A STUDY OF
PERCEPTIONS OF PROFESSIONAL DEVELOPMENT AMONG SENIOR SECONDARY SCHOOL TEACHERS
उच्च माध्यमिक स्तर के शिक्षकों के व्यावसायिक विकास के प्रति प्रत्यक्षण का अध्ययन
Bhumika Pareek 1, Dr. Ajay Surana 2
1 Research Scholar, Department of
Education, Banasthali Vidyapeeth, India
2 Research Supervisor and Head of Department, Department of Education, Banasthali Vidyapeeth, India
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ABSTRACT |
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English: Professional development plays a crucial role in enhancing the competence and effectiveness of teachers. This study was conducted to analyze the perceptions of professional development among teachers of government and private senior secondary schools. For this purpose, a self-developed perception scale was constructed by the researcher and administered to 200 teachers (male and female). Data were collected through the survey method and analyzed using the t-test. The findings of the study revealed a significant difference in the perceptions of professional development between government and private school teachers, while no significant difference was found between the perceptions of male and female teachers. Based on the findings, it is recommended that all teachers be provided with equal training opportunities, access to resources, and continuous professional development programs to improve the quality of teaching and strengthen the education system. Hindi: व्यावसायिक विकास शिक्षकों की दक्षता और प्रभावशीलता बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। प्रस्तुत अध्ययन उच्च माध्यमिक स्तर के सरकारी एवं गैर-सरकारी विद्यालयों के शिक्षकों में व्यावसायिक विकास के प्रति प्रत्यक्षण का विश्लेशण करने हेतु किया गया। इसके लिए शोधकत्र्री द्वारा स्वनिर्मित प्रत्यक्षण मापनी का निर्माण किया गया, जिसे 200 शिक्षकों (पुरुश एवं महिला) पर लागू किया गया। सर्वेक्षण विधि के माध्यम से आंकड़े एकत्र किए गए और टी-परीक्षण द्वारा विश्लेशण किया गया। अध्ययन के निष्कर्षों से ज्ञात हुआ कि सरकारी एवं गैर-सरकारी शिक्षकों के प्रत्यक्षण में व्यावसायिक विकास के प्रति सार्थक अंतर पाया गया, जबकि महिला एवं पुरुश शिक्षकों के प्रत्यक्षण में कोई सार्थक अंतर नहीं पाया गया। निष्कर्षों के आधार पर यह अनुशंसा की गई कि सभी शिक्षकों को समान प्रशिक्षण अवसर, संसाधनों की उपलब्धता तथा सतत व्यावसायिक विकास कार्यक्रम प्रदान किए जाएं ताकि शिक्षण गुणवत्ता में सुधार हो और शिक्षा प्रणाली अधिक सुदृढ़ बन सके। |
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Received 07 August
2024 Accepted 08 September 2024 Published 31 October 2024 DOI 10.29121/granthaalayah.v12.i10.2024.6598 Funding: This research
received no specific grant from any funding agency in the public, commercial,
or not-for-profit sectors. Copyright: © 2024 The
Author(s). This work is licensed under a Creative Commons
Attribution 4.0 International License. With the
license CC-BY, authors retain the copyright, allowing anyone to download,
reuse, re-print, modify, distribute, and/or copy their contribution. The work
must be properly attributed to its author.
