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A STUDY OF THE IMPACT OF PARENTING STYLES ON THE DECISION-MAKING ABILITIES OF HIGHER SECONDARY STUDENTS

Original Article

A STUDY OF THE IMPACT OF PARENTING STYLES ON THE DECISION-MAKING ABILITIES OF HIGHER SECONDARY STUDENTS   

उच्चतर माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों पर अभिभावक शैली का उनकी निर्णय क्षमता पर अध्ययन  

 

Dr. Shaminder Kaur 1*, Madhu Sharma 2

1 Research Supervisor, Nirwan University, Jaipur, Rajasthan, India

2 Research Scholar, Nirwan University, Jaipur, Rajasthan, India  

 

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ABSTRACT

English: In the present era, parenting styles play a crucial role in the development of students' personality, behavior, and decision-making abilities. The decisions students make in their lives—such as educational, vocational, and social decisions—depend on their self-confidence, experiences, and family environment. Parents' disciplinary, permissive, or neglectful styles directly or indirectly influence students' thought processes and decision-making. The main objective of this study is to examine the impact of parenting styles on the decision-making abilities of higher secondary students. This study attempts to determine whether different parenting styles have a significant impact on students' decision-making abilities.

 

Hindi: वर्तमान युग में अभिभावकों की पालन-पोषण शैली विद्यार्थियों के व्यक्तित्व, व्यवहार एवं निर्णय क्षमता के विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। विद्यार्थियों के जीवन में लिए जाने वाले निर्णय-जैसे शैक्षिक, व्यावसायिक एवं सामाजिक निर्णयकृउनके आत्मविश्वास, अनुभव तथा पारिवारिक वातावरण पर निर्भर करते हैं। अभिभावकों की अनुशासनात्मक, उदार, या उपेक्षात्मक शैली विद्यार्थियों के विचार-निर्माण एवं निर्णय प्रक्रिया को प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से प्रभावित करती है। इस अध्ययन का मुख्य उद्देश्य उच्चतर माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों की निर्णय क्षमता पर अभिभावक शैली के प्रभाव का परीक्षण करना है। इसके अंतर्गत यह ज्ञात करने का प्रयास किया गया कि क्या विभिन्न अभिभावक शैली का विद्यार्थियों की निर्णय क्षमता पर कोई महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है।

 

Keywords: Higher Secondary Level, Students, Parenting Style, Decision-Making Ability, उच्च माध्यमिक स्तर, विद्यार्थी, पालन-पोषण शैली, निर्णय लेने की क्षमता


 

 

 

 

प्रस्तावना

शिक्षा केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक प्रक्रिया है जो बालक-बालिकाओं के संपूर्ण व्यक्तित्व विकास को प्रभावित करती है। इस विकास में विद्यालय के साथ-साथ परिवार, विशेष रूप से अभिभावकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। अभिभावक बच्चों की शिक्षा, सामाजिक कौशल, भावनात्मक बुद्धिमत्ता, निर्णय क्षमता और अधिगम शैली को प्रभावित करने वाले प्रमुख घटकों में से एक होते हैं।बालक-बालिकाओं के शैक्षिक एवं व्यक्तिगत विकास में अभिभावकों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।

 

अभिभावक शैली

अभिभावक शैली, अभिभावकों के उन व्यवहार, अभिवृत्ति एवं शैली जो वे अपने पाल्यों के पालन-पोषण करने एवं उनके साथ अन्तःक्रिया करने में प्रयोग करते है एवं जिसका प्रभाव उनके पाल्यों के विकास एवं पूर्ण स्वास्थ्य पर पड़ता है। अतः अभिभावक शैली से तात्पर्य माता-पिता के उस व्यवहार, दृष्टिकोण और मार्गदर्शन से है जिसके माध्यम से वे अपने बच्चों के विकास अनुशासन और निर्णयों को प्रभावित करते हैं।

 

