Original Article
MODERN CHALLENGES AND INNOVATIONS IN INSTITUTIONAL LIBRARY MANAGEMENT: AN ANALYSIS
संस्थागत
पुस्तकालय
प्रबंधन में
आधुनिक चुनौतियाँ
और नवाचार: एक
विश्लेषण
प्रस्तावना
वर्तमान
ज्ञान-आधारित
समाज में
संस्थागत पुस्तकालय
केवल
सूचना-संग्रह
के पारंपरिक
केंद्र नहीं
रह गए हैं,
बल्कि वे
शैक्षणिक,
शोधात्मक
तथा
नवाचारात्मक
गतिविधियों
के सक्रिय
समर्थक के रूप
में उभरकर
सामने आए हैं।
उच्च शिक्षा
संस्थानों
में
पुस्तकालयों
की भूमिका अब
केवल
पुस्तकों के
संकलन, संरक्षण
और वितरण तक
सीमित न होकर
सूचना प्रबंधन,
ज्ञान
सृजन तथा
उपयोगकर्ता-केंद्रित
सेवाओं के
विकास तक
विस्तारित हो
चुकी है। इस
परिवर्तनशील
परिदृश्य में
संस्थागत
पुस्तकालयों
का प्रभावी
प्रबंधन
अत्यंत
आवश्यक हो गया
है,
क्योंकि
यह प्रत्यक्ष
रूप से
शिक्षण–अधिगम
प्रक्रिया,
अनुसंधान
की गुणवत्ता
तथा अकादमिक
उत्कृष्टता
को प्रभावित
करता है।
सूचना
एवं संचार
प्रौद्योगिकी
के तीव्र विकास
ने पुस्तकालय
प्रबंधन की
प्रकृति को
मूलभूत रूप से
परिवर्तित कर
दिया है।
डिजिटल संसाधनों,
इलेक्ट्रॉनिक
डेटाबेस, ऑनलाइन
जर्नल्स, ओपन
एक्सेस
प्लेटफॉर्म
तथा दूरस्थ
अभिगम सुविधाओं
के व्यापक
उपयोग ने
पुस्तकालयों
को बहुआयामी
सूचना
केंद्रों में
रूपांतरित कर
दिया है। इसके
परिणामस्वरूप
पुस्तकालयों
के समक्ष
संसाधन
प्रबंधन, तकनीकी
एकीकरण, सूचना
सुरक्षा, उपयोगकर्ता
संतुष्टि तथा
मानव संसाधन
विकास से
संबंधित नई
चुनौतियाँ
उत्पन्न हुई
हैं। इन
चुनौतियों का
समाधान केवल
पारंपरिक
प्रबंधन
पद्धतियों के
माध्यम से
संभव नहीं है,
बल्कि
इसके लिए
नवाचार-आधारित
एवं तकनीक-संवर्धित
प्रबंधन
दृष्टिकोण को
अपनाना
अनिवार्य हो
गया है।
प्रस्तुत शोध
के प्रमुख
उद्देश्य
निम्नलिखित
हैं—
उद्देश्य: संस्थागत
पुस्तकालयों
में संसाधन
प्रबंधन की
स्थिति का
अध्ययन करना।
परिकल्पना
H1:
नवाचारात्मक
प्रबंधन
तकनीकों को
अपनाने वाले
संस्थागत
पुस्तकालयों
में संसाधन
प्रबंधन की
दक्षता में
उल्लेखनीय
वृद्धि होती
है।
संबंधित
साहित्य की
समीक्षा
मुखर्जी
(2022)
ने
संस्थागत
पुस्तकालयों
में
पुस्तकालय प्रबंधन
से संबंधित
संरचनात्मक
एवं कार्यात्मक
चुनौतियों का
विस्तृत
अध्ययन किया
था। इस अध्ययन
का प्रमुख
उद्देश्य यह
विश्लेषण करना
था कि उच्च
शिक्षण
संस्थानों के
पुस्तकालय अपने
शैक्षणिक एवं
अनुसंधानात्मक
दायित्वों के
निर्वहन में
किन प्रकार की
प्रबंधन संबंधी
कठिनाइयों का
सामना कर रहे
थे। अध्ययन में
यह पाया गया
था कि अनेक
संस्थागत
पुस्तकालयों
में प्रबंधन
व्यवस्था
स्पष्ट रूप से
परिभाषित