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Keywords: Professional Development, Perception, Collaborative Learning, Self-Reflection व्यावसायिक
विकास, प्रत्यक्षण, सहयोगात्मक
अधिगम, आम्मचिंतन |
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1. प्रस्तावना
शिक्षकों
का
व्यावसायिक
विकास एक सतत
और योजनाबद्ध
प्रक्रिया है, जिसका
उद्देश्य
शिक्षकों की
व्यावसायिक
दक्षताओं, अध्यापन
कौशल,
विशय-ज्ञान
तथा उनकी
समग्र
प्रभावशीलता
को सुदृढ़ करना
है। वर्तमान
समय में
शिक्षा का
परिदृश्य
निरंतर
परिवर्तनशील
है, जहाँ
शिक्षकों की
भूमिका केवल
ज्ञान प्रदान करने
तक सीमित नहीं
रह गई है, बल्कि वे
एक
मार्गदर्शक, प्रेरक
और परिवर्तन
के वाहक के
रूप में उभरे
हैं। ऐसे में
शिक्षकों के
लिए आधुनिक
शिक्षण विधियों, तकनीकी
उपकरणों और
विद्यार्थियों
की विविध आवश्यकताओं
के अनुरूप
स्वयं को
अद्यतन रखना अत्यंत
आवश्यक हो गया
है। इस दिशा
में व्यावसायिक
विकास एक
अत्यंत
प्रभावी
माध्यम है।
भारत में, विशेश
रूप से नई
शिक्षा नीति 2020 के
क्रियान्वयन
के पश्चात
शिक्षकों के
प्रशिक्षण
एवं
व्यावसायिक
उन्नयन पर
विशेश बल दिया
गया है। नीति
यह स्पष्ट
करती है कि कोई
भी शिक्षा
प्रणाली अपने
शिक्षकों की
गुणवत्ता से
ऊपर नहीं उठ
सकती,
इसलिए
शिक्षक
प्रशिक्षण को
प्राथमिकता
दी जानी
चाहिए। इसमें
पूर्व-सेवा
प्रशिक्षण, सेवा
के दौरान
प्रशिक्षण, मेंटरशिप
कार्यक्रम, सतत
अधिगम अवसर
एवं
व्यावसायिक
समुदायों में
सहभागिता
शामिल है। यह
उन्हें
नवाचारपूर्ण
शिक्षण
विधियों, शैक्षिक
शोध और कक्षा
प्रबंधन में
दक्ष बनाता है, जिससे
विद्यार्थियों
के अधिगम
परिणामों में
भी सुधार होता
है।
इसके
अतिरिक्त, व्यावसायिक
विकास
शिक्षकों में
आत्मचिंतन, सहयोगात्मक
अधिगम तथा
अनुकूली
शिक्षण रणनीतियों
को
प्रोत्साहित
करता है, जिससे वे
ग्रामीण और
शहरी,
सरकारी और
निजी स्कूलों
में
विद्यार्थियों
की विविध
आवश्यकताओं
को बेहतर ढंग
से पूरा कर पाते
हैं। आज के
समय में
शिक्षक विकास
एक एकबारगी
प्रक्रिया न
होकर आजीवन
चलने वाली
यात्रा बन गई
है, जो
समावेशी, गुणवत्तापूर्ण
और उत्तरदायी
शिक्षा प्रणाली
की नींव रखती
है।
2. संबंधित साहित्य का अध्ययन
Rani and Seema (2022) श्री
गंगानगर व
हनुमानगढ
जिले के उच्च
माध्यमिक
स्तर के
विद्यालयों
में कार्यरत
शिक्षकों की
शिक्षण-अभिवृत्ति
एवं
व्यावसायिक
मूल्यों का
अध्ययन किया।
इनके अध्ययन
का उद्देष्य
श्री गंगानगर
व हनुमानगढ
जिले के उच्च
माध्यमिक
स्तर के
विद्यालयों
में कार्यरत
शिक्षकों की
शिक्षण-अभिवृत्ति
एवं
व्यावसायिक मूल्यों
का अध्ययन
विद्यालय के
प्रकार और लैंगिक
विभिन्नता के
आधार पर करना
था। अध्ययन के
निष्कर्ष में
यह पाया कि
राजकीय
माध्यमिक विद्यालय
व निजी
माध्यमिक
विद्यालय के
अध्यापकों की
अध्यापन
अभिवृत्ति
में सार्थक
अन्तर है।
लेकिन पुरुश व
महिला
अध्यापकों के
व्यावसायिक
मूल्य अलग-अलग
है। इस शोध
कार्य के
परिणाम इस
