Granthaalayah
A COMPARATIVE STUDY OF THE LEVEL OF ASPIRATION OF STUDENTS IN GOVERNMENT AND NON-GOVERNMENT SCHOOLS

Original Article

A Comparative Study of the Level of Aspiration of Students in Government and Non-Government Schools

शासकीय तथा अशासकीय विद्यालयों के विद्यार्थियों के आकांक्षा स्तर का तुलनात्मक अध्ययन

 

Rachana Pandey 1*Icon

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1 Research Scholar, Faculty of Education, Kalinga University, Raipur, Chhattisgarh, India

2 Professor, Department of Education, Kalinga University, Raipur, Chhattisgarh, India

 

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ABSTRACT

English: A student's level of aspiration is a significant psychological factor that influences their educational development, future achievements, and vocational goals. A high level of aspiration motivates students to work harder, attain higher academic achievement, and cultivate a positive outlook toward their future. The objective of the present research paper is to conduct a comparative study of the levels of aspiration among students attending government and private schools. For this study, a sample comprising Class 9 students enrolled in secondary-level schools within the Raipur district of Chhattisgarh state was selected. Data were collected from a total of 800 students (400 from government schools and 400 from private schools). To measure the students' levels of aspiration, the Educational Aspiration Scale developed by Dr. V. P. Sharma and Dr. Anuradha Gupta was utilized. The collected data were analyzed using measures of mean, standard deviation, and the independent samples t-test. The results of the study revealed that there exists a statistically significant difference in the levels of aspiration between students attending government schools and those attending private schools. This study offers valuable guidance within the field of education for understanding students' aspirations and providing them with appropriate direction.

 

Hindi: विद्यार्थियों का आकांक्षा स्तर उनके शैक्षिक विकास, भविष्य की उपलब्धियों तथा व्यावसायिक लक्ष्यों को प्रभावित करने वाला एक महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक कारक है। उच्च आकांक्षा स्तर विद्यार्थियों को अधिक परिश्रम करने, उच्च शैक्षिक उपलब्धि प्राप्त करने तथा अपने भविष्य के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने के लिए प्रेरित करता है। प्रस्तुत शोध-पत्र का उद्देश्य शासकीय तथा अशासकीय विद्यालयों के विद्यार्थियों के आकांक्षा स्तर का तुलनात्मक अध्ययन करना है। इस अध्ययन में छत्तीसगढ़ राज्य के रायपुर जिले के माध्यमिक स्तर के विद्यालयों में अध्ययनरत कक्षा 9 के विद्यार्थियों को नमूने के रूप में सम्मिलित किया गया। कुल 800 विद्यार्थियों (400 शासकीय तथा 400 अशासकीय विद्यालयों के विद्यार्थी) से आँकड़े संकलित किए गए। विद्यार्थियों के आकांक्षा स्तर के मापन के लिए डॉ. वी. पी. शर्मा एवं डॉ. अनुराधा गुप्ता द्वारा निर्मित शैक्षिक आकांक्षा मापनी का उपयोग किया गया। संकलित आँकड़ों का विश्लेषण माध्य, मानक विचलन तथा स्वतंत्र नमूना t-परीक्षण की सहायता से किया गया। अध्ययन के परिणामों से यह ज्ञात हुआ कि शासकीय तथा अशासकीय विद्यालयों के विद्यार्थियों के आकांक्षा स्तर में सांख्यिकीय रूप से सार्थक अंतर पाया जाता है। यह अध्ययन विद्यार्थियों की आकांक्षाओं को समझने तथा उन्हें उचित दिशा प्रदान करने के लिए शिक्षा के क्षेत्र में उपयोगी मार्गदर्शन प्रदान करता है।

 

Keywords: Level of Aspiration, Secondary Students, Government Schools, Private Schools, Comparative Study, आकांक्षा स्तर, माध्यमिक विद्यार्थी, शासकीय विद्यालय, अशासकीय विद्यालय, तुलनात्मक अध्ययन