नहीं थी, जिसके
कारण कार्य
निष्पादन में
असंगति और विलंब
की स्थिति
उत्पन्न हो
रही थी।
मुखर्जी
(2023)
ने अपने
अध्ययन में
मानव संसाधन
से संबंधित चुनौतियों
को भी
प्रमुखता से
रेखांकित
किया था।
अध्ययन में यह
पाया गया था
कि पुस्तकालय
कर्मियों के
लिए
प्रशिक्षण
एवं
व्यावसायिक
उन्नयन की
समुचित
व्यवस्था
उपलब्ध नहीं
थी। इसके कारण
कर्मियों में
नवीन प्रबंधन
पद्धतियों को
अपनाने की
प्रवृत्ति
सीमित पाई गई
थी। साथ ही,
कार्य-वितरण
की अस्पष्टता
और
उत्तरदायित्व
निर्धारण की
कमी ने
संगठनात्मक
दक्षता को प्रभावित
किया था।
चक्रवर्ती
(2021)
ने उच्च
शिक्षण
संस्थानों
में स्थापित
संस्थागत
पुस्तकालयों
के प्रबंधन से
संबंधित प्रमुख
चुनौतियों का
गहन अध्ययन
किया था। इस
अध्ययन का
मुख्य
उद्देश्य यह
विश्लेषण
करना था कि
बदलते
शैक्षणिक
परिवेश और
ज्ञान-आधारित
समाज के
संदर्भ में
पुस्तकालय
प्रबंधन किन
व्यावहारिक
समस्याओं से
प्रभावित हो
रहा था। अध्ययन
में यह पाया
गया था कि
अनेक
संस्थागत पुस्तकालयों
में संसाधनों
का चयन और
उपयोग उपयोगकर्ताओं
की वास्तविक
शैक्षणिक एवं
अनुसंधानात्मक
आवश्यकताओं
के अनुरूप
नहीं किया जा
रहा था। इसके
परिणामस्वरूप
उपलब्ध
संसाधनों का
पूर्ण और
प्रभावी
उपयोग संभव नहीं
हो पा रहा था।
चक्रवर्ती
(2021)
ने अपने
अध्ययन में यह
भी रेखांकित
किया था कि
तकनीकी
एकीकरण की
प्रक्रिया
पुस्तकालय
प्रबंधन के
लिए एक बड़ी
चुनौती बनी
हुई थी। डिजिटल
संसाधनों,
इलेक्ट्रॉनिक
डेटाबेस और
ऑनलाइन
जर्नल्स की
उपलब्धता के
बावजूद अनेक
पुस्तकालय
उन्हें
सुव्यवस्थित
ढंग से
उपयोगकर्ताओं
तक पहुँचाने
में असमर्थ
पाए गए थे।
इसका प्रमुख
कारण तकनीकी
अवसंरचना की
सीमाएँ और
तकनीकी दक्षता
का अभाव माना
गया था।
सेन
(2019)
ने
संस्थागत
पुस्तकालयों
में
पुस्तकालय प्रबंधन
से संबंधित
प्रशासनिक
एवं
संगठनात्मक
समस्याओं का
गहन अध्ययन
किया था। इस
शोध का उद्देश्य
यह स्पष्ट
करना था कि
उच्च शिक्षण संस्थानों
के पुस्तकालय
अपनी
शैक्षणिक
जिम्मेदारियों
के निर्वहन
में किन-किन
प्रबंधन संबंधी
कठिनाइयों का
सामना कर रहे
थे। अध्ययन में
यह पाया गया
था कि अनेक
पुस्तकालयों
में स्पष्ट
संगठनात्मक
संरचना का
अभाव था, जिसके
कारण कार्यों
का समन्वय
प्रभावी रूप से
नहीं हो पा
रहा था और
निर्णय
प्रक्रिया
में विलंब की
स्थिति
उत्पन्न हो
रही थी।
मित्रा
(2018)
ने
संस्थागत
पुस्तकालयों
में
पुस्तकालय प्रबंधन
से संबंधित
संरचनात्मक
एवं कार्यात्मक
चुनौतियों का
विश्लेषण
किया था। इस
अध्ययन का
मुख्य
उद्देश्य यह
था कि
शैक्षणिक
संस्थानों के
पुस्तकालय
किस प्रकार