तथ्य की ओर इंगित
करते हैं कि
तुलनात्मक
दृष्टि से
अधिकांश
परिस्थितियों
में सरकारी
माध्यमिक विद्यालयों
के चाहे पुरुश
अध्यापक हों
या महिला
अध्यापिकाओं
उनकी अध्यापन
अभिवृत्ति व
व्यावसायिक
मूल्यों निजी माध्यमिक
विद्यालय के
पुरुश और
महिला
अध्यापिकाओं
के समान पायी
है।
Fiza, K. (2020) ए
स्टडी ऑन द
एटीट्यूड ऑफ द
सैकण्डरी
स्कूल टीचर्स टुवर्ड्स
द कन्टीन्यूयस
प्रोफेशनल
डेवेलपमेन्ट
का अध्ययन
किया। इनके
अध्ययन का
उद्देष्य
निरंतर
व्यावसायिक
विकास के प्रति
शिक्षकों के
रवैये की जांच
करने और निरंतर
व्यावसायिक
विकास के बाद
शिक्षकों के
प्रदर्शन का
मूल्यांकन
करना था।
अध्ययन को
लाहौर जिले तक
सीमित किया
गया था।
माध्यमिक
कक्षाओं को
पढ़ाने वाले
सभी पब्लिक
स्कूल शिक्षक
अध्ययन की
जनसंख्या थे।
शहर लाहौर के
तीन कस्बों के
22
माध्यमिक
विद्यालयों
से एक सौ
चैवालीस माध्यमिक
विद्यालय के
शिक्षकों को
यादृच्छिक आधार
पर चुना गया
था। अध्ययन
वर्णनात्मक
था और डेटा
संग्रह के लिए
सर्वेक्षण
तकनीक अपनाई
गई और डेटा
विश्लेशण पर
मूल्यांकन
किया गया।
परिणामों ने
संकेत दिया कि
निरंतर
व्यावसायिक
विकास का
माध्यमिक
विद्यालय के
शिक्षकों के
दृष्टिकोण पर
सकारात्मक
प्रभाव पड़ा।
निरंतर
व्यावसायिक
विकास से
माध्यमिक
विद्यालय के
शिक्षकों के
प्रदर्शन में
सुधार होता
है। शिक्षण और
सीखने की
प्रक्रिया के
उत्थान के लिए
नियमित रूप से
सतत्
व्यावसायिक
विकास
प्रशिक्षण
कार्यक्रमों
की व्यवस्था
की जा सकती
है।
3. अध्ययन का औचित्य
आज
गुणात्मक
सुधार के लिए
शैक्षिक
क्रांति का
बिगुल बज रहा
है, शिक्षा
प्राचीन
परंपराओं के
चंगुल से
निकलकर
शिक्षण,
अधिगम और
प्रशिक्षण के
क्षेत्र में
मनोविज्ञान
की नई
पद्धतियों का
प्रयोग कर रही
है। पहले जहां
केवल मानसिक
विकास और
सीखना ही
महत्वपूर्ण
था, वहीं
आज सर्वांगीण
विकास पर जोर
दिया जा रहा है।
पहले शिक्षक
मुखिया था, निदेशक
था, अब
मित्र है, दार्शनिक
है, मार्गदर्शक
है। बच्चा अब
एक निष्क्रिय
श्रोता नहीं
बल्कि एक
सक्रिय इकाई
है। आज शिक्षक
की भूमिका पर
अनेक
प्रश्नचिह्न
उठ रहे हैं, अनेक
प्रश्न उठ रहे
हैं कि शिक्षक
कैसा हो? जहाँ नित
नए बदलावों को
लक्ष्य किया
जा रहा है, वहीं
इस श्रृंखला
में शिक्षक के
सामने एक चुनौती
है, अब
देखना होगा कि
शिक्षक इसे
कैसे लेते हैं?
शिक्षक
विद्यार्थियों
के शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, नैतिक, आध्यात्मिक
आदि सभी
प्रकार के
निर्माण एवं विकास
के लिए
उत्तरदायी
होता है।
शिक्षक में शिक्षकोन्मुख
योग्यताओं
अथवा विशेशताओं
का होना
आवश्यक है। एक
शिक्षक जो
अनेक व्यक्तियों
का निर्माण
करता है, वह केवल
एक व्यक्ति
नहीं बल्कि एक
संस्था है। विभिन्न
शिक्षिक
संस्थाओं के
द्वारा
समय-समय पर
शिक्षकों के
व्यावसायिक
उन्नयन के लिए
कई प्रशिक्षण
कार्यक्रमों
का आयोजन किया
जाता है। अतः
प्रस्तुत
अध्ययन के
माध्यम से शोधकर्ती
यह
जानना चाहती
है कि-
3.1. शोध के उद्देष्य