 


प्रस्तावना

शिक्षा मानव जीवन के समग्र विकास का आधार है। शिक्षा केवल ज्ञान प्रदान करने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह विद्यार्थियों में जीवन के प्रति दृष्टिकोण, लक्ष्य निर्धारण तथा भविष्य की आकांक्षाओं का निर्माण भी करती है। विद्यार्थियों का आकांक्षा स्तर उनके शैक्षिक एवं व्यावसायिक जीवन को दिशा प्रदान करने वाला एक महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक घटक है।

आकांक्षा स्तर से अभिप्राय उस लक्ष्य या उपलब्धि के स्तर से होता है जिसे प्राप्त करने की इच्छा या अपेक्षा विद्यार्थी अपने लिए निर्धारित करता है। जिन विद्यार्थियों का आकांक्षा स्तर उच्च होता है, वे अपने लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए अधिक परिश्रम करते हैं तथा शिक्षा के प्रति अधिक गंभीरता प्रदर्शित करते हैं।

विद्यालय विद्यार्थियों की आकांक्षाओं को प्रभावित करने वाले प्रमुख सामाजिक संस्थानों में से एक है। शासकीय तथा अशासकीय विद्यालयों के शैक्षिक वातावरण, संसाधनों, शिक्षण पद्धतियों तथा मार्गदर्शन की व्यवस्था में अंतर पाया जाता है। इन अंतरों के कारण विद्यार्थियों के आकांक्षा स्तर में भी भिन्नता देखी जा सकती है।

माध्यमिक स्तर विद्यार्थियों के जीवन का वह महत्वपूर्ण चरण है जहाँ वे अपने भविष्य के शैक्षिक तथा व्यावसायिक लक्ष्यों के बारे में विचार करना प्रारंभ करते हैं। यदि इस स्तर पर विद्यार्थियों की आकांक्षाओं को उचित दिशा प्रदान की जाए तो उनकी शैक्षिक उपलब्धि तथा व्यक्तित्व विकास में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है। इसी उद्देश्य से प्रस्तुत अध्ययन में शासकीय तथा अशासकीय विद्यालयों के विद्यार्थियों के आकांक्षा स्तर का तुलनात्मक अध्ययन किया गया है।

 

संबंधित साहित्य की समीक्षा

Kaur (2016) ने अपने अध्ययन में पाया कि विद्यार्थियों का आकांक्षा स्तर उनकी शैक्षिक उपलब्धि से सकारात्मक रूप से संबंधित होता है।

Sharma (2018) के अध्ययन में यह निष्कर्ष प्राप्त हुआ कि विद्यालयी वातावरण तथा शिक्षक का मार्गदर्शन विद्यार्थियों की शैक्षिक आकांक्षाओं के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

Singh (2020) ने शासकीय एवं अशासकीय विद्यालयों के विद्यार्थियों के आकांक्षा स्तर का तुलनात्मक अध्ययन करते हुए पाया कि दोनों प्रकार के विद्यालयों के विद्यार्थियों की आकांक्षाओं में अंतर पाया जाता है।

Patel (2021) ने अपने अध्ययन में यह पाया कि जिन विद्यार्थियों का आकांक्षा स्तर उच्च होता है वे शैक्षिक उपलब्धि में भी बेहतर प्रदर्शन करते हैं।

उपरोक्त अध्ययनों से स्पष्ट होता है कि विद्यार्थियों का आकांक्षा स्तर उनके शैक्षिक विकास तथा भविष्य की उपलब्धियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

 

शोध का उद्देश्य

शासकीय तथा अशासकीय विद्यालयों के विद्यार्थियों के आकांक्षा स्तर का तुलनात्मक अध्ययन करना।

 

परिकल्पना

शासकीय तथा अशासकीय विद्यालयों के विद्यार्थियों के आकांक्षा स्तर में कोई सार्थक अंतर नहीं पाया जाएगा।