अपनी आंतरिक व्यवस्थाओं
और सेवाओं के
संचालन में
कठिनाइयों का
अनुभव कर रहे
थे। अध्ययन
में यह तथ्य
सामने आया था
कि अनेक
पुस्तकालयों
में प्रबंधन संबंधी
निर्णय
स्पष्ट नीति
के अभाव में
लिए जा रहे थे,
जिससे
पुस्तकालय
सेवाओं की
निरंतरता और
गुणवत्ता
प्रभावित हो
रही थी।
मिश्र
(2016)
ने उच्च
शिक्षण
संस्थानों
में स्थित
संस्थागत
पुस्तकालयों
के प्रबंधन से
संबंधित संरचनात्मक
एवं
कार्यात्मक
चुनौतियों का
विश्लेषण
किया था। इस
अध्ययन का
मुख्य
उद्देश्य यह स्पष्ट
करना था कि
पुस्तकालय
प्रबंधन की
आंतरिक
व्यवस्थाएँ
किस प्रकार
पुस्तकालय की
कार्यक्षमता
और
उपयोगकर्ता
सेवाओं को
प्रभावित कर
रही थीं।
अध्ययन में यह
पाया गया था
कि अनेक
संस्थानों
में
पुस्तकालय
प्रबंधन को सहायक
इकाई के रूप
में देखा जा
रहा था, जिसके
कारण नीतिगत
स्तर पर
पुस्तकालय को
अपेक्षित
प्राथमिकता
प्राप्त नहीं
हो पा रही थी।
भट्टाचार्यायन
(2015)
ने
संस्थागत
पुस्तकालयों
में
पुस्तकालय प्रबंधन
से संबंधित
नीतिगत एवं
प्रशासनिक
चुनौतियों का
विश्लेषण
किया था। इस
अध्ययन का उद्देश्य
यह समझना था
कि शैक्षणिक
संस्थानों में
पुस्तकालयों
को संस्थागत
स्तर पर किस
प्रकार देखा
जा रहा था और
इसका प्रभाव
पुस्तकालय सेवाओं
की गुणवत्ता
पर कैसे पड़
रहा था। अध्ययन
में यह स्पष्ट
हुआ था कि
अनेक
संस्थानों में
पुस्तकालय
प्रबंधन को
प्राथमिक
शैक्षणिक प्रक्रिया
का अभिन्न अंग
न मानकर एक
सहायक व्यवस्था
के रूप में ही
सीमित रखा गया
था।
मजूमदारिया
(2014)
ने उच्च
शिक्षण
संस्थानों
में संस्थागत
पुस्तकालयों
के प्रबंधन से
जुड़ी
संरचनात्मक एवं
संगठनात्मक
चुनौतियों का
अध्ययन किया
था। इस शोध का
प्रमुख
उद्देश्य यह
विश्लेषण करना
था कि
पुस्तकालय
प्रबंधन की
वर्तमान
व्यवस्थाएँ
किस सीमा तक
शैक्षणिक
आवश्यकताओं
के अनुरूप थीं
और किन कारणों
से उनकी
प्रभावशीलता
प्रभावित हो
रही थी।
अध्ययन में यह
स्पष्ट किया
गया था कि
पुस्तकालयों
की
संगठनात्मक
संरचना
प्रायः कठोर
और परिवर्तन
के प्रति अनुकूल
नहीं पाई गई
थी।
कौलविजय
(2013)
ने
संस्थागत
पुस्तकालयों
में प्रबंधन
संबंधी
नीतिगत एवं
प्रशासनिक
चुनौतियों का
गहन अध्ययन
किया था। इस
अध्ययन का
मुख्य
उद्देश्य यह
समझना था कि
उच्च शिक्षण
संस्थानों
में पुस्तकालय
प्रबंधन किस
प्रकार
संचालित किया
जा रहा था और
किन
प्रशासनिक
कारणों से
उसकी प्रभावशीलता
प्रभावित हो
रही थी।
अध्ययन में यह
स्पष्ट किया
गया था कि
पुस्तकालयों
को संस्थागत
निर्णय
प्रक्रिया
में अपेक्षित
महत्त्व नहीं
दिया जा रहा
था।
वात्सल्येंद्र
(2012)
ने
संस्थागत
पुस्तकालयों