1) उच्च
माध्यमिक
स्तर के
सरकारी एवं
गैर सरकारी
विद्यालयों
के शिक्षकों
के
व्यावसायिक
विकास के
प्रति
प्रत्यक्षण
का अध्ययन
करना।
2) उच्च
माध्यमिक
स्तर के महिला
एवं पुरूश शिक्षकों
के
व्यावसायिक
विकास के
प्रति
प्रत्यक्षण का
अध्ययन करना।
3.2. शोध परिकल्पनाएँ
1) उच्च
माध्यमिक
स्तर के
सरकारी एवं
गैर सरकारी
विद्यालयों
के शिक्षकों
के
व्यावसायिक
विकास के
प्रति प्रत्यक्षण
में कोई
सार्थक अंतर
नहीं है।
2) उच्च
माध्यमिक
स्तर के महिला
एवं पुरूश शिक्षकों
के
व्यावसायिक
विकास के
प्रति प्रत्यक्षण
में कोई
सार्थक अंतर
नहीं है।
3.3. शोध विधि
प्रस्तुत
अनुसंधान में
समस्या की
प्रकृति को
ध्यान में
रखकर सर्वेखण
शोध विधि का
प्रयोग किया
गया है।
3.4. शोध की जनसंख्या
प्रस्तुत
शोध में जयपुर
जिले में उच्च
माध्यमिक
स्तर में
कार्यरत्
विभिन्न
विद्यालयों के
सभी शिक्षकों
को अध्ययन की
जनसंख्या है।
4. न्यादर्श एवं न्यादर्श चयन की विधि
प्रस्तुत
शोध अध्ययन
हेतु जयपुर
जिले में उच्च
माध्यमिक
स्तर में
कार्यरत्
विभिन्न
विद्यालयों
के 200 शिक्षकों
का चयन किया
गया है। न्यादर्श का चयन
करने हेतु
यादृच्छिक
विधि द्वारा
किया गया है।
4.1. शोध उपकरण
प्रस्तुत
शोध कार्य में
स्वनिर्मित
व्यावसायिक
विकास के
संदर्भ में
प्रत्यक्षीकरण
मापनी का
उपयोग उपकरण
के लिए किया
गया है।
4.2. शोध में प्रयुक्त सांख्यिकी
प्रस्तुत शोध
अध्ययन में
आंकड़ों का विश्लेशण
करने हेतु
टी-परीक्षण का
प्रयोग किया
गया है।
विश्लेशण
परिकल्पना
1 उच्च
माध्यमिक
स्तर के
सरकारी एवं
गैर सरकारी
विद्यालयों
के शिक्षकों
में
व्यावसायिक
विकास के
प्रति प्रत्यक्षण
में कोई
सार्थक अंतर
नहीं है।
सारणी 1
|
सारणी 1 सरकारी एवं
गैर सरकारी
विद्यालयों
के शिक्षकों
के
व्यावसायिक
विकास के
प्रति
प्रत्यक्षण |
|||||
|
समूह |
संख्या |
मध्यमान |
प्रमाप
विचलन |
टी मूल्य |
परिणाम |
|
सरकारी
विद्यालयों
के शिक्षक |
100 |
94.39 |
14.47 |
3.02 |
अस्वीकृत |
|
गैर
सरकारी
विद्यालयों
के शिक्षक |
100 |
88.61 |
12.35 |
||
|
स्वतंत्रता
का अंश= 198 0.05 सार्थकता
स्तर पर टी का
मान = 1.97 |
|||||
व्याख्या
व विश्लेशण
उपर्युक्त
सारणी संख्या 1
में प्रदशित
आंकड़ों से यह
स्पष्ट है कि
व्यावसायिक
विकास के
प्रति
प्रत्यक्षण
में उच्च
माध्यमिक स्तर
के सरकारी
विद्यालयों
के शिक्षकों
का मध्यमान 94.39 और
प्रमाप विचलन 14.47
है। वहीं गैर
सरकारी
विद्यालयों
के शिक्षकों
का मध्यमान 88.61 और
प्रमाप विचलन 12.53
है। आंकड़ों के
माध्यम से
टी-परीक्षण की
गणना करने पर
मान 3.02
प्राप्त हुआ
जो कि
स्वतंत्रता
के अंश 198
के 0.05
सार्थकता
स्तर पर
तालिका के मान
1.97
से अधिक है।
अतः शून्य
परिकल्पना
‘‘उच्च
माध्यमिक
स्तर के सरकारी
एवं गैर
सरकारी
विद्यालयों
के शिक्षकों
के
व्यावसायिक
विकास के प्रति
प्रत्यक्षण
में कोई
सार्थक अंतर
नहीं है‘‘
अस्वीकृत
होती है
अर्थात् उच्च
माध्यमिक स्तर
के सरकारी एवं
गैर सरकारी