 

शोध पद्धति

प्रस्तुत शोध में शासकीय तथा अशासकीय विद्यालयों के विद्यार्थियों के आकांक्षा स्तर का तुलनात्मक अध्ययन करने के लिए एक सुव्यवस्थित तथा वैज्ञानिक शोध पद्धति का अनुसरण किया गया। शोध पद्धति किसी भी अध्ययन की आधारशिला होती है, क्योंकि इसके माध्यम से अध्ययन की दिशा, प्रक्रिया तथा निष्कर्षों की विश्वसनीयता सुनिश्चित होती है। शोध पद्धति के अंतर्गत शोध का प्रकार, जनसंख्या, नमूना, नमूना चयन की विधि, शोध उपकरण तथा आँकड़ों के विश्लेषण की विधियों का क्रमबद्ध विवरण प्रस्तुत किया जाता है। प्रस्तुत अध्ययन में शोध समस्या की प्रकृति तथा उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए उपयुक्त शोध पद्धति का चयन किया गया।

 

शोध का प्रकार

प्रस्तुत अध्ययन वर्णनात्मक एवं तुलनात्मक प्रकार का शोध है। वर्णनात्मक शोध का उद्देश्य किसी घटना, स्थिति या समूह की वर्तमान अवस्था का व्यवस्थित तथा वैज्ञानिक अध्ययन करना होता है। इस प्रकार के शोध में शोधकर्ता किसी भी चर को नियंत्रित या परिवर्तित नहीं करता, बल्कि उसकी वर्तमान स्थिति का अध्ययन करता है और उसके विभिन्न पहलुओं का विश्लेषण करता है।

प्रस्तुत अध्ययन में माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों के आकांक्षा स्तर की वर्तमान स्थिति का अध्ययन किया गया है। इसके अंतर्गत विद्यार्थियों की आकांक्षाओं से संबंधित तथ्यों को संकलित कर उनका सांख्यिकीय विश्लेषण किया गया।

इसके अतिरिक्त यह अध्ययन तुलनात्मक प्रकृति का भी है, क्योंकि इसमें दो भिन्न समूहों—शासकीय तथा अशासकीय विद्यालयों के विद्यार्थियों—के आकांक्षा स्तर की तुलना की गई है। तुलनात्मक शोध का उद्देश्य विभिन्न समूहों के मध्य विद्यमान संभावित अंतर का परीक्षण करना होता है।

अतः यह कहा जा सकता है कि प्रस्तुत शोध वर्णनात्मक तथा तुलनात्मक शोध की श्रेणी में आता है, जिसके माध्यम से विद्यार्थियों के आकांक्षा स्तर की वर्तमान स्थिति का विश्लेषण करते हुए विभिन्न समूहों के मध्य विद्यमान अंतर का अध्ययन किया गया है।

 

जनसंख्या

किसी भी शोध कार्य में जनसंख्या से अभिप्राय उस व्यापक समूह से होता है जिसके अंतर्गत अध्ययन से संबंधित सभी संभावित इकाइयाँ सम्मिलित होती हैं। दूसरे शब्दों में, जिस समूह के संबंध में शोधकर्ता निष्कर्ष प्राप्त करना चाहता है, वही समूह शोध की जनसंख्या कहलाता है।

प्रस्तुत अध्ययन की जनसंख्या छत्तीसगढ़ राज्य के रायपुर जिले के माध्यमिक स्तर के विद्यालयों में अध्ययनरत कक्षा 9 के विद्यार्थी हैं। माध्यमिक स्तर से आशय उन विद्यालयों से है जहाँ कक्षा 9 एवं कक्षा 10 तक की शिक्षा प्रदान की जाती है।

