Original
Article
THE ROLE OF ART IN THE CLEANLINESS CAMPAIGN OF INDORE
इन्दौर
के स्वच्छता
अभियान में
कला की भूमिका
|
1 Associate Professor,
Sociology, Regent Maharani Lakshmi Bai Kanya, Graduation College, Kila Bhawan, Indore,
India |
|
|
|
ABSTRACT |
||
|
English: Civilization symbolizes the civility of any society, while art is an expression of human emotions. When a social message is presented artistically, it leaves a deep impression on the public. Under the Government of India's "Clean India Campaign," efforts are being made to promote cleanliness across the country. A message of cleanliness delivered only in the form of a speech or order has limited impact. However, when the same message is conveyed to the public through paintings, music, drama, wall paintings, sculpture, dance, or song, it resonates deeply with the public. Hindi: सभ्यता
किसी भी समाज
के सभ्य होने
का प्रतीक हैं,
तो
कला मानव
भावनाओं की
अभिव्यक्ति
हैं। जब किसी
सामाजिक
संदेश को
कलात्मक रूप
में प्रस्तुत
किया जाता है,
तो
वह जनता के मन
में गहरी छाप
छोड़ता हैं।
भारत सरकार
के ’’स्वच्छ
भारत अभियान’’
के अन्तर्गत पूरे
देश में
स्वच्छता के
लिये प्रयास
किये जा रहे
हैं।
स्वच्छता का
संदेश यदि
केवल भाषण या
आदेश के रूप
में दिया
जाये तो वह
सीमित असर डालता
हैं, परन्तु
वही संदेश
चित्रावली,
संगीत,
नाटक,
भित्ती
चित्र, मूर्तिकला,
नृत्य
या गीत के
माध्यम से आम
जनता तक
पहुंचाया
जाता है तो
जनमानस मे
गहराई तक उतर
जाता हैं। Keywords: Indore City, Cleanliness, Encouraged Local
Artists, Awareness, इंदौर
शहर,
स्वच्छता, स्थानीय
कलाकारों को
प्रोत्साहन, जागरूकता |
||
प्रस्तावना
सभ्यता
किसी भी समाज
के सभ्य होने
का प्रतीक हैं, तो कला
मानव भावनाओं
की
अभिव्यक्ति
हैं। जब किसी
सामाजिक
संदेश को
कलात्मक रूप
में प्रस्तुत
किया जाता है, तो वह
जनता के मन
में गहरी छाप
छोड़ता हैं।
भारत सरकार के
’’स्वच्छ भारत
अभियान’’ के
अन्तर्गत पूरे
देश में
स्वच्छता के
लिये प्रयास
किये जा रहे
हैं।
स्वच्छता का
संदेश यदि
केवल भाषण या
आदेश के रूप
में दिया जाये
तो वह सीमित
असर डालता हैं, परन्तु
वही संदेश
चित्रावली, संगीत, नाटक, भित्ती
चित्र, मूर्तिकला, नृत्य या
गीत के माध्यम
से आम जनता तक
पहुंचाया
जाता है तो
जनमानस मे
गहराई तक उतर
जाता हैं।
इन्दौर
मध्यप्रदेश
का सबसे बड़ा
शहर हैं, और राज्य की
