Original Article
A STUDY ON ACHIEVEMENT MOTIVATION AND ADOLESCENT PROBLEMS AMONG ADOLESCENT STUDENTS
किशोर विद्यार्थियों
में उपलब्धि
अभिप्रेरणा
एवं युवा
समस्याओं पर
अध्ययन
|
Dr. Anita
Dadhich 1*, Nisha Kumari Gautam 2 1 Research Supervisor, Nirwan University, Jaipur, Rajasthan, India 2 Researcher,
Nirwan University, Jaipur, Rajasthan, India |
|
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|
ABSTRACT |
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|
English: This study analyzes the relationship between achievement motivation and adolescent problems among adolescent students. The main objective of the study is to examine the differences and relationships between the level of achievement motivation and adolescent problems (educational, family, social, and emotional problems). A sample of 200 adolescent students (equal number of boys and girls) was selected. The Achievement Motivation Scale and the Adolescent Problem Inventory were used. The collected data were analyzed using correlation, mean, critical ratio, etc. The results revealed a negative and significant relationship between achievement motivation and adolescent problems. Hindi: यह
अध्ययन
किशोर
विद्यार्थियों
में उपलब्धि
अभिप्रेरणा
तथा युवा
समस्याओं के
बीच संबंध का
विश्लेषण
करता है।
अध्ययन का
मुख्य उद्देश्य
उपलब्धि
अभिप्रेरणा
के स्तर तथा
युवा समस्याओं
(शैक्षिक, पारिवारिक,
सामाजिक
एवं
भावनात्मक
समस्याएँ) के
मध्य अंतर व
संबंध का
परीक्षण
करना है।
न्यादर्श
हेतु 200 किशोर
विद्यार्थी (
छात्र और
छात्राओं की
समान संख्या)
का चयन किया
गया।
उपलब्धि
अभिप्रेरणा
स्केल तथा
युवा समस्या
सूची का
प्रयोग किया
गया है।
प्राप्त
आँकड़ों का
विश्लेषण
सहसंबंध, माध्य,
क्रांतिक
अनुपात आदि
से किया गया।
परिणामों से
स्पष्ट हुआ
कि उपलब्धि
अभिप्रेरणा और
युवा
समस्याओं के
बीच
नकारात्मक
एवं सार्थक
संबंध पाया
गया। Keywords: Achievement Motivation, Youth
Problems, Adolescent Students, उपलब्धि
अभिप्रेरणा, युवा
समस्या, किशोर
विद्यार्थी |
||
प्रस्तावना
किशोरावस्था
मानव
जीवन का
अत्यंत
संवेदनशील और
परिवर्तनशील
चरण है। इस
समय शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक
और सामाजिक
स्तर पर तीव्र
परिवर्तन
होते हैं। इसी
अवधि में
विद्यार्थी
अपनी शैक्षिक
उपलब्धियों
और भविष्य की
आकांक्षाओं
को आकार देते
हैं।
उपलब्धि
अभिप्रेरणा -वह
आंतरिक
प्रेरक शक्ति
है जो
विद्यार्थी
को लक्ष्य
निर्धारित
करने, कठिनाइयों
का सामना करने
और सफलता
प्राप्त करने
की दिशा में
प्रेरित करती
है।
युवा
समस्याएँ -
पारिवारिक
तनाव, शैक्षिक
दबाव, सामाजिक
चुनौतियाँ, व्यावहारिक
एवं
भावनात्मक
समस्याएँ
किशोर विद्यार्थियों
की प्रगति और
मनोवैज्ञानिक
संतुलन को
प्रभावित
करती हैं। अतः
दोनों के बीच
संबंध का
अध्ययन
महत्त्वपूर्ण
बन जाता है।
संबंधित
साहित्य की
समीक्षा
गंगवार
(2016) ने
’’आत्म-प्रत्यय, सृजनात्मकता
और उपलब्धि
अभिप्रेरणा
का वातावरण के
विभिन्न
स्तरों के साथ
सम्बन्ध का अध्ययन’’
किया।
शोधकर्ता ने
न्यादर्श के
रूप में 300
विद्यार्थियों
का चयन किया।
इस न्यादर्श में
क्रमशः 145
ग्रामीण तथा 155
शहरी
विद्यार्थी
थे।
सांख्यिकी
गणनोपरांत
निम्न
निष्कर्ष पाया
कि- निम्न एवं
मध्यम अधिगम
वातावरण के
विद्यार्थियों
की
सृजनात्मकता
में सार्थक
अन्तर पाया
गया। इसी
प्रकार निम्न
एवं उच्च
अधिगम वातावरण
के
विद्यार्थियों
की
सृजनात्मकता
में भी सार्थक
अन्तर पाया
गया। जबकि
मध्यम एवं उच्च
अधिगम
वातावरण के
विद्यार्थियों
की सृजनात्मकता
में सार्थक
अन्तर नहीं
पाया गया।
वाघमारे
(2017) ने ’’युवा
समस्याओं में
लिंग भेद का अध्ययन’’
महाराष्ट्र
के जलाना जिले
के 400 कॉलेज
विद्यार्थियों
के न्यादर्श
पर किया हैं।
एम0 वर्मा
द्वारा
निर्मित ‘युवा
समस्या
अनुसूची’ का
प्रयोग युवा
समस्या के
मापन हेतु
किया गया है।
अध्ययन के
परिणाम बताते
हैं कि महिला
विद्यार्थियों
के पास
पारिवारिक
एवं कॉलेज
समस्या पुरुष विद्यार्थी
की तुलना में
अधिक है एवं
महिला एवं
पुरुष विद्यार्थी
वैयक्तिक एवं
सामाजिक
समस्या के सन्दर्भ
में एक-दूसरे
के समान हैं।
शोध
प्रश्न
क्या
किशोर
विद्यार्थियों
में उपलब्धि
अभिप्रेरणा
और युवा
समस्याओं के
बीच कोई संबंध
है?