माध्यमिक स्तर विद्यार्थियों के जीवन का एक महत्वपूर्ण चरण होता है, क्योंकि इसी अवस्था में विद्यार्थियों की शैक्षिक आकांक्षाएँ तथा भविष्य के लक्ष्य आकार लेने लगते हैं। इस स्तर पर विद्यार्थियों के आकांक्षा स्तर का अध्ययन करना अत्यंत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह उनके भविष्य के शैक्षिक एवं व्यावसायिक विकास को प्रभावित कर सकता है।

अतः प्रस्तुत अध्ययन में रायपुर जिले के शासकीय तथा अशासकीय माध्यमिक विद्यालयों में अध्ययनरत कक्षा 9 के विद्यार्थियों को जनसंख्या के रूप में स्वीकार किया गया।

 

नमूना

शोध में संपूर्ण जनसंख्या का अध्ययन करना प्रायः संभव नहीं होता, क्योंकि इसके लिए अत्यधिक समय, श्रम तथा संसाधनों की आवश्यकता होती है। इसलिए जनसंख्या में से एक प्रतिनिधिक समूह का चयन किया जाता है जिसे नमूना कहा जाता है।

प्रस्तुत अध्ययन में जनसंख्या में से एक संतुलित तथा प्रतिनिधिक नमूने का चयन किया गया। इस अध्ययन में कुल 800 विद्यार्थियों को नमूने के रूप में सम्मिलित किया गया। इनमें से 400 विद्यार्थी शासकीय विद्यालयों से तथा 400 विद्यार्थी अशासकीय विद्यालयों से चयनित किए गए।

नमूना चयन करते समय यह सुनिश्चित किया गया कि दोनों प्रकार के विद्यालयों का संतुलित प्रतिनिधित्व हो। इस प्रकार चयनित नमूना अध्ययन के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए उपयुक्त आधार प्रदान करता है तथा प्राप्त परिणामों की विश्वसनीयता को बढ़ाता है। अतः यह कहा जा सकता है कि प्रस्तुत अध्ययन में चयनित नमूना आकार की दृष्टि से पर्याप्त, संतुलित तथा प्रतिनिधिक है।

 

विश्लेषण एवं व्याख्या

तालिका 1

तालिका 1 शासकीय तथा अशासकीय विद्यालयों के विद्यार्थियों के आकांक्षा स्तर का तुलनात्मक विश्लेषण

समूह

संख्या

माध्य

मानक विचलन

t-मूल्य

p-मूल्य

शासकीय विद्यालय

400

29.93

4.93

7.71

0

अशासकीय विद्यालय

400

27.24

4.93

 

तालिका 1 में शासकीय तथा अशासकीय विद्यालयों के विद्यार्थियों के आकांक्षा स्तर के तुलनात्मक विश्लेषण के परिणाम प्रस्तुत किए गए हैं।

तालिका से स्पष्ट होता है कि शासकीय विद्यालयों के विद्यार्थियों का आकांक्षा स्तर का माध्य 29.93 तथा मानक विचलन 4.93 प्राप्त हुआ है। दूसरी ओर अशासकीय विद्यालयों के विद्यार्थियों का आकांक्षा स्तर का माध्य 27.24 तथा मानक विचलन 4.93 प्राप्त हुआ है।

दोनों समूहों के माध्यों के मध्य अंतर की सांख्यिकीय सार्थकता की जाँच करने के लिए स्वतंत्र नमूना t-परीक्षण का उपयोग किया गया। गणना के अनुसार t-मूल्य 7.71 प्राप्त हुआ है तथा p-मूल्य 0.000 है, जो निर्धारित 0.05 स्तर से कम है।

अतः यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि शासकीय तथा अशासकीय विद्यालयों के विद्यार्थियों के आकांक्षा स्तर के मध्य पाया गया अंतर सांख्यिकीय दृष्टि से सार्थक है। इसका तात्पर्य यह है कि दोनों प्रकार के विद्यालयों के विद्यार्थियों की आकांक्षाओं में वास्तविक अंतर विद्यमान है।