आर्थिक
राजधानी भी
हैं। इसे भारत
का ’’स्वच्छ
शहर’’ होने का
गौरख प्राप्त
हैं। इसे मिनी
मुंबई भी कहा
जाता हैं। यह
शहर शिक्षण, उद्योग, पर्यटन और
अपनी
स्वच्छता के
लिये जाना
जाता है।
इन्दौर
नगर निगम ने
वर्ष 2016
में स्वच्छता
पर विशेष
ध्यान देना
आरंभ किया।
लोगों में
स्वच्छता के
प्रति
जागरुकता लाना
आसान काम नहीं
था। प्रारंभ
में इस अभियान
में लोगों में
जागरुकता की
कमी रही, लेकिन जब
प्रशासन ने
स्वच्छता को
रचनात्मक रूप
में प्रस्तुत
किया तो लोगो
ने इसे अपनाना
शुरु कर दिया
। ’’हल्ला हो
हल्ला’’ ’’कचरा
गाडी आई हैं’’, ‘‘इन्दौर हो
गया नम्बर वन‘‘, ‘‘गाड़ी वाला
आया घर से
कचरा निकाल‘‘
जैसे गीत आमजन
के बीच
लोकप्रिय हो
गये। धीरे
धीरे लोगों ने
महसूस किया कि
स्वच्छता
केवल सरकारी
काम नही बल्कि
प्रत्येक
नागरिक का
कर्त्व्य है।
यही परिवर्तन
इन्दौर की
सफलता की
कुंजी बना और
लगातार आठ
वर्षों से देश
का सबसे
स्वच्छ शहर का
खिताब हासिल
करने का गौरव
प्राप्त
किया। इस
उपलब्धि के
पीछे जहाँ
प्रशासन की
योजनायें और
नागरिको की
भागीदारी हैं, वही कला
की भूमिका भी
अत्यन्त
महत्वपूर्ण
रही हैं।
स्वच्छता
की पहल करने
में सबसे बड़ी
समस्या यह थी
कि इस संदेश
को आम जनता तक
कैसे
पहुंचाया जाये, और उस पर
कैसे अमल
कराया जाये।
कुछ ऐसी
योजनाओं को
अपनाया जाये
जो शिक्षित
वर्ग के साथ
साथ अशिक्षित
वर्ग को भी
आसानी से समझ
में आ जाये।
इस
बात को ध्यान
में रखते हुये
नगर निगम के
अधिकारियों
ने स्थानीय
कलाकारों और
विद्यार्थियों
को
प्रोत्साहित
किया कि वे
दीवारों पर स्वच्छता
आधारित
संदेशो को
चित्र के रूप
में उकेरे
ताकि
अशिक्षित
वर्ग भी
उन्हें देखकर
इस स्वच्छता
अभियान में
अपना योगदान
दे सके। इसके
साथ- साथ नगर
निगम ने
कलाकारों को
प्रोत्साहित
किया कि ठोस
अपशिष्ट, जैसे लोहा, प्लास्टिक, टायर बॉटल
आदि से उपयोगी
या सजावटी
वस्तुयें बनाये।
और कलाकारों
द्वारा ऐसी
मूर्तिया या सजावटी
आकृत्ति दी
गयी - जैसे
चाणक्यपुरी
चैहारे पर
लोहे की जाली
मे प्लास्टिक
की रंगीन
बोतलों को भर
कर सजावट की
गयी, नौलखा
चैराहे पर कील, लोहे के
अपशिष्ट, टायर आदि से
बोर्ड पर
बनायी गयी
आकृत्ति, चिडिया घर
में भी इसी
प्रकार की
वस्तुओ से बनी
आकृतियाँ है, कचरे से
बनी माइकल
एंजिलो की
प्रेरणादायक
आकृत्तियाँ
या पर्यावरण
संरक्षण देने
वाली कलाकृतियाँ।
इन
कलाकृतियों
ने कचरा भी
कला बन सकता
हैं, इस
बात का संदेश
दिया। इससे
नागरिको में
कचरा प्रबंधन
के प्रति रुचि
बढ़ी और
रीसायकल की
सोच मजबूत
हुई। इन्दौर
का कचरा