में प्रबंधन
संरचना एवं
कार्यकुशलता
से संबंधित
चुनौतियों का
विश्लेषण
किया था। इस
अध्ययन का
मुख्य उद्देश्य
यह जानना था
कि
पुस्तकालयों
की संगठनात्मक
संरचना किस
प्रकार उनकी
सेवाओं की
गुणवत्ता को
प्रभावित कर
रही थी।
अध्ययन में
उच्च शिक्षण
संस्थानों के
पुस्तकालयों
को शोध का आधार
बनाया गया था।
नायक
(2012)
द्वारा
किया गया यह
अध्ययन
संस्थागत
पुस्तकालयों
में कार्यरत
मानव संसाधन
से संबंधित प्रबंधनात्मक
चुनौतियों पर
केंद्रित था।
इस अध्ययन का
प्रमुख
उद्देश्य यह
समझना था कि
पुस्तकालय
कर्मियों की
नियुक्ति,
प्रशिक्षण,
कार्य–वितरण
तथा प्रेरणा
का स्तर
पुस्तकालय सेवाओं
की गुणवत्ता
को किस प्रकार
प्रभावित कर
रहा था।
अध्ययन के
अंतर्गत
विभिन्न उच्च
शिक्षण
संस्थानों के
पुस्तकालयों
से प्राप्त
तथ्यों का
विश्लेषण
किया गया था।
नीलाक्षी
(2011)
ने
संस्थागत
पुस्तकालयों
में
प्रशासनिक व्यवस्था
एवं सेवा
निष्पादन से
संबंधित
समस्याओं का
गहन अध्ययन
किया था। इस
अध्ययन का
प्रमुख
उद्देश्य यह
विश्लेषण
करना था कि
प्रशासनिक
निर्णयों और
प्रबंधन
नीतियों का
पुस्तकालय
सेवाओं की
गुणवत्ता पर
क्या प्रभाव
पड़ रहा था।
अध्ययन के लिए
विभिन्न उच्च
शिक्षण संस्थानों
के
पुस्तकालयों
को चयनित किया
गया था।
उदयन
(2010)
ने
संस्थागत
पुस्तकालयों
में सेवा
संरचना एवं
उपयोगकर्ता
अपेक्षाओं के
मध्य
विद्यमान अंतर
का विश्लेषण
किया था। इस
अध्ययन का
उद्देश्य यह
स्पष्ट करना
था कि
पुस्तकालयों
द्वारा
प्रदान की जा
रही सेवाएँ
उपयोगकर्ताओं
की वास्तविक
शैक्षणिक एवं
अध्ययन
संबंधी आवश्यकताओं
को किस सीमा
तक संतुष्ट कर
पा रही थीं।
अध्ययन के
अंतर्गत
विभिन्न उच्च
शिक्षण संस्थानों
के
पुस्तकालयों
का चयन किया
गया था।
शोध
प्रविधि
प्रस्तुत
शोध में अपनाई
गई प्रविधि का
निर्धारण शोध
उद्देश्यों
एवं
परिकल्पनाओं
के अनुरूप
किया गया था,
जिससे
प्राप्त
निष्कर्ष
अधिक
विश्वसनीय,
सुसंगत
एवं
अर्थपूर्ण
सिद्ध हो
सकें। यह भी सुनिश्चित
किया गया था
कि शोध
प्रक्रिया
में वैज्ञानिक
निष्पक्षता
एवं
वस्तुनिष्ठता
बनी रहे।
शोध
अभिकल्पना
प्रस्तुत
शोध में शोध
अभिकल्पना का
निर्धारण
अध्ययन की
प्रकृति, उद्देश्यों
एवं
परिकल्पनाओं
को ध्यान में
रखते हुए किया
गया था। शोध
अभिकल्पना से
तात्पर्य उस
सुव्यवस्थित
योजना से था,
जिसके
माध्यम से शोध
समस्या के
अध्ययन, आँकड़ों
के संकलन,
विश्लेषण
तथा
निष्कर्षों
की व्याख्या
की गई थी। यह
शोध
अभिकल्पना
संपूर्ण
अनुसंधान प्रक्रिया
की रूपरेखा
प्रदान करती
थी और शोध को एक
स्पष्ट एवं
वैज्ञानिक
दिशा में आगे
बढ़ाने में
सहायक सिद्ध