ग्राफ 1

ग्राफ 1 शासकीय एवं अशासकीय विद्यालयों के विद्यार्थियों के आकांक्षा स्तर के माध्य एवं मानक विचलन का तुलनात्मक निरूपण

 

निष्कर्ष

अध्ययन के परिणामों से यह स्पष्ट होता है कि शासकीय तथा अशासकीय विद्यालयों के विद्यार्थियों के आकांक्षा स्तर में सांख्यिकीय रूप से सार्थक अंतर पाया जाता है। शासकीय विद्यालयों के विद्यार्थियों का आकांक्षा स्तर अशासकीय विद्यालयों के विद्यार्थियों की तुलना में अधिक पाया गया।

 

शैक्षिक निहितार्थ

1)     विद्यालयों में विद्यार्थियों को भविष्य के लक्ष्यों के निर्धारण के लिए मार्गदर्शन प्रदान किया जाना चाहिए।

2)     विद्यार्थियों के आकांक्षा स्तर को विकसित करने के लिए कैरियर परामर्श कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए।

3)     विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा तथा विभिन्न व्यावसायिक अवसरों की जानकारी प्रदान की जानी चाहिए।

4)     विद्यालयों में प्रेरणात्मक शैक्षिक वातावरण विकसित किया जाना चाहिए।

 

भावी शोध के लिए सुझाव

1)     भविष्य में अन्य राज्यों के विद्यार्थियों को सम्मिलित करते हुए व्यापक अध्ययन किया जा सकता है।

2)     आकांक्षा स्तर का संबंध शैक्षिक उपलब्धि तथा अभिप्रेरणा से भी अध्ययन किया जा सकता है।

3)     ग्रामीण एवं शहरी विद्यालयों के विद्यार्थियों के आकांक्षा स्तर का तुलनात्मक अध्ययन किया जा सकता है।

 

REFERENCES

Agarwal, M., and Gupta, S. (2020). The Relationship Between School Environment and Students' Educational Aspirations (विद्यालयी वातावरण और विद्यार्थियों की शैक्षिक आकांक्षाओं का संबंध). International Journal of Education and Research, 8(2), 27–35.

Das, P., and Kumar, R. (2022). A Comparative Study of the Level of Aspiration of Secondary-Level Students (माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों के आकांक्षा स्तर का तुलनात्मक अध्ययन). Journal of Education and Development, 20(1), 37–45.

Gupta, R., and Sharma, P. (2019). The Impact of School Environment on Students' Level of Aspiration (विद्यार्थियों के आकांक्षा स्तर पर विद्यालयी वातावरण का प्रभाव). Education and Society, 15(2), 48–56.

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Kaur, R. (2016). A Study of the Study Habits of Secondary School Students (माध्यमिक विद्यार्थियों की अध्ययन आदतों का अध्ययन). Education Research Journal, 12(2), 45–52.

Kulshreshtha, S. (2017). An Analytical Study of Students' Level of Aspiration (विद्यार्थियों के आकांक्षा स्तर का विश्लेषणात्मक अध्ययन). Journal of Educational Research, 12(3), 58–66.

Mishra, D. (2020). The Relationship Between Students' Level of Aspiration and Academic Achievement (विद्यार्थियों के आकांक्षा स्तर का शैक्षिक उपलब्धि से संबंध). Indian Education Review, 7(1), 39–46. https://doi.org/10.47997/SDES-IJIR/1.1.2020.9-13

Patel, M. (2021). Study Habits and Academic Success (अध्ययन और शैक्षिक सफलता). International Journal of Educational Research, 9(2), 55–63.

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Singh, P. (2020). A Comparative Study of the Study Habits of Students in Government and Private Schools (शासकीय एवं अशासकीय विद्यालयों के विद्यार्थियों की अध्ययन आदतों का तुलनात्मक अध्ययन). Education Research Journal, 18(3), 65–72.

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