संग्रहालय और
बेस्ट टू वंडर
पार्क जैसे
प्रोजेक्ट इस
दिशा के उत्कृष्ट
उदाहरण हैं।
पिछले कई वर्षों
से स्वच्छता
सर्वेक्षण
में सबसे साफ
शहर बन कर
उभरा इन्दौर
अब वैश्विक
स्तर पर
स्वच्छता के
लिये जाना
जाने लगा।
सख्त सफाई और
कचरा प्रबंधन
नीतियों ने
इसे एक
अन्तर्राष्ट्रीय
दिलायी और
दुनिया भर के
देश अपने
प्रतिनिधियों
को भेजकर इस
प्रणाली को
सीखने की
प्रेरणा ले
रहे हैं, और अपने देश
में भी इसे
लागू करवा रहे
हैं। अब तक
अनेक देशो से
लगभग 100 से
अधिक
प्रतिनिधि
स्वच्छता
मॉडल को देखने
आ चुके है।


|
|
इन्दौर
प्रशासन ने यह
समझा कि केवल
आदेशो से बदलाव
नहीं आता, लोगो को
सम्मान और
सहभागिता का
अनुभव मिलना चाहिये।
इस बात को
ध्यान में
रखते हुये
प्रशासन ने
स्थानीय
कलाकारो
द्वारा, महाविद्यालय, विद्यालय
के
विद्यार्थियों
द्वारा
दीवारों पर
कलाकृतियाँ
बनवायी, जिसमे
स्थानीय,
साँस्कृतिक, पारम्परिक
कलाकृतियाँ
और उत्सवों से
संबधित चित्र
बनाये गये।
चैराहो को भी
कलाकृतियों द्वारा
सुसज्जित
किया गया, जिससे शहर
की सुन्दरता
में चार चाँद
लग गये। दीवारों
पर बनी
कलाकृतियाँ
स्वच्छता और
सुंदरता का
संदेश देती
हैं, जिसमें
जल संरक्षण, कचरा
प्रबंधन, खुले में शौच, प्लास्टिक
का कम उपयोग, स्थानीय
कला, संस्कृति
और एतिहासिक
इमारतों को भी
दर्शाया गया
हैं। जिससे
अनेक सामाजिक
मुद्दों के साथ
साथ शहर को एक
सुंदर आकर्षक
रूप मिलता है।
इन्दौर की
गलियो, दीवारो, और
सार्वजनिक
स्थलों पर
आकर्षक
भित्ती चित्र
(उनतंसे) और
दीवार कला ने
पूरे शहर का
रूप बदल दिया।
जगह जगह
महात्मा
गाँधी, रानी
लक्ष्मीबाई, स्वामी
विवेकानन्द
जैसी
प्रेरणादायी
हस्तियो के
चित्रों के
साथ
‘‘स्वच्छता ही
सेवा हैं‘‘ जैसे
संदेश अंकित
किये गये।
इससे लोगो में
गर्व वी भावना
जागी।
पारम्परिक
मालवी पहनावा
और लोक कला के
रूप में
स्वच्छता
संदेश ‘‘मेरा
में शहर मेरी
जिम्मेदारी‘‘
जैसे नारो के
साथ स्थानीय
चित्र शैली का
उपयोग किया
गया। इस
सौन्दर्य में
वृद्धि
पोस्टर या
गंदगी न
चिपकायी जाये, आदि के
संदेश देखने
को मिलते हैं।
दीवारों पर बने
माँडने हमारी
प्राचीन
संस्कृति को
दर्शाते हैं।
चिडियाघर की
दीवारों पर
बनी जानवरों व
जीव जन्तु और
पक्षियों की
बनी तस्वीरे
हमें अनायास
ही रुक कर
देखने को
मजबूर कर देती
हैं।
|
|
|
|
|
|
|
|
इन्दौर
में स्वच्छता
संदेशो को
केवल दीवारों
तक सीमित नहीं
रखा बल्कि
संगीत, नाटक
और लोककला के
माध्यम से इसे
जन जन तक पहुंचाया।
स्थानीय
कलाकारों
‘‘इन्दौर मेरा
हैं, मैं
इसे साफ
रखूगा‘‘ जैसे
गीतो को स्वर