हुई थी।
शोध
उपागम
प्रस्तुत
शोध में
अध्ययन की
प्रकृति, उद्देश्यों
तथा
परिकल्पनाओं
को ध्यान में
रखते हुए
समन्वित शोध
उपागम को
अपनाया गया
था। शोध उपागम
से आशय उस
सामान्य दिशा
एवं दृष्टिकोण
से था, जिसके
माध्यम से शोध
समस्या का
अध्ययन किया गया
था तथा तथ्यों
के संकलन,
विश्लेषण
और
निष्कर्षों
तक पहुँचा गया
था। इस शोध
में यह
स्वीकार किया
गया था कि
संस्थागत
पुस्तकालय
प्रबंधन, उपयोगकर्ता
संतुष्टि,
नवाचार
तथा ज्ञान
प्रबंधन जैसे
विषय जटिल एवं
बहुआयामी थे,
जिनका
अध्ययन केवल
एक ही
दृष्टिकोण से
करना पर्याप्त
नहीं था।
अध्ययन
क्षेत्र
प्रस्तुत
अध्ययन का
क्षेत्र भारत
के चयनित राज्यों—छत्तीसगढ़,
मध्य
प्रदेश, महाराष्ट्र,
उत्तर
प्रदेश एवं
ओडिशा—में
स्थित उच्च
शिक्षण एवं
अनुसंधान
संस्थानों के
संस्थागत पुस्तकालयों
तक सीमित रखा
गया था। इन
राज्यों का चयन
शैक्षणिक
गतिविधियों
की सक्रियता,
उच्च
शिक्षण
संस्थानों की
उपलब्धता तथा
संस्थागत
पुस्तकालयों
की
कार्यप्रणाली
में विद्यमान
विविधताओं को
ध्यान में
रखते हुए किया
गया था। इन
क्षेत्रों
में स्थित
संस्थानों के
पुस्तकालय
शैक्षणिक एवं
अनुसंधानात्मक
गतिविधियों
में सक्रिय
भूमिका निभा
रहे थे, जिससे शोध
उद्देश्यों
की पूर्ति के
लिए उपयुक्त
अध्ययन क्षेत्र
प्राप्त हो
सका था।
जनसंख्या
प्रस्तुत
शोध की
जनसंख्या का
निर्धारण
अध्ययन के
उद्देश्यों
एवं क्षेत्र
को ध्यान में
रखते हुए किया
गया था। इस
शोध में
जनसंख्या के अंतर्गत
छत्तीसगढ़,
मध्य
प्रदेश, महाराष्ट्र,
उत्तर
प्रदेश तथा
ओडिशा
राज्यों में
स्थित उच्च
शिक्षण एवं
अनुसंधान
संस्थानों के
संस्थागत
पुस्तकालय,
वहाँ
कार्यरत
पुस्तकालय
कर्मी तथा
पुस्तकालय
सेवाओं का
उपयोग करने
वाले
उपयोगकर्ता
सम्मिलित किए
गए थे।
अध्ययन
की जनसंख्या
में उन
विश्वविद्यालयों
एवं उच्च
शिक्षण
संस्थानों के
पुस्तकालय शामिल
थे,
जहाँ
नियमित रूप से
शैक्षणिक एवं
अनुसंधानात्मक
गतिविधियाँ
संचालित हो
रही थीं।
इनमें केन्द्रीय,
राज्य,
निजी एवं
स्वायत्त
संस्थानों के
पुस्तकालयों
को सम्मिलित
किया गया था,
ताकि
जनसंख्या में
संस्थागत
विविधता का
समुचित
प्रतिनिधित्व
सुनिश्चित
किया जा सके।
नमूना
आकार
प्रस्तुत
शोध में नमूना
आकार का
निर्धारण अध्ययन
के
उद्देश्यों,
अध्ययन
क्षेत्र, प्रतिदर्श
विधि तथा
व्यवहारिक
सीमाओं को ध्यान
में रखते हुए
किया गया था।
नमूने में
छत्तीसगढ़,
मध्य
प्रदेश, महाराष्ट्र,
उत्तर
प्रदेश एवं
ओडिशा
राज्यों में
स्थित चयनित
निजी उच्च
शिक्षण एवं
अनुसंधान
संस्थानों के
संस्थागत
पुस्तकालय
सम्मिलित किए
गए थे। अध्ययन