विद्यालयों
के शिक्षकों
में
व्यावसायिक
विकास के
प्रति
प्रत्यक्षण में
सार्थक अंतर
है।
परिकल्पना
2
उच्च
माध्यमिक
स्तर के महिला
एवं पुरूश शिक्षकों
में
व्यावसायिक
विकास के
प्रति
प्रत्यक्षण में
कोई सार्थक
अंतर नहीं है।
सारणी 2
|
सारणी 2 महिला एवं
पुरूश
शिक्षकों के
व्यावसायिक
विकास के
प्रति प्रत्यक्षण |
|||||
|
समूह |
संख्या |
मध्यमान |
प्रमाप
विचलन |
टी मूल्य |
परिणाम |
|
महिला
शिक्षक |
100 |
94.32 |
15.07 |
0.80 |
स्वीकृत |
|
पुरूश
शिक्षक |
100 |
97.54 |
16.24 |
||
|
स्वतंत्रता
का अंश= 198 0.05 सार्थकता
स्तर पर टी का
मान = 1.97 |
|||||
व्याख्या
व विश्लेशण
उपर्युक्त
सारणी संख्या 2
में
प्रदर्षित
आंकड़ों से यह
स्पष्ट है कि
व्यावसायिक
विकास के
प्रति
प्रत्यक्षण
में उच्च
माध्यमिक
स्तर की महिला
शिक्षकों का
मध्यमान 99.32 और
प्रमाप विचलन 15.07
है। वहीं पुरूश
शिक्षकों का
मध्यमान 97.54 और
प्रमाप विचलन 16.24
है। आंकड़ों के
माध्यम से
टी-परीक्षण की
गणना करने पर
मान 0.80
प्राप्त हुआ
जो कि
स्वतंत्रता
के अंश 198
के 0.05
सार्थकता
स्तर पर
तालिका के मान
1.97
से कम है। अतः
षून्य
परिकल्पना
‘‘उच्च माध्यमिक
स्तर के महिला
एवं पुरूश शिक्षकों
के
व्यावसायिक
विकास के
प्रति
प्रत्यक्षण में
कोई सार्थक
अंतर नहीं है।‘‘
स्वीकृत होती
है अर्थात्
उच्च
माध्यमिक स्तर
के महिला एवं
पुरूश शिक्षकों
में
व्यावसायिक
विकास के
प्रति
प्रत्यक्षण में
सार्थक अंतर
नहीं है।
5. निष्कर्ष
उच्च
माध्यमिक
स्तर के
सरकारी एवं
गैर सरकारी
विद्यालयों
के शिक्षकों
में
व्यावसायिक
विकास के
प्रति
प्रत्यक्षण में
सार्थक अंतर
पाया गया।
उच्च
माध्यमिक
स्तर के महिला
एवं पुरूश शिक्षकों
में
व्यावसायिक
विकास के
प्रति
प्रत्यक्षण में
सार्थक अंतर
नहीं पाया
गया।
6. सुझाव
·
सरकारी और
गैर-सरकारी
दोनों प्रकार
के शिक्षकों
को एक समान
व्यावसायिक
प्रशिक्षण और
कार्यशालाओं
में भाग लेने
का अवसर दिया
जाना चाहिए, जिससे
उनके विकास
में समानता
लाई जा सके।
·
निजी
विद्यालयों
में कार्यरत
शिक्षकों के लिए
विशेश सरकारी
सहायता
योजनाएं चलाई
जाएं,
जैसे कि
ऑनलाइन
टीचिंग कोर्स, डिजिटल
सर्टिफिकेशन
प्रोग्राम, आदि।
·
व्यावसायिक
विकास के
कार्यक्रमों
में महिला
शिक्षकों की
सक्रिय
सहभागिता को
प्रोत्साहित
किया जाए, विशेश
रूप से
दूरदराज़
क्षेत्रों
में कार्यरत
महिला
शिक्षकों के
लिए अनुकूल
सुविधाएं
सुनिश्चित की
जाएं।
·
विद्यालय
स्तर पर
निरंतर
व्यावसायिक
विकास प्रशिक्षण
कार्यक्रमों
की नियमित
व्यवस्था की
जाए।
·
शिक्षकों
के
व्यावसायिक
विकास पर
आधारित प्रशिक्षणों
के उपरांत
नियमित
फीडबैक और
प्रभाव
मूल्यांकन
किया जाए, ताकि
वास्तविक
आवश्यकता के
अनुरूप
परिवर्तन
संभव हो सके।
·
ऑनलाइन और
ऑफलाइन दोनों
माध्यमों में
शिक्षकों के
लिए साझा मंच
बनाए जाएं, जहाँ
वे
विचार-विमर्श, संसाधन
साझा और
सहयोगात्मक
अधिगम में भाग
ले सकें।
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