क्या
छात्र और
छात्राओं के
बीच कोई
सार्थक अंतर
पाया जाता है?
शोध
उद्देश्य
·
किशोर
विद्यार्थियों
की उपलब्धि
अभिप्रेरणा
का अध्ययन
करना।
·
किशोर
विद्यार्थियों
की युवा
समस्याओं का अध्ययन
करना।
·
उपलब्धि
अभिप्रेरणा
एवं युवा
समस्याओं के बीच
संबंध का
विश्लेषण
करना।
परिकल्पनाएँ
H₀₁ - किशोर
विद्यार्थियों
की उपलब्धि
अभिप्रेरणा
और युवा
समस्याओं के
बीच कोई
सार्थक सहसंबंध
नहीं है।
H₀₂ – छात्र और
छात्राओं के
बीच उपलब्धि
अभिप्रेरणा
में कोई
सार्थक अंतर
नहीं है।
H₀₃ – छात्र और
छात्राओं के
बीच युवा
समस्याओं के स्तर
में कोई
सार्थक अंतर
नहीं है।
शोध
विधि
·
शोध
प्रकार दृ
वर्णनात्मक
सर्वेक्षण
विधि
·
न्यादर्शः
- 200 किशोर
विद्यार्थी (100
छात्र, 100 छात्रा)
·
उपकरण
-उपलब्धि
अभिप्रेरणा
-डॉ. डी. गोपाल
राव, युवा
समस्या- के एम.
संध्या शर्मा
·
सांख्यिकी
तकनीक - माध्य, प्रमाप
विचलनए
क्रांतिक
अनुपात, सहसंबंध
गुणांक (r), सांख्यिकीय
विश्लेषण एवं
तालिकाएँ
तालिका
1
|
तालिका
1 विद्यार्थियों
की उपलब्धि
अभिप्रेरणा
एवं युवा
समस्याओं के
बीच कोई
सार्थक
सहसंबंध नहीं
है। |
||||||
|
चर |
संख्या |
मध्यमान |
प्रमाप
विचलन |
सहसम्बन्ध
गुंणांक |
सहसम्बन्ध |
सार्थकता
स्तर |
|
उपलब्धि
अभिप्रेरणा युवा
समस्या |
200 |
62.10 |
10.40 |
0.98 |
नकारात्मक |
0.01 |
|
51.30 |
13.20 |
|||||
उपर्युक्त
तालिका
क्रमांक (1) उपलब्धि
अभिप्रेरणा
और युवा
समस्याओं के
बीच 0.98 का
नकारात्मक
सहसंबंध पाया
गया। इसका अर्थ
है कि उपलब्धि
अभिप्रेरणा
और युवा
समस्याओं के
मध्य
नकारात्मक
एवं सार्थक
सहसंबंध प्राप्त
हुआ। मध्यम
स्तर का
नकारात्मक
संबंध है (न
बहुत कम, न
बहुत अधिक)।
इसका अर्थ है
कि जैसे-जैसे
विद्यार्थियों
की उपलब्धि
अभिप्रेरणा
बढ़ती है, युवा
समस्याओं का
स्तर घटता
जाता है। अतः
निर्धारित
शून्य
परिकल्पना
अस्वीकृत की
जाती है।
तालिका
2
|
तालिका
2 छात्र
और छात्राओं
के बीच
उपलब्धि
अभिप्रेरणा
में कोई
सार्थक अंतर
नहीं है। |
|||||||
|
चर |
संख्या |
लिंग |
मध्यमान |
प्रमाप
विचलन |
स्वतंत्रता
के अंश पर |
क्रान्तिक
अनुपात |
सार्थकता
स्तर |
|
उपलब्धि
अभिप्रेरणा |
100 |
छात्र |
45.20 |
6.15 |
198 |
2.42 |
0.05 |
|
100 |
छात्रा |
48.90 |
5.46 |
||||
उपर्युक्त
तालिका
क्रमांक (2)- छात्र और
छात्राओं की
उपलब्धि
अभिप्रेरणा का
मध्यमान
क्रमशः 45.20 तथा 48.90
है एवं प्रमाप
विचलन क्रमश, 6.15 तथा 5.46 है।
इसके आधार पर
क्रांतिक
अनुपात 2.42 प्राप्त
हुआ है जो कि (DF) 198
स्वतंत्रता
के अंश पर 0.05
सार्थकता
