आयी
है। इसकी शुरूआत
मुख्य रूप से
आई आई टी के
छात्रों के
लिए की गयी
थी। लेकिन समय
के साथ-साथ यह
सभी के लिए सुलभ
हो गयी।
ई-अधिगम के
लिए कई शब्दों
का प्रयोग
किया जाता है
जैसे- ऑनलाइन
शिक्षा,
इंटरनेट
शिक्षा,
इलेक्ट्रोनिक
शिक्षा आदि।
ई-अधिगम के
अनुप्रयोग
एवं
प्रक्रियाओं
में वेब
आधारित शिक्षा, कंप्यूटर
आधारित
शिक्षा,
आभासी
कक्षाएं और
डिजिटल सहयोग
शामिल है। इसमें
पाठ्यसामग्री
का विवरण
इंटरनेट, इंट्रानेट/एक्ट्रानेट, ऑडियो
या विडियो टेप, उपग्रह
टीवी और
सीडी-रोम के
माध्यम से
किया जाता है।
ई-अधिगम एक
लचीली
अनुदेशात्मक
वितरण
प्रणाली है जो
इंटरनेट के
माध्यम से
होने वाली
किसी भी तरह
के अधिगम को
समाहित करती
है। ई-अधिगम
के द्वारा
शिक्षकों को
उन छात्रों तक
पहुंचने का अवसर
प्राप्त होता
है जो
पारंपरिक
कक्षा पाठ्यक्रम
में दाखिला
लेने में
सक्षम नहीे हो
सकते हैं और
ऐसे छात्रों
का समर्थन
करती है जिन्हें
अपने समय एवं
गति से सीखने
की आवष्यकता
है। ई-अधिगम
के माध्यम से
आभासी
कक्षा-कक्ष
विकसित हुए
हैं जिसमें
वास्तविक
कक्षा के समान
ही शिक्षक-छात्र
संवाद किया जा
सकता है। इसके
माध्यम से
प्रत्येक
विद्यार्थी
को उसकी
इच्छानुसार
शिक्षा
प्रदान की जा
सकती है। यह
व्यक्तिगत
एवं सामूहिक
दोनों प्रकार
की शिक्षा के
लिए उपयोगी
है। ई-अधिगम
पाठ्यक्रम विंडोज, लिनक्स, मैक, यूनिक्स
आदि में से
किसी भी मंच
पर आसानी से उपलब्ध
हैं। इंटरनेट
का प्रयोग
करके विद्यार्थी
किसी भी
पाठ्यक्रम
में
प्रवेशप्राप्त
कर सकता है।
2. अध्ययन की आवश्यकता
समय के
साथ विश्व में
शिक्षा
प्रणाली एक
बदलाव से
गुजरी है। आज
सूचना एवं
संचार
प्रौद्योगिकी
शिक्षा और
अधिगम का
अभिन्न अंग बन
गई है। विश्व
भर के देश, शिक्षा और
प्रशिक्षण के
सभी
क्षेत्रों
में तकनीकी का
प्रयोग कर रहे
हैं।
पारंपरिक
शिक्षा
प्रणाली अब
आधुनिक समय की
जटिलताओं को
दूर करने में
सक्षम नहीं है
इसलिए इन
जटिलताओं को दूर
करने के लिए
डिजीटल
अधिगमएक
महत्वपूर्ण साधन
है। ई-अधिगम
कोई नवीन
सम्प्रत्यय
नहीं है। इसका
प्रचलन बहुत
समय पूर्व ही
प्रारम्भ हो गया
था। परन्तु
वर्तमान में
कोरोना
महामारी के
जहां देशभर के
शैक्षणिक
संस्थानों को
बंद कर दिया
गया है जिसके
कारण संपूर्ण
शिक्षा
व्यवस्था
छिन्न-भिन्न
हो गयी है
वहीं संकट की
इस घड़ी में
ई-अधिगम एक
समाधान के रूप
में हमारे
समक्ष आया है।
वर्तमान में
विद्यार्थियों
की शिक्षा को
सुचारू रखने का
एक मात्र साधन
ई-अधिगम ही
है।
विद्यार्थियों
की शिक्षा को
सुचारू रखने
के लिए
ई-अधिगम के