निर्णय क्षमता

निर्णय लेने का अर्थ किसी राय पर क्रिया करने की रूपरेखा तैयार करना अथवा मस्तिष्क में किसी कार्य को करने की योजना तैयार करना है। प्रायः निर्णय तभी लिए जाते हैं जब सामने समस्या हो और जिसके कारण कार्य करने में बाधा उत्पन्न हो रही हो। कोई भी प्रशासक तभी निर्णय ले सकता है जब उसे समस्या का पूर्ण ज्ञान हो। बगैर समस्या को समझे न तो कोई निर्णय लिया जा सकता है और न ही हम कोई उसका समाधान ही प्रस्तुत कर सकते हैं। समस्या को समझते ही हमारे मस्तिष्क में नवीन सृजनात्मक विचार आने लगते हैं और उनका प्रयोग समस्याका समाधान करने के लिए ‘निर्णय’ के रूप में करते हैं यही कारण है कि डब्ल्यू ब्रुक ग्रोब्स ने निर्णय लेने के विषय में कहा है, ‘‘समस्या अथवा प्रकरण से सम्बन्धित दो अथवा दो से अधिक तर्कयुक्त सम्भावित समाधानों का चयन करना ही निर्णय लेना समझा जाता है। इसके अन्तर्गत समय एवं परिस्थिति के अनुरूप समस्या के समाधान के लिए अधिक उचित हल ढूँढ लिया जाता है।’’ अतः निर्णय क्षमता से तात्पर्य व्यक्ति की उस मानसिक योग्यता से है जिसके द्वारा वह विभिन्न विकल्पों का विश्लेषण कर उचित विकल्प का चयन करता है और उसके परिणाम को स्वीकार करता है।  समस्या कथन- “उच्चतर माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों पर अभिभावक शैली का उनकी निर्णय क्षमता पर अध्ययन”

 

शोध साहित्य

सुशीला, (2018) द्वारा किशोर विद्यार्थियों की दुष्चिता का अभिभावक शैली के साथ सहसंबंध ज्ञात करने के उद्देश्य से शोध कार्य किया गया। निष्कर्ष से ज्ञात हुआ कि सतावादी अभिभावक शैली का किशोरों की दुष्चिता के साथ सार्थक सम्बन्ध पाया गया जबकि अनुमोदित अभिभावक शैली किशोरों की दुष्चिता के साथ सार्थक रूप से सहसम्बन्धित नहीं पाई गयी।

सरवर, (2016)  द्वारा बच्चों के व्यवहार पर अभिभावक शैली के प्रभाव का अध्ययन किया गया। शोध का उद्देश्य बच्चों के भविष्य पर अभिभावकों की भूमिका का अध्ययन करना था। निष्कर्षों से ज्ञात हुआ कि सत्तावादी अभिभावक शैली बच्चों को विद्रोही बनने ओर अभिभावकों द्वारा अनावश्यक शक्ति का उपयोग करने के कारण समस्याग्रस्त व्यवहार को अपनाने के लिए प्रेरित करती हे। इसके विपरीत, आधिकारिक अभिभावक शैली बच्चों के लिए प्रभावी हे, क्योंकि यह मध्यम स्तर की अभिभावक शैली है। जो अभिभावक अपने बच्चों के साथ अधिकतम समय बिताते हें, उनके बच्चों में अपराधी व्यवहार की संभावना कम होती है।

मीना एवं सूद, (2015) ने प्रस्तुत अध्ययन में 90 छात्राओं के स्वास्थ्य, खानपान आदतों की निर्णय क्षमता कौषल का उनके जीवन कौषल पर पडने वाले प्रभाव का अध्ययन किया। इसके लिए षोधकर्ता ने पूर्व एवं पच परीक्षण का अनुप्रयोग किया । प्रमुख रूप से निष्कर्ष में पाया गया कि छात्राओं के हस्तक्षेपीय समूह एवं अहस्तक्षेपीय समूह की निर्णय क्षमता के मध्यमान में सार्थक अंतर पाया गया। हस्तक्षेपीय समूह के निर्णय क्षमता के पूर्व परीक्षण एवं पच परीक्षण के मध्यमान मे सार्थक अंतर पाया गया । अहस्तक्षेपीय समूह की निर्णय क्षमता के पूर्व एवं पच परीक्षण के मध्यमान में सार्थक अंतर नही पाया गया।

 

अध्ययन के उद्देश्य

1)     अभिभावकों के अधिकतम एवं निम्नतम हस्तक्षेप का उनके बालक-बालिकाओं की निर्णय क्षमता पर क्या प्रभाव पड़ता है।

शोध की परिकल्पनाएँ

परिकल्पना 01 अधिकतम हस्तक्षेप वाले अभिभावकों के बालकों-बालिकाओं की निर्णय क्षमता  में कोई सार्थक अंतर नहीं है।