दिया, विद्यालयों
और
महाविद्यालयों
में यह दिखाया
गया कि कैसे
एक व्यक्ति की
लापरवाही से
पूरी बस्ती
गन्दी हो जाती
हैं, और
कैसे एक छोटे
से प्रयास से
बड़ा परिवर्तन
संभव हैं। इसी
तरह से
साँस्कृतिक
कार्यक्रमों से
नागरिको के
व्यवहार मे
गहरा
परिवर्तन आया।
प्रशासन
द्वारा
‘‘स्वच्छता
थीम पर
प्रतियोगिता‘‘, ‘‘रंगेली
बनाओं संदेश
फैलाओं‘‘, ‘‘सेल्फी विद्
क्लीन स्पॉट‘‘
जैसी
गतिविधियाँ आयोजित
की गयी।
विद्यालयों
में बच्चों को
‘‘स्वच्छता
गीत गाने‘‘ और
‘पोस्टर बनाओ‘
प्रतियोगिता
में भाग लेने
को
प्रोत्साहित
किया गया। कलाकारों
ने खुले मंच
पर लाइव
पेन्टिंग कर
यह दिखाया कि
स्वच्छता भी
एक कला हैं।
इन प्रतियोगितायो
ने न केवल
रचनात्मकता
को बढ़ावा दिया, बल्कि
नागरिको में
स्वच्छता के
प्रति भावनात्मक
लगाव भी
उत्पन्न
किया।
स्वच्छता
अभियान में
महिला
कलाकारों की
भी भागीदारी
विशेष
उल्लेखनिय
हैं। महिला
समूहों ने
स्वच्छता पर
गीत, लोक
नृत्य और
चित्रों के
प्रदर्शन के
माध्यम से
समाज में
प्रेरणा
जगायी।
महिलाओं ने
स्लम इलाको
में जाकर
दीवारों पर
सुंदर चित्र
उकेरे जिससे
वहाँ
स्वच्छता के
प्रति
जागरुकता बढ़ी।
इन्दौर
में पर्यावरण
संतुलन को भी
विकास से जोड़ा।
वृक्षारोपण
अभियानों में
‘‘पेन्ट ए. ट्री‘‘
जैसी
गतिविधियाॅ
की गयी।
कलाकारी ने
पेड़ पौधों और
पक्षियों के
चित्रों
द्वारा यह
संदेश दिया कि
स्वच्छता
केवल सड़क सफाई
नही बल्कि प्रकृत्ति
की रक्षक भी
हैं।
|
|
|
|
|
|
इन्दौर
में धार्मिक
और
सांस्कृतिक
आयोजन जैसे
गणेश उत्सव, नवरात्री, दीपावली, गणगौर आदि
को भी
स्वच्छता से
जोड़ा गया।
गणेश पंडालो
में स्वच्छता
का संदेश देने
वाले पोस्टर
और कलात्मक
सजावट का
प्रचलन हुआ।
देवी प्रतिमाओं
की सजावट में
पर्यावरण
अनुकूल सामग्री
का उपयोग किया
गया। इन
आयोजनों ने यह
संदेश दिया कि
कला और आस्था
दोनों के
माध्यम से समाज
में स्वच्छता
और पर्यावरण
संरक्षण की
भावना फैलायी
जा सकती है।
डिजिटल
युग में
इन्दौर ने
सोशल मीडिया
पर भी कला का
उपयोग करके
स्वच्छता को
जनांदोलन का
रूप दिया।
कलाकारों ने
इन्स्टाग्राम
फेसबुक और यू
ट्यूब पर
स्वच्छता
आधारित
एनीमेशन वीडियो, कार्टून
और शार्ट
फिल्मे
बनायी। इन
अभियानों ने
युवाओं को
जोड़ने में
महत्वपूर्ण
भूमिका निभायी।
युवाओं
द्वारा
स्वच्छता को
रिडयूज, री यूज, रिसायकल की
अवधारणा को
बढ़ावा देने के
लिये अनेक
कलाकृतियाँ
बनायी गयी ।
ये
कलाकृतियाँ
शहर को गंदगी
मुक्त बनाने, नागरिको
को स्वच्छता
के प्रति
जागरूक करने और
सकारात्मक व
आकर्षक रूप
देने में मदद