विभिन्न
उपागम ज़ूम, गूगल
क्लासरूम, माइक्रोसॉफ्ट
टीम, स्काइप,
गूगल मीट, आदि मंचों
का प्रयोग
किया जा रहा
है। पूर्व में
उच्च स्तरीय
शिक्षा में
इसका प्रयोग
व्यापक रूप से
किया जा रहा
था परन्तु
वर्तमान
परिस्थिति ने
विद्यालयी
स्तर पर इसके
प्रयोग को बढ़ा
दिया है।
ई-अधिगम
उपागम के
द्वारा
विद्यार्थी
घर बैठे अपनी
शिक्षा को
पूर्ण कर सकता
है। इससे
विद्यार्थियों
में इंटरनेट
और कंप्यूटर
का ज्ञान विकसित
होता है जोे
उन्हें अपने
जीवन और करियर
के क्षेत्र
में आगे बढ़ने
में मदद करता
है। भारत जैसे
देशमें
साक्षरता
स्तर को बढ़ाने
में ई-अधिगम
उपागम का
विस्तार एवं
इसका व्यापक
प्रयोग बहुत
आवश्यक है।
3. साहित्य अवलोकन
·
मण्डल
और दास (2021)
ने
एटीट्यूड ऑफ
सैकण्डरी
स्कूल
स्टुडेन्ट्स
टुवर्ड्स
ऑनलाइन
एजुकेशन
ड्यूरिंग
कोविड-19 इन
वेस्ट बंगाल
विषय पर
अध्ययन किया
तथा परिणाम
में पाया कि
माध्यमिक
स्तर के
विद्यार्थियों
की ऑनलाइन
शिक्षा के
प्रति
अभिवृति में क्षेत्रीयता
के आधार पर
सार्थक अंतर
पाया जाता है।
·
सिंह, रामगोपाल
और अग्रवाल (2021) ने
‘‘इम्पेक्ट ऑफ
ऑनलाइन
क्लासेज ऑन द
सेटिस्फेक्शन
एण्ड
परफोर्मेन्स
ऑफ
स्टुडेन्ट्स
ड्यूरिंग द
पेनडेमिक
पीरियड ऑफ
कोविड 19‘‘ पर
अध्ययन किया।
इस अध्ययन का
उद्देश्य
कोविड -19 की महामारी
के दौरान
ऑनलाइन
कक्षाओं के
बारे में छात्रों
की संतुष्टि
और प्रदर्शन
को प्रभावित
करने वाले
कारकों की
पहचान करना और
इन चरों के
बीच संबंध
स्थापित करना
था। अध्ययन के
परिणामों में
यह पाया गया
कि अध्ययन में
उपयोग किए
जाने वाले चार
स्वतंत्र
कारक जैसे
प्रशिक्षक की
गुणवत्ता, पाठ्यक्रम
डिजाइन,
त्वरित
प्रतिक्रिया, और
छात्रों की
उम्मीद
छात्रों की
संतुष्टि को
सकारात्मक
रूप से
प्रभावित
करती है तथा
छात्रों की
संतुष्टि
छात्रों के
प्रदर्शन को
सकारात्मक
रूप से
प्रभावित
करती है। ये
चार कारक
ऑनलाइन
पाठ्यक्रमों
के लिए
संतुष्टि और
प्रदर्शन के
एक उच्च स्तर
के लिए आवश्यक
है।
·
Verma and Trivedi (2019) ने ’’ऑनलाइन
एजुकेशन एण्ड
स्कूल
स्टुडेन्टः ए रियलीटी
चेक’’ पर शोध
कार्य किया।
इस शोध का उद्धेश्य
माध्यमिक
स्तर के
विद्यार्थियों, शिक्षकों
एव अभिभावकों
की ऑनलाइन
शिक्षा के प्रति
जागरूकता का
अध्ययन करना
था। इस शोध में
सर्वेक्षण
विधि का
प्रयोग किया
गया। न्यादर्श
के लिए 450
विद्यार्थियों, 123
शिक्षकों एवं
79 अभिभावकों
का चयन
स्तरीकृत यादृच्छिक
विधि द्वारा
केया गया।
स्वनिर्मित
प्रश्नावली
के माध्यम से
आंकडों का
संकलन किया
गया। प्राप्त
आंकडों के