परिकल्पना 02 निम्नतम हस्तक्षेप वाले अभिभावकों के बालकों-बालिकाओं की निर्णय क्षमता  में कोई सार्थक अंतर नहीं है।

शोध की विधि

1)     प्रस्तुत शोध अध्ययन में सर्वेक्षण विधि की प्रश्नावली प्रविधि प्रयोग किया गया है।  यह सर्वेक्षण के अंतर्गत आने वाला एक महत्वपूर्ण और लोकप्रिय सांख्यिकी संग्रहण का तरीका है।

2)     न्यादर्शः- अध्ययन के लिए 200 विद्यार्थियों का न्यादर्श यादृच्छिक पद्धति से चयनित किया गया जिनमें 100 बालक व 100 बालिकाएँ सम्मिलित हैं।

3)     प्रस्तुत अध्ययन में आंकडों के विश्लेषण हेतु मध्यमान, मानक विचलन एवं क्रान्तिक अनुपात आदि सांख्यिकी को प्रयुक्त किया गया है।

शोध अध्ययन हेतु प्रयुक्त उपकरण

अभिभावक शैली, के लिए मानवीकृत प्रश्नावली का उपयोग विद्यार्थियों की निर्णय निर्माण स्वनिर्मित   उपकरण का प्रयोग किया गया।

अध्ययन के उद्देश्य के अनुसार

अभिभावकों के अधिकतम एवं निम्नतम हस्तक्षेप का उनके बालक-बालिकाओं की निर्णय क्षमता पर क्या प्रभाव पड़ता है।

परिकल्पना 01

अधिकतम हस्तक्षेप वाले अभिभावकों के बालकों-बालिकाओं की निर्णय क्षमता  में कोई सार्थक अंतर नहीं है।

तालिका 1

समूह

संख्या

लिंग

मध्यमान

प्रमाप विचलन

SDM

स्वतंत्रता के अंश पर

क्रांतिक अनुपात

सार्थकता स्तर

अधिकतम हस्तक्षेप

100

बालकों

97

6.65

0.67

198

1.94

P <0.05

100

बालिकाओं

99

5.07

0.51

 

उपर्युक्त तालिका क्रमांक (1)  के अनुसार - अधिकतम हस्तक्षेप वाले अभिभावकों के बालकों-बालिकाओं की निर्णय क्षमता  का मध्यमान क्रमश 97 तथा 99 है एवं प्रमाप विचलन क्रमशः 6.65 तथा 5.07 है इसके आधार पर क्रांतिक अनुपात 1.94 प्राप्त हुआ है जो कि ;क्थ्द्ध  198 स्वतंत्रता के अंश पर 0.05 सार्थकता स्तर के मान 1.98 से कम है। अतः निर्धारित शून्य परिकल्पना स्वीकृत की जाती है इस आधार पर कहा जा सकता है कि अधिकतम हस्तक्षेप वाले अभिभावकों के बालकों-बालिकाओं की निर्णय क्षमता  में कोई सार्थक अंतर नहीं है।

परिकल्पना 02

निम्नतम हस्तक्षेप वाले अभिभावकों के बालकों-बालिकाओं की निर्णय क्षमता  में कोई सार्थक अंतर नहीं है।

तालिका 2

समूह

संख्या

लिंग

मध्यमान

प्रमाप विचलन

SDM

स्वतंत्रता के अंश पर

क्रांतिक अनुपात

सार्थकता स्तर

निम्नतम हस्तक्षेप

100

बालकों

28.1

6.27

0.72

198

2.63

P > 0.05

100

बालिकाओं

30.18.

4.31

0.72

 

उपर्युक्त तालिका क्रमांक (2) के अनुसार निम्नतम हस्तक्षेप वाले अभिभावकों के बालकों-बालिकाओं की निर्णय क्षमता  का मध्यमान क्रमशः 28.10 तथा 30.18. है एवं प्रमाप विचलन क्रमशः 6.27 तथा 4.31 है इसके आधार पर क्रांतिक अनुपात 2.63 प्राप्त हुआ है जो कि (DF) 198 स्वतंत्रता के अंश पर 0.05 सार्थकता स्तर के मान 1.98 से अधिक है अतः निर्धारित शुन्य परिकल्पना अस्वीकृत की जाती है इस आधार पर कहा जा सकता है कि निम्नतम हस्तक्षेप वाले अभिभावकों के बालकों-बालिकाओं की निर्णय क्षमता में सार्थक अंतर है। तालिका में दिए गए समूह के मध्यमान का अवलोकन करने पर यह स्पष्ट होता है कि बालकों का मध्यमान वा बालिकाओं का मध्यमान में निम्न अंतर है इस आधार पर हम कह सकते हैं कि निम्नतम हस्तक्षेप वाले अभिभावकों की बालिकाओं की निर्णय क्षमता अधिक है बालकों की तुलना में।