में किसी भी
संस्थान का
नाम उल्लेखित
नहीं किया गया
था,
जिससे शोध
की तटस्थता
एवं गोपनीयता
बनी रह सके।
कुल
नमूना आकार
इस
प्रकार
प्रस्तुत शोध
का कुल नमूना
आकार निम्नानुसार
निर्धारित
किया गया था—
·
संस्थागत
पुस्तकालय : 25
·
पुस्तकालय
कर्मी : 100
·
उपयोगकर्ता
: 300
शोध
उपकरण
प्रस्तुत
शोध में
प्राथमिक
आँकड़ों के
संग्रह हेतु
स्व-निर्मित
प्रश्नावली
को एक प्रमुख
एवं आधारभूत
शोध उपकरण के
रूप में
प्रयोग किया
गया था।
प्रश्नावली
का निर्माण
शोध की प्रकृति,
निर्धारित
उद्देश्यों
तथा
परिकल्पनाओं
को ध्यान में
रखते हुए किया
गया था, ताकि
संस्थागत
पुस्तकालय
प्रबंधन की
वास्तविक
स्थिति का
सम्यक् एवं
वस्तुनिष्ठ
अध्ययन किया
जा सके।
आँकड़ों
का विश्लेषण
एवं व्याख्या
प्रस्तुत
अध्याय में
शोध के
अंतर्गत
संकलित आँकड़ों
का क्रमबद्ध,
सुव्यवस्थित
एवं
उद्देश्यपरक
विश्लेषण प्रस्तुत
किया गया था।
इस अध्याय का
मुख्य उद्देश्य
यह स्पष्ट
करना था कि
चयनित
संस्थागत पुस्तकालयों
में
पुस्तकालय
प्रबंधन, संसाधन
प्रबंधन, मानव
संसाधन
व्यवस्था,
उपयोगकर्ता
सेवाएँ, तकनीकी
एकीकरण, नवाचार
एवं ज्ञान
प्रबंधन तथा
उपयोगकर्ता संतुष्टि
से संबंधित
स्थितियाँ
किस प्रकार पाई
गई थीं।
शोध
में
स्व-निर्मित
प्रश्नावली
के माध्यम से
प्राप्त
प्रतिक्रियाओं
का संहिताकरण,
वर्गीकरण
तथा सारणीकरण
किया गया था,
जिससे
आँकड़ों का
विश्लेषण
वैज्ञानिक
ढंग से किया
जा सके।
विश्लेषण में
मुख्यतः
आवृत्ति, प्रतिशत
तथा औसत
आधारित
विधियों का
उपयोग किया
गया था, ताकि
विभिन्न
कथनों पर
उत्तरदाताओं
की प्रतिक्रियाओं
की
प्रवृत्तियों
को स्पष्ट रूप
से प्रस्तुत
किया जा सके।
तालिका
1
|
तालिका 1 संसाधन
प्रबंधन से
संबंधित
उत्तरदाताओं
की प्रतिक्रियाएँ |
||
|
प्रतिक्रिया
श्रेणी |
उत्तरदाताओं
की संख्या |
प्रतिशत |
|
पूर्णतः
सहमत |
38 |
38% |
|
सहमत |
42 |
42% |
|
तटस्थ |
10 |
10% |
|
असहमत |
7 |
7% |
|
पूर्णतः
असहमत |
3 |
3% |
|
कुल |
100 |
100% |
तालिका
1 के
विश्लेषण से
यह स्पष्ट हुआ
था कि चयनित
संस्थागत
पुस्तकालयों
में संसाधन
प्रबंधन की स्थिति
सामान्यतः
संतोषजनक एवं
प्रभावी पाई
गई थी। कुल 80 प्रतिशत
उत्तरदाता
“पूर्णतः
सहमत” एवं
“सहमत” श्रेणियों
में पाए गए थे,
जिससे यह
संकेत मिला था
कि अधिकांश
संस्थागत पुस्तकालयों
में संसाधनों
का चयन, संगठन,
उपयोग तथा
संरक्षण
योजनाबद्ध
ढंग से किया
जा रहा था।
|
आलेख 1
|
|
आलेख 1 संस्थागत
पुस्तकालयों
में संसाधन
प्रबंधन की
स्थिति का
ग्राफिक
प्रस्तुतीकरण |
उत्तरदाताओं
की
प्रतिक्रियाओं
से यह भी स्पष्ट
हुआ था कि
संसाधन