विश्लेषण
करने के
पश्चात् यह
ज्ञात हुआ कि
ऑनलाइन
शिक्षा के प्रति
माध्यमिक
स्तर के
विद्यार्थियों, शिक्षकों
एव अभिभावकों
की जागरूकता
कम है।
·
Sharma and Gupta (2018) ने ए स्टडी ऑन
एटीट्यूड ऑफ
सीनियर
सैकण्डरी स्कूल
स्टुडेन्ट
टुवडर््स
ई-लर्निंग इन
रिलेशन टु
दिअर जेन्डर, रेजिडेन्शिअल
बेकवर्ड एण्ड
नेचर ऑफ स्कूल
पर शोध किया।
इस शोध का
उद्धेश्य
विद्यार्थियों
की ई-लर्निंग
के प्रति
अभिवृति का
लिंग,
संकाय एवं
निवास स्थान
के आधार पर
अध्ययन करना
था। इस शोध
में
वर्णनात्मक
सर्वेक्षण
विधि का
प्रयोग किया
गया।
न्यादर्श के
लिए सहारनपुर, उतर
प्रदेश के 160
विद्यार्थियों
का चयन साधारण
यादृच्छिक
विधि द्वारा
किया गया।
उपकरण के रूप
में
स्वनिर्मित
प्रश्नावली
का प्रयोग किया
गया। प्राप्त
आंकडों का
विश्लेषण
मध्यमान, प्रमाप
विचलन एवं
टी-परीक्षण के
द्वारा किया।
शोध निष्कर्ष
में यह
प्राप्त हुआ
कि विद्यार्थियों
की ई-लर्निंग
के प्रति
अभिवृति का लिंग, संकाय
एवं निवास
स्थान के आधार
पर कोई सार्थक
अंतर नहीं
पाया गया।
4. शोध उद्धेश्य
1) भरतपुर जिले
के माध्यमिक
स्तर के
विद्यार्थियों
की शैक्षिक
उपलब्धि पर
ई-अधिगम उपागम
के प्रभाव का
अध्ययन करना।
2) भरतपुर जिले
के माध्यमिक
स्तर के
छात्रों की शैक्षिक
उपलब्धि पर
ई-अधिगम उपागम
के प्रभाव का
अध्ययन करना।
3) भरतपुर जिले
के माध्यमिक
स्तर की
छात्राओं की
शैक्षिक
उपलब्धि पर
ई-अधिगम उपागम
के प्रभाव का
अध्ययन करना।
5. परिकल्पना
1) भरतपुर जिले
के माध्यमिक
स्तर के
विद्यार्थियों
की शैक्षिक
उपलब्धि पर
ई-अधिगम उपागम
के प्रभाव में
सार्थक अंतर
नहीं पाया
जाता है।
2) भरतपुर जिले
के माध्यमिक
स्तर के
छात्रों की शैक्षिक
उपलब्धि पर
ई-अधिगम उपागम
के प्रभाव में
सार्थक अंतर
नहीं पाया
जाता है।
3) भरतपुर जिले
के माध्यमिक
स्तर की
छात्राओं की
शैक्षिक
उपलब्धि पर
ई-अधिगम उपागम
के प्रभाव में
सार्थक अंतर
नहीं पाया
जाता है।
6. शोध विधि
·
प्रस्तुत
शोध कार्य में
प्रयोगात्मक
विधि का
प्रयोग किया
गया है।
7. न्यादर्ष
·
प्रस्तुत
शोध में
उद्देश्यपरक
विधि द्वारा भरतपुर
जिले के
माध्यमिक
स्तर के 80
विद्यार्थियों
को न्यादर्श
के रूप में
चयनित किया
गया है।
8. उपकरण
·
प्रस्तुत
शोध में
स्वनिर्मित
प्रश्नावली के
माध्यम से
प्रदतों का
संकलन किया
गया है।
9. सांख्यिकी विधि
·
प्रस्तुत
शोध में
प्रदत्तों के
विश्लेषण हेतु
मध्यमान, मानक
विचलन और
टी-परीक्षण का
प्रयोग किया
गया है।
10. प्रदतों का विश्लेषण एवं व्याख्या
परिकल्पना
- 1 भरतपुर जिले