 

शैक्षिक महत्त्व

·        शिक्षकों को विद्यार्थियों में आत्मनिर्भरता एवं विवेकशीलता विकसित करने पर बल देना चाहिए।

·        अभिभावकों को अनुशासन एवं स्वतंत्रता का संतुलन बनाए रखना चाहिए।

·        परिवार में संवाद, प्रोत्साहन और सहयोग का वातावरण बनाया जाए।

 

निष्कर्ष

सांख्यिकीय विश्लेषण के लिए माध्य, मानक विचलन, एवं ज-परीक्षण का उपयोग किया गया। विश्लेषण के परिणामों से यह स्पष्ट हुआ कि विभिन्न अभिभावक शैलियों के विद्यार्थियों की निर्णय क्षमता में सांख्यिकीय रूप से कोई महत्वपूर्ण अंतर नहीं पाया गया, लिंग के आधार पर अभिभावकों के निम्नतम हस्तक्षेप का बालिकाओं की निर्णय क्षमता में सार्थक अंतर पाया गया है।

अतः निष्कर्ष में कहा जा सकता है कि विद्यार्थियों की निर्णय क्षमता के विकास में परिवार का भावनात्मक सहयोग, संवादपूर्ण वातावरण, तथा स्वतंत्रता प्रदान करने वाली अभिभावक शैली का महत्वपूर्ण योगदान होता है।

 

सुझाव

1)     भविष्य के अध्ययन में पारिवारिक पृष्ठभूमि और सामाजिक-आर्थिक स्तर को भी शामिल किया जा सकता है।

2)     ग्रामीण और शहरी विद्यार्थियों की तुलना से भिन्न परिणाम मिल सकते हैं।

3)     निर्णय क्षमता के विकास हेतु मनोवैज्ञानिक प्रशिक्षण कार्यक्रम विकसित किए जा सकते हैं।

4)     अभिभावक शिक्षा के माध्यम से सकारात्मक पालन-पोषण की समझ बढ़ाई जाए।।

 

REFERENCE

Baumrind, D. (1991). Parenting Styles and Adolescent Development. Journal of Early Adolescence, 11(1), 56–95. https://doi.org/10.1177/0272431691111004   

Bhatnagar, S. M., and Aggarwal, R. K. (2010). Parenting Style Scale. Agra, India: National Psychological Corporation. 

Joshi, P. (2012). Decision-Making Ability Test. Agra, India: National Psychological Corporation. 

Maccoby, E. E., and Martin, J. A. (1983). Socialization in the Context of the Family: Parent–Child Interaction. In P. H. Mussen (Ed.), Handbook of Child Psychology: Vol. 4. Socialization, Personality, and Social Development (1–101). New York, NY: Wiley. 

Meena, and Sood, R. (2015). A Study of the Effect of Decision-Making Ability Regarding Healthy Eating Habits on Life Skills of Adolescent Girls (किशोरी छात्राओं के स्वस्थ खान-पान आदतों की निर्णय क्षमता का उनके जीवन कौशल पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन). The Indian Educational Review, 53(1), 39–51.

Sharma, A. (2015). Parenting Style and Personality Development of Students (अभिभावक शैली एवं विद्यार्थियों का व्यक्तित्व विकास). Surabhi Prakashan.

Sultan, A., et al. (2016). Influence of Instructional and Parenting Styles on Children’s Behavioural and Educational Development (इंस्ट्रक्शनल व पेरेंटिंग स्टाइल्स का बच्चों के व्यवहार एवं शैक्षिक विकास पर प्रभाव). International Journal of Developmental Studies, 3(2), 222–249. https://doi.org/10.22555/ijds.v3i2.1036

Sushila. (2018). A Study of the Relationship Between Depression and Parenting Styles Among Adolescents. International Journal of Engineering Development and Research, 6(1), 42–44. https://www.ijedr.org/papers/IJEDR1801008.pdf    

 

 

 

 

 

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