करती है।
|
|
|
|
|
|
हमारे
लिये यह गर्व
की बात हैं कि
इन्दौर को स्वच्छ
शहर बनाने की
पहल में हमारे
शासकीय महारानी
लक्ष्मीबाई
स्नातकोत्तर
कन्या महाविद्यालय
इन्दौर की
छात्राओं का
भी योगदान हैं।
इन छात्राओं
को इस सराहनीय
कार्य करने के
लिये प्रेरित
करने का कार्य
हमारे
महाविद्यालय
की चित्रकला
विभाग की
विभागाध्यक्ष
डॉ. कुमकुम
भारद्वाज
द्वारा किया
गया। हमारी
छात्राओं ने
इसे बखूबी से
निभाया और
स्वच्छता का
संदेश दिया।
डॉ. कुमकुम
भारद्वाज के
मार्गदर्शन
में विभाग की
छात्रायें
अपनी कला का
प्रदर्शन देश
विदेशो में भी
कर रही हैं।
अतः
अन्त में हम
यह कह सकते है
कि प्रशासन और
कलाकारों की
साझेदारी यह
दर्शाती हैं
कि जब सरकार
और कलाकार
मिलकर कार्य
करते हैं, तो
सामाजिक
परिवर्तन
सुनिश्चित
होता हैं। कला
की इस भूमिका
ने इन्दौर को
न केवल स्वच्छ
शहर बनाया
बल्कि
संवेदनशील और
सांस्कृतिक
रूप से जागरुक
शहर में बदल
दिया।
नागरिको में
स्वच्छता के
प्रति स्थायी
आदतें विकसित
हुई। शहर का
सौन्दर्य
स्तर बढ़ा, जिससे
पर्यटन और
आर्थिक विकास
को भी प्रोत्साहन
मिला। इन्दौर
का “स्वच्छता
और कला मॉडल” अब
कई अन्य शहरों
के लिये
अनुकरणीय बन
गया। इन चित्रों
ने शहर को वचमद
।तज ळंससमतल
में बदल दिया।
|
|
|
|
|
|
|
|
इन्दौर
ने यह सिद्ध
कर दिया कि
स्वच्छता
केवल सफाई का
विषय नहीं हैं, बल्कि
संस्कृति और
कला का उत्सव
हैं। यह शहर आज
न केवल स्वच्छ
हैं, बल्कि
जीवन्त रंगीन
और
प्रेरणादायक
भी हैं। दीवारों
पर रंगो के
माध्यम से
उकेरे चित्र
अनायास ही
हमारा ध्यान
ओर आकर्षित
करते हैं। पूरे
इन्दौर शहर
में प्रत्येक
स्थान पर इन
चित्रों को
उकेर कर
स्वच्छता का
संदेश दिया
गया हैं। चाहे
के विमानतल हो, बस
स्टेण्ड हो, रेल्वे
स्टेशन हो, पुल हो, दीवारे हो, सरकारी
इमारते हो, महाविद्यालय, विद्यालय, या
विश्वविद्यालय, चिडियाघर
या चैराहे हो।
इन्दौर
प्रशासन का यह
उदाहरण पूरे
भारत को यह सिखाता
है कि यदि हम
कला को
सामाजिक
संदेशो से
जोडे तो कोई
भी परिवर्तन
असंभव नही है।
स्वच्छता अब
केवल नीति नही
रही, यह
इन्दौर की
पहचान और गौरख
बन गयी हैं।
प्रशासन के
साथ साथ
इन्दौर के
लोगों ने भी
जो सहयोग प्रदान
किया है, उससे इस शहर
की खूबसूरती
में चार चाँद
लग गये। हमे
यह कहते हुये
अत्यन्त गर्व
होता हैं कि हम
भारत के सबसे
स्वच्छ शहर
इन्दौर के
निवासी है।
|
|
REFERENCES
This work is licensed under a: Creative Commons Attribution 4.0 International License
© Granthaalayah 2014-2026. All Rights Reserved.