के माध्यमिक
स्तर के
विद्यार्थियों
की शैक्षिक
उपलब्धि पर
ई-अधिगम उपागम
के प्रभाव में
सार्थक अंतर
नहीं पाया
जाता है।
तालिका 1
|
तालिका 1 भरतपुर
जिले के
माध्यमिक
स्तर के
विद्यार्थियों
की षैक्षिक
उपलब्धि पर
ई-अधिगम
उपागम का प्रभाव |
|||||||
|
समूह |
परीक्षण
का प्रकार |
कुल
संख्या |
मध्यमान |
मानक
विचलन |
टी-मूल्य |
सार्थकता
स्तर |
परिणाम |
|
विद्यार्थी |
पूर्व
परीक्षण |
80 |
36.50 |
4.56 |
6.09 |
0.05 |
अस्वीकृत |
|
पश्च
परीक्षण |
80 |
41.15 |
5.08 |
||||
व्याख्याः उपरोक्त
तालिका 1
भरतपुर जिले
के माध्यमिक
स्तर के
विद्यार्थियों
की शैक्षिक
उपलब्धि पर ई-अधिगम
उपागम के
प्रभाव को
प्रदर्शित
करती है।
तालिका के
अवलोकन से यह
स्पष्ट होता
है कि विद्यार्थियों
के पूर्व
परीक्षण का
मध्यमान 36.50 एवं
मानक विचलन 4.56
है तथा
विद्यार्थियों
के पश्च
परीक्षण का
मध्यमान 41.15 एवं
मानक विचलन 5.08 है।
इन
प्राप्तांकों
से टी परीक्षण
का मान 6.09 पाया
गया।
स्वतंत्रता
के अंश158 पर
तालिका मान से
अधिक है इस
आधार पर शून्य
परिकल्पना
अस्वीकृत की
जाती है।
अर्थात्
भरतपुर जिले
के माध्यमिक
स्तर के
विद्यार्थियों
की शैक्षिक
उपलब्धि पर
ई-अधिगम उपागम
के प्रभाव में
सार्थक अंतर
पाया जाता है।
परिकल्पना
- 2 भरतपुर जिले
के माध्यमिक
स्तर के
छात्रों की शैक्षिक
उपलब्धि पर
ई-अधिगम उपागम
के प्रभाव में
सार्थक अंतर
नहीं पाया
जाता है।
तालिका 2
|
तालिका 2 भरतपुर
जिले के
माध्यमिक
स्तर के
छात्रों की शैक्षिक
उपलब्धि पर
ई-अधिगम
उपागम का
प्रभाव |
|||||||
समूह
|
परीक्षण
का प्रकार
|
कुल
संख्या
|
मध्यमान
|
मानक
विचलन
|
टी-मूल्य
|
सार्थकता
स्तर
|
परिणाम
|
छात्र
|
पूर्व
परीक्षण
|
40
|
39.20
|
4.96
|
3.14
|
0.05
|
अस्वीकृत
|
पश्च
परीक्षण
|
40
|
42.16
|
3.30
|
||||
व्याख्याः
उपरोक्त
तालिका 2
भरतपुर जिले
के माध्यमिक
स्तर के
छात्रों की
शैक्षिक
उपलब्धि पर
ई-अधिगम उपागम
के प्रभाव को
प्रदर्शित
करती है। तालिका
के अवलोकन से
यह स्पष्ट
होता है कि
छात्रों के
पूर्व
परीक्षण का
मध्यमान 39.20 एवं
मानक विचलन 4.96
है तथा
छात्रों के
पश्च परीक्षण
का मध्यमान 42.16
एवं मानक
विचलन 3.30 है। इन
प्राप्तांकों
से टी परीक्षण
का मान 3.14 पाया
गया।
स्वतंत्रता
के अंश78 पर
तालिका मान से
अधिक है इस
आधार पर शून्य
परिकल्पना
अस्वीकृत की
जाती है।
अर्थात् भरतपुर
जिले के
माध्यमिक
स्तर के
छात्रों की शैक्षिक
उपलब्धि पर
ई-अधिगम उपागम
के प्रभाव में
सार्थक अंतर पाया
जाता है।
परिकल्पना
- 3 भरतपुर जिले