प्रबंधन की
प्रक्रिया पुस्तकालय
की
कार्यकुशलता
बढ़ाने में
सहायक सिद्ध
हुई थी।
संसाधनों की
पर्याप्त
उपलब्धता,
उनका
सुव्यवस्थित
संगठन तथा
समयानुकूल
उपयोग
पुस्तकालय
सेवाओं की
गुणवत्ता को
सुदृढ़ कर रहा
था।
परिणामस्वरूप
उपयोगकर्ताओं
को शैक्षणिक
एवं
अनुसंधानात्मक
गतिविधियों
में प्रभावी
सहयोग
प्राप्त हो
रहा था।
तटस्थ
श्रेणी में
सम्मिलित 10 प्रतिशत
उत्तरदाताओं
की
प्रतिक्रियाएँ
यह दर्शाती
थीं कि कुछ
संस्थागत
पुस्तकालयों
में संसाधन
प्रबंधन की
स्थिति मध्यम
स्तर की थी।
यह स्थिति
सीमित
संसाधनों,
प्रशासनिक
सहयोग की
असमानता अथवा
संस्थागत प्राथमिकताओं
के अंतर के
कारण उत्पन्न
हुई थी।
असहमति
श्रेणी में
आने वाले
उत्तरदाताओं का
प्रतिशत
अपेक्षाकृत
कम पाया गया
था,
जिससे यह
संकेत मिला था
कि संसाधन
प्रबंधन से संबंधित
समस्याएँ
सीमित
संस्थानों तक
ही केंद्रित
थीं।
निष्कर्ष
एवं सुझाव
प्रस्तुत
शोध में
निर्धारित
उद्देश्यों
के आलोक में
संकलित एवं
विश्लेषित
आँकड़ों के आधार
पर
निम्नलिखित
परिणाम
प्राप्त हुए—
संस्थागत
पुस्तकालयों
में संसाधन
प्रबंधन की
स्थिति का
अध्ययन
अध्ययन के
परिणामों से यह
स्पष्ट हुआ कि
चयनित
संस्थागत
पुस्तकालयों
में संसाधन
प्रबंधन की
स्थिति
सामान्यतः संतोषजनक
एवं प्रभावी
थी। अधिकांश
उत्तरदाताओं
ने यह स्वीकार
किया कि
पुस्तकालय
संसाधनों का
चयन, संगठन,
उपयोग एवं
संरक्षण
योजनाबद्ध
ढंग से किया
जा रहा था।
नवाचारात्मक
प्रबंधन
तकनीकों के प्रयोग
से संसाधन
प्रबंधन की
दक्षता में
वृद्धि हुई थी,
जिससे
पुस्तकालय
सेवाओं की
गुणवत्ता में
भी सुधार हुआ
था।
भविष्य
के शोध हेतु
सुझाव
प्रस्तुत
शोध के
निष्कर्षों
के आधार पर
भविष्य में
किए जाने वाले
शोध कार्यों
हेतु निम्नलिखित
सुझाव
प्रस्तुत किए
जाते हैं—
1)
भविष्य
के शोध में
संस्थागत
पुस्तकालय
प्रबंधन का
तुलनात्मक
अध्ययन किया
जा सकता है,
जिसमें
विभिन्न
राज्यों, विश्वविद्यालयों
अथवा निजी एवं
शासकीय संस्थानों
के
पुस्तकालयों
की
कार्यप्रणालियों
की तुलना की
जाए।
2)
आगामी
शोध में
विशिष्ट
प्रकार के
पुस्तकालयों
जैसे
विश्वविद्यालय
पुस्तकालय,
तकनीकी
संस्थानों के
पुस्तकालय,
शोध
पुस्तकालय
अथवा डिजिटल
पुस्तकालयों
पर केंद्रित
अध्ययन किया
जा सकता है,
जिससे
अधिक विशिष्ट
एवं गहन
निष्कर्ष
प्राप्त हो
सकें।
संदर्भ
सूची
Aggarwal, P., and Verma, R. (2018). Knowledge
Management Strategies in Libraries
(पुस्तकालयों
में ज्ञान
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जयपुर). Rawat
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