स्तर के मान 1.97
से अधिक है।
अतः
निर्धारित
शून्य
परिकल्पना
अस्वीकृत की
जाती है। इस
आधार पर कहा
जा सकता है कि
छात्रों और
छात्राओं की
उपलब्धि अभिप्रेरणा
में पाया गया
अंतर
सांख्यिकीय
रूप से सार्थक
है। यह परिणाम
संकेत करता है
कि उपलब्धि
अभिप्रेरणा
के संदर्भ में
छात्राओं का स्तर
छात्रों की
तुलना में
अधिक है और यह
अंतर संयोग के
कारण नहीं है बल्कि
वास्तविक
अंतर को
दर्शाता है।
तालिका
3
|
तालिका
3 छात्र
और छात्राओं
के बीच युवा
समस्याओं
में कोई
सार्थक अंतर
नहीं है। |
|||||||
|
चर |
संख्या |
लिंग |
मध्यमान |
प्रमाप
विचलन |
स्वतंत्रता
के अंश पर |
क्रान्तिक
अनुपात |
सार्थकता
स्तर |
|
युवा
समस्या |
100 |
छात्र |
22.50 |
4.31 |
198 |
1.99 |
0.05 |
|
100 |
छात्रा |
23.80 |
4.10 |
|
|||
उपर्युक्त
तालिका
क्रमांक (3)- छात्र और
छात्राओं की
युवा
समस्याओं का
मध्यमान
क्रमशः 22.50 तथा 23.80
है एवं प्रमाप
विचलन क्रमश 4.31
तथा 4.10 है। इस
आधार पर
क्रांतिक
अनुपात 1.99
प्राप्त हुआ
है जो कि (DF) 198 स्वतंत्रता
के अंश पर 0.05
सार्थकता
स्तर के मान 1.97
से अधिक है।
अतः
निर्धारित
शून्य
परिकल्पना
अस्वीकृत की
जाती है। इस
आधार पर कहा
जा सकता है कि
छात्रों और
छात्राओं की
युवा समस्याओं
में पाया गया
अंतर
सांख्यिकीय
रूप से सार्थक
है। यह परिणाम
संकेत करता है
कि युवा समस्याओं
के संदर्भ में
छात्राओं का
स्तर छात्रों की
तुलना में
अधिक है और यह
अंतर संयोग के
कारण नहीं है
बल्कि
वास्तविक
अंतर को
दर्शाता है।
निष्कर्ष
·
उपलब्धि
अभिप्रेरणा
एवं युवा
समस्याओं के मध्य
नकारात्मक और
सार्थक
सहसंबंध पाया
गया।
·
उच्च
उपलब्धि
अभिप्रेरणा
वाले
विद्यार्थियों
में तनाव, भ्रम, शैक्षिक
समस्या व
सामाजिक
असहजता कम
देखी गई।
·
लड़कियों
में उपलब्धि
अभिप्रेरणा
लड़कों से अधिक
पाई गई।
·
लड़के
और लड़कियाँ
दोनों युवा
समस्याओं का
समान रूप से
अनुभव करती
हैं।
·
शैक्षिक
वातावरण, पारिवारिक
समर्थन और
साथियों का
प्रभाव दोनों
चरो को
प्रभावित
करता है।
सुझाव
·
विद्यालयों
में उपलब्धि
अभिप्रेरणा
बढ़ाने हेतु
लक्ष्य
निर्धारण
कार्यशालाएँ
आयोजित हों।
·
परामर्श
सेवाएँ, विशेषकर
भावनात्मक और
शैक्षिक तनाव
कम करने हेतु
उपलब्ध कराई
जाएँ।
·
अभिभावकों
को सहयोगी
वातावरण
प्रदान करने हेतु
जागरूक किया
जाए।।
References
Dash, M. (2006). Educational
Psychology (एजुकेशनल
साइकोलॉजी). Deep and
Deep Publications.
Mangal, S. K. (2012). Advanced Educational
Psychology (एडवांस्ड
एजुकेशनल
साइकोलॉजी). PHI
Learning.