के माध्यमिक
स्तर की
छात्राओं की
शैक्षिक
उपलब्धि पर
ई-अधिगम उपागम
के प्रभाव में
सार्थक अंतर
नहीं पाया
जाता है।
तालिका 3
|
तालिका 3 भरतपुर
जिले के
माध्यमिक
स्तर की
छात्राओं की
शैक्षिक
उपलब्धि पर
ई-अधिगम
उपागम का
प्रभाव |
|||||||
समूह
|
परीक्षण
का प्रकार
|
कुल
संख्या
|
मध्यमान
|
मानक
विचलन
|
टी-मूल्य
|
सार्थकता
स्तर
|
परिणाम
|
छात्राएँ
|
पूर्व
परीक्षण
|
40
|
40.65
|
3.23
|
3.09
|
0.05
|
अस्वीकृत
|
पश्च
परीक्षण
|
40
|
43.40
|
4.62
|
||||
व्याख्याः
उपरोक्त
तालिका 3
भरतपुर जिले
के माध्यमिक
स्तर की
छात्राओं की
शैक्षिक
उपलब्धि पर
ई-अधिगम उपागम
के प्रभाव को
प्रदर्शित
करती है। तालिका
के अवलोकन से
यह स्पष्ट
होता है कि
छात्राओं के
पूर्व
परीक्षण का
मध्यमान 40.65 एवं
मानक विचलन 3.23
है तथा
छात्राओं के
पश्च परीक्षण
का मध्यमान 43.40
एवं मानक
विचलन 4.62 है। इन
प्राप्तांकों
से टी परीक्षण
का मान 3.09 पाया
गया।
स्वतंत्रता के
अंश78 पर
तालिका मान से
अधिक है इस
आधार पर शून्य
परिकल्पना
अस्वीकृत की
जाती है।
अर्थात्
भरतपुर जिले
के माध्यमिक
स्तर की
छात्राओं की
शैक्षिक उपलब्धि
पर ई-अधिगम
उपागम के
प्रभाव में
सार्थक अंतर
पाया जाता है।
11. निष्कर्ष
ई-अधिगम
उपागम का
विद्यार्थियों
की शैक्षिक उपलब्धि
पर पड़ने वाले
प्रभाव के
अध्ययन से यह ज्ञात
हुआ है कि
माध्यमिक
स्तर के
विद्यार्थियों
की शैक्षिक
उपलब्धि पर
ई-अधिगम उपागम
का सकारात्मक
प्रभाव पड़ता
है। जब
विद्यार्थियों
को विविध
प्रकार के
ई-अधिगम उपागम
गूगल मीट, जूम, के
माध्यम से
पढ़ाया गया और
साथ ही
विभिन्न विडियो, पीपीटी
और एनिमेशन का
प्रयोग किया
गया तो विद्यार्थियों
की अध्ययन में
रूचि जागृत
हुई जिसका
प्रभाव उनकी
शैक्षिक
उपलब्धि पर
परिलक्षित
हुआ। अर्थात्
साधारण
शिक्षण की
तुलना में
ई-अधिगम उपागम
के प्रयोग से
विद्यार्थियों
की शैक्षिक
उपलब्धि में
वृद्धि हुई
है।
12. सुझाव
सर्वप्रथम नीति निर्माताओं, अधिकारियों, छात्रों, शिक्षकों और शिक्षाविदों के विचारों में बदलाव लाने की आवश्यकता है। ई-अधिगम को बढावा देने के लिए शिक्षकों के साथ-साथ विद्यार्थियों को भी डिजिटलाइजेशन के लिए प्रशिक्षित किया जान चाहिए। विद्यार्थियों को संकाय चयन को धीरे-धीरे प्रौद्योगिकी के साथ एवं प्रौद्योगिकी अपनाने के लिए किया जाना चाहिए। इसके साथ ही ई-अधिगम के लिए आवश्यक संसाधनों को आमजन तक पहुँचाने के लिए सरकार को विभिन्न प्रयास करने की आवश्यकता है।
None.
None.
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